जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन रोकना 'बेहद निंदनीय': सीपीआई महासचिव डी. राजा का सरकार पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव डी. राजा ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदम 'अनुचित और बेहद निंदनीय' हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब खबरें हैं कि दिल्ली के दो प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर कई ट्रेनें रद्द की गई हैं और 56 मेट्रो स्टेशनों पर सेवाएँ प्रभावित हुई हैं।
राजा का सरकार पर आरोप
डी. राजा ने बातचीत में कहा, 'मुझे पता है कि यह बहुत गलत है। सरकार जिस तरह से विरोध-प्रदर्शनों को रोकने या उनमें बाधा डालने के लिए कदम उठा रही है, वह बेहद निंदनीय है।' उन्होंने आरोप लगाया कि मेट्रो स्टेशन बंद किए जा रहे हैं, लोगों को सड़कों पर चलने से रोका जा रहा है और प्रदर्शनकारियों में भय पैदा करने के लिए 'हर जगह अतिरिक्त बल तैनात' किए जा रहे हैं।
हालाँकि, राजा ने विश्वास जताया कि जनता इन पाबंदियों से पार पाएगी। उन्होंने कहा, 'आखिरकार लोग तो लोग हैं, वे जानते हैं कि इन सबका सामना कैसे करना है।'
इंडिया ब्लॉक की बैठक और आगे की रणनीति
डी. राजा ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में होने वाली इंडिया ब्लॉक की बैठक का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया, 'हमारी पार्टी इस बैठक में हिस्सा लेगी और मैं खुद इसमें शामिल होऊँगा। हम चर्चा करेंगे कि इंडिया ब्लॉक की सहयोगी पार्टियाँ क्या कदम उठा सकती हैं, राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल की संख्या क्या होगी और समय कब तय किया जाएगा।'
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक के बाद चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर विरोध-प्रदर्शन का एक और दौर शुरू हो सकता है, जिसे विपक्षी दलों ने 'वोट चोरी' करार दिया है।
चुनाव आयोग से बढ़ता टकराव
गौरतलब है कि यह समूची हलचल विपक्षी दलों और भारत के चुनाव आयोग (ECI) के बीच गहराते तनाव की पृष्ठभूमि में हो रही है। विवाद का केंद्र मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्ष की माँग है। यह ऐसे समय में आया है जब संस्थागत विश्वसनीयता पर बहस पहले से ही राजनीतिक विमर्श में केंद्रीय स्थान पाए हुए है।
राष्ट्रपति से मिलने की माँग
इंडिया ब्लॉक ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने का समय माँगा है। विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि राष्ट्रपति समय नहीं देतीं, तो वे अपनी माँगें मनवाने के लिए 'दूसरे विकल्पों' पर विचार करेंगे — हालाँकि इन विकल्पों का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
आने वाले घंटों में 10 अक्टूबर का जंतर-मंतर प्रदर्शन और इंडिया ब्लॉक की बैठक, दोनों मिलकर भारतीय राजनीति में एक नया मोर्चा खोल सकते हैं।