जंतर-मंतर सूची से हटाया गया: इंडिया ब्लॉक भड़का, नेताओं ने कहा — 'सरकार घबराई हुई है'
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्रालय ने 12 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थलों की सूची से हटा दिया और उसकी जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान तथा पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को वैकल्पिक स्थल घोषित किया। इस निर्णय के विरोध में इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने एकजुट होकर सरकार पर जनता की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया और कहा कि यह कदम सरकार की घबराहट को उजागर करता है।
सरकार का फैसला और नए स्थल
गृह मंत्रालय के इस आदेश के तहत अब राजधानी नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर किसी भी विरोध-प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी। दशकों से यह स्थल सरकार की नीतियों के विरुद्ध प्रदर्शन का सबसे प्रतिष्ठित केंद्र रहा है। सरकार ने तीन वैकल्पिक स्थान — रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान — प्रस्तावित किए हैं, जो शहर के केंद्र से दूर हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के विरुद्ध आंदोलन चला रहा है और सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च की योजना बना रहा है।
इंडिया ब्लॉक नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि पार्टी जो तय करेगी, वही होगा। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, 'यह दिखाता है कि वे घबराए हुए हैं। वे लोगों की आवाज़ दबाना चाहते हैं, लेकिन प्रजातंत्र में जनता की आवाज़ कभी नहीं दबती। हमारा आंदोलन जारी रहेगा।'
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि 'अब हिमालय की चोटी पर विरोध-प्रदर्शन करेंगे।' वहीं कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, 'हम लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। राहुल गांधी ने साफ कहा है कि यह लोकतंत्र की रक्षा और चुनावी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की लड़ाई है।'
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि 'भाजपा डरी हुई है। वे जानते हैं कि सत्ता उनके पास ज़्यादा समय तक नहीं रहेगी।' कांग्रेस नेता एस. सैदुज़्ज़मान ने कहा कि चुनावों में धांधली हुई है, गलत वोट काटे गए हैं और बैलेट पेपर तथा ईवीएम पर भी सवाल उठाए।
सीजेपी और बिहार विपक्ष की आवाज़
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, 'जंतर-मंतर इतने सालों से विरोध का एक ऐतिहासिक केंद्र रही है — आपने उस तय जगह को ही बंद कर दिया। तो अब देश का हर शहर, हर कोना जंतर-मंतर बन जाएगा। जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, हम पीछे नहीं हटेंगे।'
बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि एसआईआर के विरुद्ध लड़ाई की शुरुआत बिहार से हुई थी। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र को कुचला जा रहा है और जब लोकतंत्र पर लगातार हमले हो रहे हों, तो हम चुप कैसे रह सकते हैं? चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए — इसके लिए हम कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं।'
कांग्रेस का कोर्ट पर भरोसा और आगे की रणनीति
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि पार्टी मुख्य न्यायाधीश की कही बातों के अनुसार आगे बढ़ेगी और याचिका दायर करेगी। उन्होंने कोर्ट पर भरोसा जताया।
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि यह आंदोलन उस दिन से चल रहा है जब राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी भवन में एसआईआर का मुद्दा पहली बार उठाया और तथ्यों के साथ साबित किया कि यह 'पूरी तरह धोखाधड़ी वाला, गलत और गुमराह करने वाला प्रोसेस' है। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश इस मुद्दे पर जाग चुका है।
गौरतलब है कि जंतर-मंतर को सूची से हटाने का यह निर्णय ऐसे वक्त में आया है जब इंडिया ब्लॉक सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह टकराव कानूनी और राजनीतिक — दोनों मोर्चों पर और तेज़ होने के संकेत हैं।