जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन के लिए अनुपयुक्त था: किरण बेदी, रामलीला मैदान के लिए माँगा स्पष्ट सुरक्षा प्लान
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उप-राज्यपाल किरण बेदी ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि जंतर-मंतर की संकरी गलियाँ, आसपास की संवेदनशील इमारतें और सरकारी कार्यालयों की निकटता इसे विरोध-प्रदर्शन के लिए सबसे कम उपयुक्त स्थल बनाती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति देते समय सुरक्षा और संचालन की पारदर्शी योजना अनिवार्य रूप से सार्वजनिक की जानी चाहिए।
एक्स पर किरण बेदी का बयान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से बेदी ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की जगहों के बदलते इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा, 'दिल्ली शहर में पुलिसिंग के अपने कार्यकाल के दौरान, मैंने विरोध-प्रदर्शन की जगहों को बदलते देखा है। प्रधानमंत्री आवास, तीन मूर्ति मार्ग (तब श्रीमती गांधी का आवास) से लेकर 1970 के दशक की शुरुआत में लुटियंस दिल्ली की सड़कों तक, 1980 के दशक में इंडिया गेट, बोट क्लब और फिर जंतर-मंतर तक।'
उन्होंने शहरी नियोजकों को आगाह करते हुए कहा, 'हर शहर को लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के लिए एक खुली जगह की जरूरत होती है, लेकिन अक्सर इसकी व्यवस्था करना भूल जाते हैं। तंग गलियों और संवेदनशील इमारतों व दफ्तरों के पास होने के कारण जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर सबसे कम उपयुक्त था।'
प्रशासनिक निर्णय पर सवाल
बेदी ने कनॉट प्लेस जैसे व्यावसायिक क्षेत्र की निकटता का हवाला देते हुए कहा कि उस समय प्रशासन ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन-स्थल घोषित करने में गलती की और इतने वर्षों तक उसे सुधारा नहीं। उनके अनुसार, इस बदलाव के लिए अदालती हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी, जो स्वयं इस देरी की कहानी कहता है।
उन्होंने कहा, 'अब हमें रामलीला मैदान के लिए एक साफ सुरक्षा और कामकाज की योजना चाहिए, जिसे मंजूरी देते समय बताया जाए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली पुलिस ने अधिकृत प्रदर्शन-स्थलों की सूची में बड़ा बदलाव किया है।
दिल्ली पुलिस का नया आदेश
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर 2026 को एक स्टैंडिंग ऑर्डर जारी कर जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन-स्थलों की सूची से हटा दिया। इसके स्थान पर तीन नए स्थलों की पहचान की गई है: रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड (उत्तरी दिल्ली) और सीबीडी ग्राउंड (शाहदरा)।
गौरतलब है कि जंतर-मंतर संसद भवन से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि बुराड़ी ग्राउंड लगभग 23 किलोमीटर और सीबीडी ग्राउंड लगभग 12 किलोमीटर दूर है। रामलीला मैदान जंतर-मंतर से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
सरकार के इस निर्णय की विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों की ओर से आलोचना की गई है। आलोचकों का कहना है कि संसद से दूर स्थलों पर प्रदर्शन को सीमित करना लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की भावना के विरुद्ध है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य अपनी बात सीधे नीति-निर्माताओं तक पहुँचाना होता है।
यह पहली बार नहीं है जब जंतर-मंतर को लेकर विवाद उठा हो — पिछले कई वर्षों में न्यायालय भी इस स्थल पर प्रदर्शनों के प्रबंधन को लेकर चिंता जता चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या नए स्थलों पर प्रदर्शनकारियों की पहुँच और सुविधाओं का उचित प्रबंध किया जाता है।