13 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन के लिए अनुपयुक्त था: किरण बेदी, रामलीला मैदान के लिए माँगा स्पष्ट सुरक्षा प्लान

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जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन के लिए अनुपयुक्त था: किरण बेदी, रामलीला मैदान के लिए माँगा स्पष्ट सुरक्षा प्लान

सारांश

दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर को प्रदर्शन-स्थलों की सूची से हटाए जाने के एक दिन बाद, पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने इस निर्णय का समर्थन किया — लेकिन साथ ही रामलीला मैदान के लिए एक पारदर्शी सुरक्षा योजना की माँग भी रखी, जो इस पूरी बहस का असली केंद्रबिंदु है।

मुख्य बातें

किरण बेदी ने 13 अक्टूबर 2026 को एक्स पर कहा कि जंतर-मंतर संकरी गलियों और संवेदनशील इमारतों की वजह से प्रदर्शन-स्थल के रूप में सबसे कम उपयुक्त था।
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को स्टैंडिंग ऑर्डर जारी कर जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन-स्थलों की सूची से हटाया।
नए अधिकृत स्थल: रामलीला मैदान (लगभग 3 किमी दूर), बुराड़ी ग्राउंड (लगभग 23 किमी ) और सीबीडी ग्राउंड, शाहदरा (लगभग 12 किमी )।
जंतर-मंतर संसद भवन से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों ने इस बदलाव की आलोचना की है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उप-राज्यपाल किरण बेदी ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि जंतर-मंतर की संकरी गलियाँ, आसपास की संवेदनशील इमारतें और सरकारी कार्यालयों की निकटता इसे विरोध-प्रदर्शन के लिए सबसे कम उपयुक्त स्थल बनाती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति देते समय सुरक्षा और संचालन की पारदर्शी योजना अनिवार्य रूप से सार्वजनिक की जानी चाहिए।

एक्स पर किरण बेदी का बयान

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से बेदी ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की जगहों के बदलते इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा, 'दिल्ली शहर में पुलिसिंग के अपने कार्यकाल के दौरान, मैंने विरोध-प्रदर्शन की जगहों को बदलते देखा है। प्रधानमंत्री आवास, तीन मूर्ति मार्ग (तब श्रीमती गांधी का आवास) से लेकर 1970 के दशक की शुरुआत में लुटियंस दिल्ली की सड़कों तक, 1980 के दशक में इंडिया गेट, बोट क्लब और फिर जंतर-मंतर तक।'

उन्होंने शहरी नियोजकों को आगाह करते हुए कहा, 'हर शहर को लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के लिए एक खुली जगह की जरूरत होती है, लेकिन अक्सर इसकी व्यवस्था करना भूल जाते हैं। तंग गलियों और संवेदनशील इमारतों व दफ्तरों के पास होने के कारण जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर सबसे कम उपयुक्त था।'

प्रशासनिक निर्णय पर सवाल

बेदी ने कनॉट प्लेस जैसे व्यावसायिक क्षेत्र की निकटता का हवाला देते हुए कहा कि उस समय प्रशासन ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन-स्थल घोषित करने में गलती की और इतने वर्षों तक उसे सुधारा नहीं। उनके अनुसार, इस बदलाव के लिए अदालती हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी, जो स्वयं इस देरी की कहानी कहता है।

उन्होंने कहा, 'अब हमें रामलीला मैदान के लिए एक साफ सुरक्षा और कामकाज की योजना चाहिए, जिसे मंजूरी देते समय बताया जाए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली पुलिस ने अधिकृत प्रदर्शन-स्थलों की सूची में बड़ा बदलाव किया है।

दिल्ली पुलिस का नया आदेश

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर 2026 को एक स्टैंडिंग ऑर्डर जारी कर जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन-स्थलों की सूची से हटा दिया। इसके स्थान पर तीन नए स्थलों की पहचान की गई है: रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड (उत्तरी दिल्ली) और सीबीडी ग्राउंड (शाहदरा)।

गौरतलब है कि जंतर-मंतर संसद भवन से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि बुराड़ी ग्राउंड लगभग 23 किलोमीटर और सीबीडी ग्राउंड लगभग 12 किलोमीटर दूर है। रामलीला मैदान जंतर-मंतर से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

सरकार के इस निर्णय की विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों की ओर से आलोचना की गई है। आलोचकों का कहना है कि संसद से दूर स्थलों पर प्रदर्शन को सीमित करना लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की भावना के विरुद्ध है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य अपनी बात सीधे नीति-निर्माताओं तक पहुँचाना होता है।

यह पहली बार नहीं है जब जंतर-मंतर को लेकर विवाद उठा हो — पिछले कई वर्षों में न्यायालय भी इस स्थल पर प्रदर्शनों के प्रबंधन को लेकर चिंता जता चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या नए स्थलों पर प्रदर्शनकारियों की पहुँच और सुविधाओं का उचित प्रबंध किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जब जंतर-मंतर दशकों से 'अनुपयुक्त' था, तो यह बदलाव अब क्यों और किस दबाव में हुआ। संसद से बढ़ती दूरी — 23 किलोमीटर तक — प्रदर्शन की प्रतीकात्मक शक्ति को स्वाभाविक रूप से कमज़ोर करती है, जो लोकतंत्र में नागरिक अभिव्यक्ति का मूल उद्देश्य है। बेदी का रामलीला मैदान के लिए 'पारदर्शी सुरक्षा योजना' का आग्रह महत्त्वपूर्ण है — यदि यह नियमों की आड़ में नौकरशाही अड़चन बन गया, तो नया स्थल भी व्यावहारिक रूप से निरर्थक हो जाएगा।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरण बेदी ने जंतर-मंतर को अनुपयुक्त क्यों बताया?
किरण बेदी ने कहा कि जंतर-मंतर की संकरी गलियाँ, आसपास की संवेदनशील इमारतें, सरकारी कार्यालयों की निकटता और कनॉट प्लेस जैसे व्यावसायिक क्षेत्र की उपस्थिति इसे विरोध-प्रदर्शन के लिए सबसे कम उपयुक्त स्थल बनाती हैं। उन्होंने इसे एक दीर्घकालिक प्रशासनिक भूल करार दिया।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर की जगह कौन-से नए स्थल घोषित किए हैं?
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर 2026 को स्टैंडिंग ऑर्डर जारी कर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड (उत्तरी दिल्ली, लगभग 23 किमी दूर) और सीबीडी ग्राउंड (शाहदरा, लगभग 12 किमी दूर) को नए अधिकृत प्रदर्शन-स्थल घोषित किया है। रामलीला मैदान जंतर-मंतर से करीब तीन किलोमीटर दूर है।
जंतर-मंतर संसद भवन से कितनी दूर है और इससे क्या फर्क पड़ता है?
जंतर-मंतर संसद भवन से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे प्रदर्शनकारी अपनी बात सीधे नीति-निर्माताओं तक पहुँचा सकते थे। नए स्थल अधिक दूर हैं, जिसे आलोचक लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की प्रभावशीलता के लिए नुकसानदेह मानते हैं।
विपक्ष ने इस बदलाव की आलोचना क्यों की?
विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों का कहना है कि संसद से दूर स्थलों पर प्रदर्शन सीमित करना लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की भावना के विरुद्ध है। उनका तर्क है कि प्रदर्शन का उद्देश्य ही नीति-निर्माताओं के निकट अपनी बात रखना होता है।
रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए किरण बेदी की क्या शर्त है?
किरण बेदी ने माँग की है कि रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति देते समय एक स्पष्ट सुरक्षा और संचालन योजना सार्वजनिक रूप से घोषित की जाए। उनके अनुसार, बिना पारदर्शी प्रबंधन ढाँचे के नए स्थल भी पुरानी समस्याओं को दोहरा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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