12 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बैन: सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका बोले — 'यह अस्वीकार्य, पीछे नहीं हटेंगे'

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बैन: सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका बोले — 'यह अस्वीकार्य, पीछे नहीं हटेंगे'

सारांश

गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाकर तीन नए विकल्प सुझाए — सीजेपी ने इसे नागरिक अधिकारों का हनन बताया और सीधे टकराव का रास्ता चुना। सवाल यह है कि प्रतिरोध का यह ऐतिहासिक केंद्र अब किसका होगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाई; तीन वैकल्पिक स्थल निर्धारित किए गए।
सीजेपी के को-कन्वीनर सौरव दास ने सरकारी आदेश को 'अस्वीकार्य' बताया और जनता से बिना परामर्श निर्णय लेने पर सवाल उठाए।
आशुतोष रांका ने ऐलान किया कि वे ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखेंगे।
दोनों को-कन्वीनर्स ने जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने का संकल्प दोहराया।
सीजेपी ने इस फैसले को व्यापक एकतरफा नीति-निर्माण के पैटर्न का हिस्सा बताया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा दी है और उसके स्थान पर तीन वैकल्पिक स्थल निर्धारित किए हैं। इस फैसले के विरोध में सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के को-कन्वीनर सौरव दास और आशुतोष रांका ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, यह घोषणा करते हुए कि वे जंतर-मंतर पर ही अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे।

सरकारी आदेश का ब्यौरा

गृह मंत्रालय के इस निर्देश के तहत जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए अनुमति-प्राप्त क्षेत्र की सूची से हटा दिया गया है और तीन नए स्थान प्रस्तावित किए गए हैं। जंतर-मंतर दशकों से नागरिक समाज, किसान संगठनों, श्रमिक यूनियनों और विपक्षी दलों के लिए सबसे प्रमुख सार्वजनिक प्रतिरोध-स्थल रहा है। गौरतलब है कि इंडिया गेट के साथ यह स्थल देश में शांतिपूर्ण सार्वजनिक प्रदर्शन का प्रतीक माना जाता है।

सौरव दास की प्रतिक्रिया

सौरव दास ने कहा, 'यह लोगों का जंतर-मंतर है। हम बिल्कुल नहीं मानेंगे कि हमारा जंतर-मंतर हमसे छीना जाए। जंतर-मंतर और इंडिया गेट पर कितने प्रोटेस्ट होते थे — यह शांतिपूर्ण सार्वजनिक प्रतिरोध के लिए एक मशहूर जगह थी। अब उन्होंने हमसे जंतर-मंतर छीन लिया है।'

दास ने सरकार पर बिना परामर्श के निर्णय थोपने का आरोप लगाते हुए कहा, 'क्या आपने लोगों से सलाह ली? क्या आपने स्टेकहोल्डर्स से बात की? क्या आपने उन संगठनों से पूछा जो नियमित रूप से जंतर-मंतर आते हैं?' उन्होंने कहा, 'सरकार के इस आदेश का हम खंडन करते हैं — यह अस्वीकार्य है। अधिकारों का हनन बंद होना चाहिए।'

आशुतोष रांका का तीखा बयान

आशुतोष रांका ने और अधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, 'एक तय प्रोटेस्ट साइट जो इतने सालों से ऐतिहासिक प्रोटेस्ट साइट रही है, उसे बंद कर दिया गया। तो अब देश का हर शहर, हर कोना जंतर-मंतर बनेगा।' रांका ने यह भी घोषणा की कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते।

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'माउंट एवरेस्ट पर प्रोटेस्ट साइट तय कर दें — हम अपना विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर ही करेंगे। इस पूरे सिस्टम को मजाक बना दिया गया है।'

व्यापक संदर्भ

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब नागरिक समाज संगठन पहले से ही कई नीतिगत मुद्दों पर सरकार से असहमति जता रहे हैं। दास ने इथेनॉल नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि 'मध्य वर्ग पर इथेनॉल थोप दिया गया' — इस तरह वे इस फैसले को एकतरफा नीति-निर्माण के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बता रहे हैं।

आगे क्या होगा

सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि वे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की योजना से पीछे नहीं हटेंगे। यह देखना बाकी है कि गृह मंत्रालय इस असहमति पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या अन्य संगठन भी इस विरोध में शामिल होते हैं। नागरिक अधिकार समूहों का कहना है कि सरकार को इस निर्णय पर सभी हितधारकों से संवाद करना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परामर्श-रहित निर्णय वैधता को कमज़ोर करता है। असली चिंता यह है कि विकल्प के रूप में सुझाए गए स्थल उतने दृश्यमान और प्रभावशाली नहीं हैं — और प्रतिरोध को हाशिए पर धकेलने का असर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पड़ सकता है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन पर रोक क्यों लगाई गई?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन की अनुमति-प्राप्त सूची से हटाकर तीन नए वैकल्पिक स्थल निर्धारित किए हैं। मंत्रालय की ओर से अभी तक इस निर्णय के पीछे का विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सीजेपी क्या है और इस विवाद से इसका क्या संबंध है?
सीजेपी यानी सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस एक नागरिक अधिकार संगठन है। इसके को-कन्वीनर सौरव दास और आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर प्रतिबंध के विरोध में मुखर बयान देते हुए जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है।
आशुतोष रांका ने ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों माँगा?
आशुतोष रांका ने घोषणा की कि वे ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखेंगे। हालाँकि स्रोत में ज्ञानेश कुमार की भूमिका का विस्तृत उल्लेख नहीं है, यह माँग जंतर-मंतर प्रतिबंध से जुड़ी उनकी व्यापक असहमति का हिस्सा प्रतीत होती है।
विरोध प्रदर्शन के लिए कौन से तीन नए स्थान तय किए गए हैं?
गृह मंत्रालय ने तीन वैकल्पिक स्थल निर्धारित किए हैं, लेकिन स्रोत में उनके नाम स्पष्ट नहीं किए गए हैं। सीजेपी ने इन विकल्पों को अपर्याप्त बताते हुए अस्वीकार कर दिया है।
क्या जंतर-मंतर पहले भी प्रदर्शनों के लिए प्रतिबंधित हुआ है?
जंतर-मंतर दशकों से भारत में शांतिपूर्ण सार्वजनिक प्रदर्शन का केंद्र रहा है। इस बार गृह मंत्रालय के आदेश से इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करना अभूतपूर्व माना जा रहा है, और नागरिक समाज इसे नागरिक अधिकारों पर सीधा प्रहार बता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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