जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बैन: सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका बोले — 'यह अस्वीकार्य, पीछे नहीं हटेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा दी है और उसके स्थान पर तीन वैकल्पिक स्थल निर्धारित किए हैं। इस फैसले के विरोध में सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के को-कन्वीनर सौरव दास और आशुतोष रांका ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, यह घोषणा करते हुए कि वे जंतर-मंतर पर ही अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे।
सरकारी आदेश का ब्यौरा
गृह मंत्रालय के इस निर्देश के तहत जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए अनुमति-प्राप्त क्षेत्र की सूची से हटा दिया गया है और तीन नए स्थान प्रस्तावित किए गए हैं। जंतर-मंतर दशकों से नागरिक समाज, किसान संगठनों, श्रमिक यूनियनों और विपक्षी दलों के लिए सबसे प्रमुख सार्वजनिक प्रतिरोध-स्थल रहा है। गौरतलब है कि इंडिया गेट के साथ यह स्थल देश में शांतिपूर्ण सार्वजनिक प्रदर्शन का प्रतीक माना जाता है।
सौरव दास की प्रतिक्रिया
सौरव दास ने कहा, 'यह लोगों का जंतर-मंतर है। हम बिल्कुल नहीं मानेंगे कि हमारा जंतर-मंतर हमसे छीना जाए। जंतर-मंतर और इंडिया गेट पर कितने प्रोटेस्ट होते थे — यह शांतिपूर्ण सार्वजनिक प्रतिरोध के लिए एक मशहूर जगह थी। अब उन्होंने हमसे जंतर-मंतर छीन लिया है।'
दास ने सरकार पर बिना परामर्श के निर्णय थोपने का आरोप लगाते हुए कहा, 'क्या आपने लोगों से सलाह ली? क्या आपने स्टेकहोल्डर्स से बात की? क्या आपने उन संगठनों से पूछा जो नियमित रूप से जंतर-मंतर आते हैं?' उन्होंने कहा, 'सरकार के इस आदेश का हम खंडन करते हैं — यह अस्वीकार्य है। अधिकारों का हनन बंद होना चाहिए।'
आशुतोष रांका का तीखा बयान
आशुतोष रांका ने और अधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, 'एक तय प्रोटेस्ट साइट जो इतने सालों से ऐतिहासिक प्रोटेस्ट साइट रही है, उसे बंद कर दिया गया। तो अब देश का हर शहर, हर कोना जंतर-मंतर बनेगा।' रांका ने यह भी घोषणा की कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते।
उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'माउंट एवरेस्ट पर प्रोटेस्ट साइट तय कर दें — हम अपना विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर ही करेंगे। इस पूरे सिस्टम को मजाक बना दिया गया है।'
व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब नागरिक समाज संगठन पहले से ही कई नीतिगत मुद्दों पर सरकार से असहमति जता रहे हैं। दास ने इथेनॉल नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि 'मध्य वर्ग पर इथेनॉल थोप दिया गया' — इस तरह वे इस फैसले को एकतरफा नीति-निर्माण के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बता रहे हैं।
आगे क्या होगा
सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि वे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की योजना से पीछे नहीं हटेंगे। यह देखना बाकी है कि गृह मंत्रालय इस असहमति पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या अन्य संगठन भी इस विरोध में शामिल होते हैं। नागरिक अधिकार समूहों का कहना है कि सरकार को इस निर्णय पर सभी हितधारकों से संवाद करना चाहिए।