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किरण बेदी ने CJP प्रदर्शन में PM मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

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किरण बेदी ने CJP प्रदर्शन में PM मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

सारांश

किरण बेदी ने CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन में PM मोदी के खिलाफ इस्तेमाल हुई भाषा को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए इसे सार्वजनिक जीवन में बढ़ती असभ्यता का लक्षण कहा। साथ ही उन्होंने जंतर-मंतर की सीमाओं, लोकपाल आंदोलन और पेपर लीक पर सरकारी कार्रवाई पर भी अपनी राय रखी।

मुख्य बातें

किरण बेदी ने CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन में PM मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा अब सार्वजनिक सभाओं में एक 'पैटर्न' बन चुकी है और युवाओं में बड़ों के प्रति सम्मान घट रहा है।
बेदी ने बताया कि जंतर-मंतर छोटा और कनॉट प्लेस के निकट होने से बड़े प्रदर्शनों पर सुरक्षा का दबाव बढ़ता है।
उन्होंने यूपीए सरकार पर लोकपाल विधेयक देर से लाने का आरोप लगाया और कहा कि इससे अन्ना आंदोलन को बढ़ावा मिला।
पेपर लीक पर सरकार की टास्क फोर्स को सही दिशा में कदम बताया, लेकिन शिक्षा में व्यापक सुधार की माँग भी रखी।

पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उप-राज्यपाल किरण बेदी ने 29 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई अपमानजनक भाषा को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में इस तरह की भाषा का बढ़ता चलन एक गहरी सामाजिक प्रवृत्ति को दर्शाता है।

सार्वजनिक विमर्श में भाषा का बिगड़ता स्तर

किरण बेदी ने कहा, 'दुर्भाग्य से, यह हमारी संस्कृति का हिस्सा बन गया है। इस्तेमाल की जा रही भाषा एक बड़े ट्रेंड को दिखाती है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की भाषा नहीं है, ऐसी भाषा सार्वजनिक बातचीत और सार्वजनिक सभाओं में आम हो गई है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि युवा पीढ़ी में बड़ों के प्रति पारंपरिक सम्मान धीरे-धीरे क्षीण हो रहा है और बच्चों द्वारा माता-पिता के पैर छूने की संस्कृति लुप्त होती जा रही है।

प्रदर्शन स्थलों का ऐतिहासिक बदलाव

पूर्व उप-राज्यपाल ने विरोध-प्रदर्शनों के लिए स्थान-निर्धारण के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुरक्षा कारणों से प्रदर्शनों को तुगलक रोड से इंडिया गेट, फिर राजपथ और अंततः जंतर-मंतर स्थानांतरित किया गया। उनके अनुसार जंतर-मंतर भी एक आदर्श स्थल नहीं है — यह स्थान अपेक्षाकृत छोटा है और प्रमुख व्यापारिक केंद्र कनॉट प्लेस के बेहद निकट है, जिससे बड़े प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा कारणों से पूरे बाज़ार को बंद करना पड़ता है।

पुलिस कार्रवाई और अनुभव पर बेदी का पक्ष

CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका पर किरण बेदी ने कहा, 'मुझे ऐसी कोई स्थिति याद नहीं है जब हमें लाठीचार्ज करना पड़ा हो। हमने धारा 144 और धारा 188 लागू की थी और शांतिपूर्ण गिरफ्तारी का विकल्प दिया था।' उन्होंने रामलीला मैदान के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ पर्याप्त स्थान होने से स्थिति नियंत्रित रही और जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल भी शांतिपूर्ण रही।

लोकपाल आंदोलन और यूपीए सरकार पर टिप्पणी

एक सवाल के जवाब में बेदी ने कहा कि यदि तत्कालीन यूपीए सरकार ने लोकपाल विधेयक समय पर लाया होता, तो आंदोलन इतना बड़ा नहीं होता। उन्होंने कहा, 'अगर लोकपाल बिल देर से लाने के बजाय पहले लाया गया होता, तो आंदोलन इतना नहीं बढ़ता। अन्ना को इतनी मुश्किलों में डालने की कोई जरूरत नहीं थी।'

पेपर लीक और सरकार पर भरोसे का सवाल

पेपर लीक रोकने की सरकारी मंशा पर विश्वास के सवाल पर किरण बेदी ने कहा, 'अगर हम सरकार पर भरोसा नहीं करेंगे, तो किस पर करेंगे? उन्होंने तुरंत टास्क फोर्स बनाई और उसमें बहुत काबिल लोगों को शामिल किया।' हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सुधार केवल परीक्षा-प्रणाली तक सीमित न रहे, बल्कि इससे शिक्षा में व्यापक बदलाव होने चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्र-वर्ग में गहरा आक्रोश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि वे स्वयं भाजपा के निकट मानी जाती हैं — इसलिए उनकी आलोचना को निष्पक्ष विश्लेषण से अधिक राजनीतिक स्थिति-निर्धारण के रूप में भी देखा जा सकता है। जंतर-मंतर की सीमाओं पर उनका तर्क तकनीकी रूप से सही है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या प्रदर्शन-स्थलों को बार-बार बदलना लोकतांत्रिक असहमति की जगह को संकुचित करने का माध्यम तो नहीं बन रहा। पेपर लीक पर सरकार पर 'भरोसे' की वकालत करते हुए उन्होंने जवाबदेही के ठोस तंत्र की माँग को नरम छोड़ दिया — जो इस मुद्दे की असली परीक्षा है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरण बेदी ने CJP प्रदर्शन में PM मोदी के खिलाफ भाषा पर क्या कहा?
किरण बेदी ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि ऐसी अपमानजनक भाषा सार्वजनिक बातचीत में एक व्यापक पैटर्न बन चुकी है। उनके अनुसार यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सार्वजनिक विमर्श की समस्या है।
CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किस बारे में था?
स्रोत में CJP के प्रदर्शन का विशिष्ट एजेंडा स्पष्ट नहीं किया गया है। प्रदर्शन 29 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ, जिसके दौरान PM मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर विवाद उत्पन्न हुआ।
किरण बेदी ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में क्यों अनुपयुक्त बताया?
बेदी के अनुसार जंतर-मंतर क्षेत्रफल में छोटा है और कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र के निकट है। बड़े प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा कारणों से पूरे बाज़ार को बंद करना पड़ता है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित होता है।
किरण बेदी ने लोकपाल आंदोलन और यूपीए सरकार के बारे में क्या कहा?
बेदी ने कहा कि अगर यूपीए सरकार ने लोकपाल विधेयक समय पर लाया होता, तो अन्ना हजारे का आंदोलन इतना बड़ा नहीं होता। उन्होंने कहा कि जो बात बाद में मानी गई, उसे पहले ही मान लिया जाना चाहिए था।
पेपर लीक मामले में किरण बेदी की सरकार पर क्या राय है?
किरण बेदी ने सरकार द्वारा तत्काल टास्क फोर्स गठन को सही कदम बताया और कहा कि उस पर भरोसा किया जाना चाहिए। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि सुधार केवल परीक्षा-प्रणाली तक सीमित न रहे, बल्कि शिक्षा में व्यापक बदलाव होने चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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