किरण बेदी ने CJP प्रदर्शन में PM मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उप-राज्यपाल किरण बेदी ने 29 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई अपमानजनक भाषा को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में इस तरह की भाषा का बढ़ता चलन एक गहरी सामाजिक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
सार्वजनिक विमर्श में भाषा का बिगड़ता स्तर
किरण बेदी ने कहा, 'दुर्भाग्य से, यह हमारी संस्कृति का हिस्सा बन गया है। इस्तेमाल की जा रही भाषा एक बड़े ट्रेंड को दिखाती है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की भाषा नहीं है, ऐसी भाषा सार्वजनिक बातचीत और सार्वजनिक सभाओं में आम हो गई है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि युवा पीढ़ी में बड़ों के प्रति पारंपरिक सम्मान धीरे-धीरे क्षीण हो रहा है और बच्चों द्वारा माता-पिता के पैर छूने की संस्कृति लुप्त होती जा रही है।
प्रदर्शन स्थलों का ऐतिहासिक बदलाव
पूर्व उप-राज्यपाल ने विरोध-प्रदर्शनों के लिए स्थान-निर्धारण के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुरक्षा कारणों से प्रदर्शनों को तुगलक रोड से इंडिया गेट, फिर राजपथ और अंततः जंतर-मंतर स्थानांतरित किया गया। उनके अनुसार जंतर-मंतर भी एक आदर्श स्थल नहीं है — यह स्थान अपेक्षाकृत छोटा है और प्रमुख व्यापारिक केंद्र कनॉट प्लेस के बेहद निकट है, जिससे बड़े प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा कारणों से पूरे बाज़ार को बंद करना पड़ता है।
पुलिस कार्रवाई और अनुभव पर बेदी का पक्ष
CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका पर किरण बेदी ने कहा, 'मुझे ऐसी कोई स्थिति याद नहीं है जब हमें लाठीचार्ज करना पड़ा हो। हमने धारा 144 और धारा 188 लागू की थी और शांतिपूर्ण गिरफ्तारी का विकल्प दिया था।' उन्होंने रामलीला मैदान के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ पर्याप्त स्थान होने से स्थिति नियंत्रित रही और जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल भी शांतिपूर्ण रही।
लोकपाल आंदोलन और यूपीए सरकार पर टिप्पणी
एक सवाल के जवाब में बेदी ने कहा कि यदि तत्कालीन यूपीए सरकार ने लोकपाल विधेयक समय पर लाया होता, तो आंदोलन इतना बड़ा नहीं होता। उन्होंने कहा, 'अगर लोकपाल बिल देर से लाने के बजाय पहले लाया गया होता, तो आंदोलन इतना नहीं बढ़ता। अन्ना को इतनी मुश्किलों में डालने की कोई जरूरत नहीं थी।'
पेपर लीक और सरकार पर भरोसे का सवाल
पेपर लीक रोकने की सरकारी मंशा पर विश्वास के सवाल पर किरण बेदी ने कहा, 'अगर हम सरकार पर भरोसा नहीं करेंगे, तो किस पर करेंगे? उन्होंने तुरंत टास्क फोर्स बनाई और उसमें बहुत काबिल लोगों को शामिल किया।' हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सुधार केवल परीक्षा-प्रणाली तक सीमित न रहे, बल्कि इससे शिक्षा में व्यापक बदलाव होने चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्र-वर्ग में गहरा आक्रोश है।