जंतर मंतर विरोध में शरारती तत्व घुसे थे, दुबई से भेजे गए लोग: JDU के संजय झा
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने 1 अगस्त को पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए नई दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए युवा विरोध प्रदर्शन पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्वीकार किया कि छात्रों की माँगें जायज थीं, लेकिन साथ ही यह भी दावा किया कि बाद में प्रदर्शन में ऐसे तत्व शामिल हो गए जिनका आंदोलन से कोई सीधा संबंध नहीं था।
मुख्य आरोप और दावे
झा ने कहा, 'छात्रों की माँग जायज थी और हम उनका समर्थन करते हैं।' हालाँकि, उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ लोगों को इस आंदोलन में दुबई से भी भेजा गया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को राज्यसभा में भी उठाया था।
प्रधानमंत्री के प्रति अमर्यादित भाषा पर आपत्ति
JDU कार्यकारी अध्यक्ष ने प्रदर्शनकारियों की ओर से इस्तेमाल की गई भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर आए कई वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के संदर्भ में अमर्यादित टिप्पणियाँ कीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा किसी भी आम व्यक्ति के लिए भी स्वीकार्य नहीं है, और प्रधानमंत्री का पद करोड़ों देशवासियों के नेतृत्व का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री की 'विशाल हृदयता' का उल्लेख
झा ने कहा कि प्रधानमंत्री विशाल हृदय वाले व्यक्ति हैं और उन्होंने ऐसी भाषा का उपयोग करने वालों को माफ कर दिया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर वे कौन लोग हैं जिन्होंने ऐसे तत्वों को आंदोलन में शामिल कराया।
राष्ट्रीय जनता दल पर निशाना
झा ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि RJD राजनीतिक रूप से हाशिए पर जा चुकी है और पिछले 20 वर्षों में उसकी राजनीति ने बिहार की जनता को परेशान किया है। उनके अनुसार, RJD का शीर्ष नेतृत्व चुनाव के बाद जनता के बीच नहीं गया और पार्टी की मौजूदा स्थिति उसके नेतृत्व के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए।
आगे की स्थिति
यह बयान ऐसे समय में आया है जब युवा रोज़गार और परीक्षा प्रणाली को लेकर देशभर में आंदोलनों की लहर देखी जा रही है। गौरतलब है कि जंतर मंतर पर हुए इस प्रदर्शन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग रही हैं। JDU का यह रुख NDA गठबंधन की स्थिति को रेखांकित करता है, जो छात्रों की माँगों को जायज मानते हुए भी प्रदर्शन के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाता है।