11 अगस्त 2026
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झारखंड में छात्रों पर लाठी-गोली: आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह बोले — 'लोकतंत्र में यह बर्दाश्त नहीं'

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झारखंड में छात्रों पर लाठी-गोली: आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह बोले — 'लोकतंत्र में यह बर्दाश्त नहीं'

सारांश

झारखंड में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई ने राजनीतिक तूफान खड़ा किया। आरजेडी ने लोकतंत्र में गोली-लाठी की भाषा को अस्वीकार्य बताया, भाजपा पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया और अमित शाह की 15 दिनों की संसदीय अनुपस्थिति पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने झारखंड में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को 'दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
सुधाकर सिंह ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह 15 दिनों से लोकसभा नहीं आए और जंतर-मंतर मामले पर चर्चा की कार्यसूची में उनका नाम नहीं है।
भाजपा के झारखंड बंद आह्वान पर राजद ने कहा कि दिल्ली में लाठीचार्ज के समय भाजपा नेता 'ऑफिस और घरों में बैठे थे'।
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने झारखंड के मुख्यमंत्री से छात्रों की जायज़ माँगें मानने का आग्रह किया।
15 अगस्त को लाल किले पर वंदे मातरम प्रस्ताव पर भाई वीरेंद्र ने कहा — सरकार को बेरोज़गारी और महंगाई पर ध्यान देना चाहिए।

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद सुधाकर सिंह और राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने 11 अगस्त 2026 को झारखंड में 'विधानसभा घेराव' मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। सुधाकर सिंह ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में छात्रों और नौजवानों से गोलियों और लाठियों की भाषा में बात किए जाने की उम्मीद नहीं थी।

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई: आरजेडी की प्रतिक्रिया

सुधाकर सिंह ने कहा, 'यह बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब भी छात्र अपने अधिकारों के लिए सरकार के पास जाते हैं — चाहे वह इंडिया ब्लॉक की सरकार हो या एनडीए की — तो उनसे गोलियों और लाठियों की भाषा में ही बात की जाती है। लोकतांत्रिक देश में ऐसी उम्मीद नहीं थी।' यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में छात्र रोज़गार और भविष्य की चिंता को लेकर सड़कों पर हैं।

भाजपा के झारखंड बंद आह्वान पर तीखी टिप्पणी

भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा लाठीचार्ज के विरोध में झारखंड बंद के आह्वान पर सुधाकर सिंह ने कहा, 'यह स्वाभाविक है कि विपक्ष में होने के नाते भाजपा इस मुद्दे पर आंदोलन का नेतृत्व करने में अपनी भूमिका निभाएगी, हालांकि जब दिल्ली में लाठीचार्ज हुआ तो भाजपा के लोग अपने ऑफिस और घरों में बैठे हुए थे।' गौरतलब है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्रों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई हो चुकी है।

अमित शाह के संसद में अनुपस्थिति पर सवाल

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी संसद में आकर चर्चा में भाग लें और गृह मंत्री अमित शाह जंतर-मंतर की घटना पर जवाब देंगे — सुधाकर सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, '15 दिन हो गए हैं, अमित शाह लोकसभा नहीं आए हैं। आज की कार्यसूची में भी अमित शाह द्वारा जंतर-मंतर की घटना पर चर्चा में भाग लेने का कोई ज़िक्र नहीं है। एनडीए के नेता देश की जनता और सदन को गुमराह कर रहे हैं।'

भाई वीरेंद्र की अपील: झारखंड सरकार छात्रों की मांगें मानें

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा, 'पूरे हिंदुस्तान में छात्र, नौजवान और जेन जी अपने भविष्य की चिंता को लेकर सड़क पर हैं। जिस देश में नौजवान जगह-जगह जाता है तो सरकार को झुकना ही पड़ता है।' उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि छात्रों की जायज़ माँगों को स्वीकार किया जाए।

वंदे मातरम प्रस्ताव और बेरोज़गारी पर राजद का रुख

15 अगस्त को लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गाए जाने के प्रस्ताव पर भाई वीरेंद्र ने कहा, 'मैं वंदे मातरम के खिलाफ नहीं हूँ। मुझे लगता है कि सरकार को ऐसी चीज़ों से बचना चाहिए और बेरोज़गारी, महंगाई पर अंकुश लगाने और देश में अमन-शांति के लिए काम करना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि छात्र और नौजवान जाग चुके हैं और इस बार एनडीए सरकार का जाना तय है। आलोचकों का कहना है कि सत्तारूढ़ दल ऐसे मुद्दों को उठाकर असली सवालों — रोज़गार और महंगाई — से ध्यान भटकाने की कोशिश करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहा कि झारखंड में खुद इंडिया ब्लॉक की सरकार ने छात्रों पर बल प्रयोग क्यों किया। अमित शाह की संसदीय अनुपस्थिति का मुद्दा ठोस है और सत्यापन योग्य है — यह जवाबदेही का असली प्रश्न है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। वंदे मातरम प्रस्ताव को बेरोज़गारी से जोड़ना राजद की रणनीतिक फ्रेमिंग है, जो युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश करती है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई क्यों हुई?
झारखंड में 'विधानसभा घेराव' मार्च के दौरान छात्रों ने अपनी माँगों को लेकर प्रदर्शन किया, जिस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। आरजेडी सहित विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई की निंदा की है और मुख्यमंत्री से छात्रों की माँगें मानने का आग्रह किया है।
आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने क्या कहा?
सुधाकर सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में छात्रों से गोलियों और लाठियों की भाषा में बात किए जाने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्री अमित शाह 15 दिनों से लोकसभा नहीं आए और जंतर-मंतर मामले पर चर्चा की कार्यसूची में उनका नाम नहीं है।
भाजपा के झारखंड बंद आह्वान पर आरजेडी का क्या रुख है?
आरजेडी ने बंद आह्वान को 'स्वाभाविक विपक्षी भूमिका' बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि जब दिल्ली में लाठीचार्ज हुआ था तब भाजपा नेता अपने ऑफिस और घरों में थे। राजद ने भाजपा पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया।
15 अगस्त को लाल किले पर वंदे मातरम प्रस्ताव पर राजद का क्या कहना है?
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि वे वंदे मातरम के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार को ऐसे प्रतीकात्मक मुद्दों की बजाय बेरोज़गारी, महंगाई और देश में अमन-शांति पर ध्यान देना चाहिए।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
आलोचकों का कहना है कि छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों के लिए असहज है। राजद ने इसे युवा मतदाताओं को साधने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की है, जबकि भाजपा के बंद आह्वान को भी राजनीतिक अवसरवाद के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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