झारखंड लाठीचार्ज: कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत का भाजपा पर सीधा हमला, 'हम समाधान चाहते हैं, वे राजनीति'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने 11 अगस्त को झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जहाँ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद छात्रों से संवाद किया और हिंसा की निंदा की, वहीं भाजपा का कोई वरिष्ठ नेता छात्रों तक नहीं पहुँचा।
सुखदेव भगत के मुख्य आरोप
भगत ने कहा, 'राहुल गांधी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चाहे कोई भी सरकार हो, वे किसी भी तरह की हिंसा या लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हैं। राहुल गांधी ने प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों से भी बात की। क्या भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता ने उनसे बात की? जहाँ हम समाधान चाहते हैं, वहाँ भाजपा समस्या खड़ी करती है। जहाँ हम स्टूडेंट्स के हित में काम करना चाहते हैं, वह राजनीति करती है — यही उनका एकमात्र एजेंडा है।'
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा यह नहीं पूछ रही कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में क्यों नहीं आ रहे और जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रहे।
सपा विधायक की तीखी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी (SP) की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने हिंदुत्व के नाम पर ठेकेदारी शुरू कर दी है — जो विरोध में बोले, उस पर हमला करवाया जाता है, और हमला करने वाले का फूल-मालाओं से स्वागत किया जाता है।
उन्होंने विशेष रूप से छात्रा नेहा का उल्लेख किया, जो कथित तौर पर सीजेपी प्रोटेस्ट में NEET छात्रों के अधिकारों की माँग लेकर शामिल हुई थीं और बाद में झारखंड पहुँचने पर उन पर स्याही फेंके जाने का आरोप लगाया। सोनकर ने कहा कि अभिजीत दिपके पर हमला कराया गया और हमलावर के जेल से बाहर आने पर उसका स्वागत किया गया।
संसद में भी गूँजा मुद्दा
सोनकर ने कहा कि रांची प्रोटेस्ट को लेकर 11 अगस्त को संसद में भी चर्चा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि जब सीजेपी का प्रोटेस्ट हुआ, उस समय विपक्ष का कोई नेता मंच पर नहीं पहुँचा और यदि सही समय पर संवाद होता, तो सही निष्कर्ष निकल सकता था।
राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में छात्र आंदोलन और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र और राज्य सरकारों को घेरना शुरू किया है। गौरतलब है कि NEET परीक्षा विवाद के बाद से देशभर में छात्र प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है, जिसने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस विषय पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।