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जंतर-मंतर अभद्रता पर PM मोदी का बड़ा बयान: 'गुमराह बच्चों को माफ करता हूं, सजा नहीं सुधार चाहिए'

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जंतर-मंतर अभद्रता पर PM मोदी का बड़ा बयान: 'गुमराह बच्चों को माफ करता हूं, सजा नहीं सुधार चाहिए'

सारांश

जंतर-मंतर पर व्यक्तिगत अपमान के बावजूद PM मोदी ने क्षमा का रास्ता चुना — सजा नहीं, सुधार। इंस्टाग्राम वीडियो में उन्होंने युवाओं को 'गुमराह बच्चे' कहते हुए गले लगाने और सही दिशा देने की बात कही। यह संदेश राजनीतिक आक्रोश के बीच संयम और पितृत्व-भाव का असाधारण प्रदर्शन है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई 2026 को इंस्टाग्राम वीडियो के ज़रिए जंतर-मंतर अभद्रता पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी।
उन्हें व्यक्तिगत रूप से गालियाँ दी गईं और उनकी दिवंगत माता के लिए भी आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया।
मोदी ने युवाओं को 'गुमराह बच्चे' बताते हुए उन्हें माफ करने और समाज से भी यही भावना अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सजा, अदालत या सामाजिक प्रताड़ना से परिस्थितियाँ नहीं बदलतीं — सुधार और सही दिशा ज़रूरी है।
युवाओं से आह्वान किया कि गलतियों से सीखें और राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई 2026 को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो संदेश जारी कर जंतर-मंतर पर हुई अभद्र भाषा की घटना पर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस घटना को पूरे देश और दुनिया ने देखा, और इसमें कुछ युवाओं द्वारा की गई अशिष्टता किसी भी सभ्य समाज को शोभा नहीं देती। इसके बावजूद उन्होंने क्षमा और सुधार का रास्ता चुना।

घटना का संदर्भ और प्रधानमंत्री की पीड़ा

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार किया कि जंतर-मंतर पर हुई घटना में उन्हें व्यक्तिगत रूप से गालियाँ दी गईं और उनकी दिवंगत माता के लिए भी अत्यंत आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुखद थी, परंतु वह इस विषय पर कटुता नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

मोदी ने इसे एक 'कल्चरल शॉक' बताते हुए कहा कि देश की बेटियों द्वारा इस प्रकार की भाषा का उपयोग समाज के लिए एक झकझोरने वाला अनुभव है। उन्होंने कहा कि समाज में इस घटना को लेकर जो आक्रोश है, उसे वह भली-भाँति समझते हैं।

क्षमा और सुधार का आह्वान

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, 'मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं। समाज भी मेरी इस भावना को स्वीकार करे, क्योंकि मेरे मन में एक ही भाव है। कभी-कभी दांतों तले हमारी जीभ आ जाती है, खून भी निकल आता है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ते, क्योंकि दांत भी हमारे हैं, जीभ भी हमारी है और बच्चे भी हमारे हैं।'

उन्होंने स्पष्ट किया कि इन युवाओं को सजा देना, अदालतों के चक्कर कटवाना या समाज में प्रताड़ित करना परिस्थितियों को नहीं बदल सकता। उनके अनुसार, बचपन में गलतियाँ होना स्वाभाविक है और उन्हें सुधारने का अवसर देना ही समझदारी है।

युवाओं से सीधा संवाद

मोदी ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा, 'बच्चों आओ, हम देश के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ें। अपनी गलतियों से भी सीखें, अपने सपनों को लेकर आगे बढ़ें। देश बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है और आगे भी बढ़ने वाला है। मेरा सपना है कि आपका भविष्य भी उज्ज्वल हो। मैं आपके लिए जीता हूं और आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए लगातार खपता हूं।'

उन्होंने जोर देकर कहा कि गुमराह लोगों को सही राह दिखाना आसान काम नहीं, लेकिन कठिन कार्यों को ही करने का संकल्प लेना चाहिए।

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका

अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों, विशेषकर युवाओं से एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन में होने वाली गलतियों से सीखते हुए सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और सभी को मिलकर देश को आगे ले जाना है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर की घटना को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आलोचकों को जवाब देने का अवसर भी नहीं छोड़ती। हालाँकि, आलोचक यह सवाल उठा सकते हैं कि 'गुमराह' शब्द का प्रयोग युवाओं की असली शिकायतों — चाहे वे रोज़गार, शिक्षा या नीति से जुड़ी हों — को किनारे कर देता है। इंस्टाग्राम को माध्यम चुनना भी सोचा-समझा कदम है: वही मंच जहाँ जेन-जी सबसे सक्रिय है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह संवाद एकतरफा भावनात्मक अपील बनकर रह जाता है, या युवाओं की मूल चिंताओं पर ठोस नीतिगत संवाद में बदलता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर क्या हुआ था जिस पर PM मोदी ने प्रतिक्रिया दी?
जंतर-मंतर पर हुई एक घटना में कुछ युवाओं ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अत्यंत अभद्र और असभ्य भाषा का प्रयोग किया। मोदी के अनुसार, उन्हें व्यक्तिगत रूप से गालियाँ दी गईं और उनकी दिवंगत माता के लिए भी आपत्तिजनक शब्द कहे गए।
PM मोदी ने जंतर-मंतर घटना पर अपनी प्रतिक्रिया कहाँ और कब दी?
प्रधानमंत्री मोदी ने 31 जुलाई 2026 को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो संदेश साझा कर इस घटना पर प्रतिक्रिया दी। यह उनकी इस मामले पर पहली सार्वजनिक और सीधी प्रतिक्रिया थी।
मोदी ने युवाओं को माफ क्यों किया, सजा की माँग क्यों नहीं की?
मोदी ने कहा कि इन युवाओं को सजा देना, अदालतों के चक्कर कटवाना या समाज में प्रताड़ित करना परिस्थितियों को नहीं बदल सकता। उनके अनुसार, गुमराह बच्चों को सही राह दिखाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है और यही कठिन लेकिन सही रास्ता है।
PM मोदी ने युवाओं से क्या अपील की?
मोदी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी गलतियों से सीखें, अपने सपनों को लेकर आगे बढ़ें और देश के विकास की यात्रा में सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और वह युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं।
मोदी ने जंतर-मंतर घटना को 'कल्चरल शॉक' क्यों बताया?
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की बेटियों द्वारा इस प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग समाज के लिए एक 'कल्चरल शॉक' है। इससे उनका आशय था कि यह घटना भारतीय सामाजिक मूल्यों और शिष्टाचार की परंपरा के विपरीत है।
राष्ट्र प्रेस
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