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मोदी का छात्रों को माफ करना बुद्ध-गांधी जैसा उदाहरण: आचार्य प्रमोद कृष्णम

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मोदी का छात्रों को माफ करना बुद्ध-गांधी जैसा उदाहरण: आचार्य प्रमोद कृष्णम

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने जंतर-मंतर पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले छात्रों को माफ किया — और आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसे गौतम बुद्ध व महात्मा गांधी की क्षमाशीलता के समकक्ष बताया। यह प्रसंग भारतीय राजनीति में असहमति, सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों की बहस को नया आयाम दे रहा है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो संदेश जारी कर जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के उन छात्रों को माफ किया जिन्होंने उनके और उनकी दिवंगत माता के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था।
आध्यात्मिक गुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 1 अगस्त को इस क्षमादान की तुलना गौतम बुद्ध , भगवान महावीर और महात्मा गांधी की क्षमाशीलता से की।
कृष्णम ने भगवान बुद्ध की कहानी का उल्लेख किया जिसमें बुद्ध ने थूकने वाले व्यक्ति को गले लगाकर प्रेम से उत्तर दिया था।
आचार्य कृष्णम ने कहा कि यह प्रसंग भारत की सांस्कृतिक परंपरा का प्रतिबिंब है और विरोध करने वालों को इसे समझना चाहिए।

आध्यात्मिक गुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शनिवार, 1 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने क्षमा का एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह प्रतिक्रिया तब आई जब प्रधानमंत्री मोदी ने उन छात्रों को माफ करने की घोषणा की, जिन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर उनके और उनकी दिवंगत माता के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था।

प्रधानमंत्री का वीडियो संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को एक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि वे उन सभी बच्चों को माफ करना चाहते हैं, जिन्होंने न केवल उनके लिए, बल्कि उनकी दिवंगत माता के लिए भी अपमानजनक शब्दों का उपयोग किया था। इस घोषणा ने राजनीतिक और आध्यात्मिक दोनों हलकों में व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की।

आचार्य कृष्णम की प्रतिक्रिया

आचार्य कृष्णम ने अपने स्वयं के एक वीडियो में कहा, 'जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया और फिर भी उन्होंने उन सभी को अपने बच्चों की तरह मानकर माफ कर दिया, उससे मुझे गौतम बुद्ध की एक कहानी याद आ गई।' उन्होंने प्रधानमंत्री के इस कदम की तुलना भगवान बुद्ध, भगवान महावीर और महात्मा गांधी की क्षमाशीलता से की।

बुद्ध की कहानी से तुलना

आचार्य कृष्णम ने एक प्रसंग सुनाया जिसमें एक व्यक्ति ने भगवान बुद्ध पर थूक दिया था, क्योंकि वह उनसे घृणा करता था। भगवान बुद्ध ने क्रोध के बजाय उस व्यक्ति को गले लगा लिया। इस प्रतिक्रिया से वह व्यक्ति इतना द्रवित हो गया कि रोने लगा। जब भगवान ने रोने का कारण पूछा, तो उस व्यक्ति ने कहा कि उसे डर था कि अब बुद्ध उससे प्रेम नहीं करेंगे। इस पर भगवान बुद्ध का उत्तर था, 'मैं तुमसे कभी नफरत नहीं कर सकता, क्योंकि मेरे पास देने के लिए केवल प्रेम ही है।'

सांस्कृतिक संदर्भ और आगे का संदेश

आचार्य कृष्णम ने जोर देकर कहा कि यह मामला भारत की संस्कृति और परंपरा से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने प्रधानमंत्री और उनकी माता का अपमान किया, उन्हें इस सांस्कृतिक मूल्य को समझना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकरण ने भारतीय लोकतंत्र में असहमति की अभिव्यक्ति और उसकी सीमाओं पर बहस को नए सिरे से जन्म दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रधानमंत्री की इस क्षमा-घोषणा का छात्र आंदोलन के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज इस सवाल से चूक जाती है कि जिन छात्रों ने विरोध किया, उनकी मूल शिकायतें क्या थीं और क्या उनका समाधान हुआ। क्षमा एक नैतिक कार्य हो सकता है, परंतु राजनीतिक संदर्भ में इसे सहानुभूति के रूप में प्रस्तुत करना और असहमति को 'आपत्तिजनक भाषा' तक सीमित करना — दोनों अलग-अलग बातें हैं। यह देखना ज़रूरी है कि इस प्रकरण के बाद छात्रों की माँगों पर कोई ठोस संवाद होता है या नहीं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मोदी ने किसे और क्यों माफ किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने उन छात्रों को माफ किया जिन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर उनके और उनकी दिवंगत माता के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था। उन्होंने शुक्रवार को एक वीडियो संदेश के ज़रिए इन सभी बच्चों को अपने बच्चों की तरह मानते हुए माफ करने की बात कही।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मोदी की तुलना किससे की?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री मोदी के क्षमादान की तुलना भगवान गौतम बुद्ध, भगवान महावीर और महात्मा गांधी की क्षमाशीलता से की। उन्होंने कहा कि मोदी ने इन महापुरुषों के समान एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में क्या हुआ था?
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी दिवंगत माता के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था, जिसके बाद यह विवाद राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया।
आचार्य कृष्णम ने कौन-सी बुद्ध कहानी सुनाई?
उन्होंने एक प्रसंग सुनाया जिसमें एक व्यक्ति ने भगवान बुद्ध पर थूक दिया था। बुद्ध ने क्रोध के बजाय उसे गले लगा लिया। उस व्यक्ति के रोने पर बुद्ध ने कहा, 'मैं तुमसे कभी नफरत नहीं कर सकता, क्योंकि मेरे पास देने के लिए केवल प्रेम ही है।'
इस प्रकरण का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
आचार्य कृष्णम के अनुसार यह मामला भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है, जिसमें क्षमा को सर्वोच्च मूल्य माना गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने प्रधानमंत्री और उनकी माता का अपमान किया, उन्हें इस परंपरा को समझना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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