पीएम मोदी के माफी वाले वीडियो पर कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा का तंज: सरकार की जवाबदेही पहले
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी वीडियो संदेश — जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले छात्रों को माफ करने की बात कही — पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज हो गई हैं। जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे प्रधानमंत्री की उदारता का प्रमाण बताया, वहीं कांग्रेस नेताओं ने 1 अगस्त को स्पष्ट किया कि माफी से पहले सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
कुमारी सैलजा का सवाल: ज्यादती पहले, माफी बाद में
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि नादानी में बच्चे कभी उत्तेजित होकर कुछ कह देते हैं — इसका मतलब यह नहीं कि उन पर लाठीचार्ज किया जाए। उन्होंने असली सवाल यह उठाया कि वह स्थिति पैदा ही क्यों हुई जिसके कारण छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा।
सैलजा ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ पहले ज्यादतियाँ की गईं और अब उन्हें माफ करने की बात हो रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई की घटना पर जवाबदेही माँगी है, लेकिन शाह अब तक इस मामले पर मौन हैं।
कुलगाम आतंकी हमले पर संवेदना और निंदा
सैलजा ने जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि निर्दोष मजदूरों की पहचान पूछकर की गई यह हत्या अत्यंत दुखद, कायरतापूर्ण और मानवता के विरुद्ध जघन्य अपराध है। उन्होंने माँग की कि दोषियों को शीघ्र कानून के दायरे में लाकर कठोरतम दंड दिया जाए, ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि आतंक और हिंसा के लिए देश में कोई स्थान नहीं है।
अतुल लोंढे: बेरोजगारी, महंगाई और पेपर लीक से उपजा छात्र आक्रोश
कांग्रेस नेता अतुल लोंढे ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में बेरोजगारी बढ़ी है, महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक है और महंगाई लगातार बढ़ती रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का स्तर गिरा है और महाराष्ट्र से लेकर ओडिशा तक कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएँ हो रही हैं — यही कारण है कि छात्रों में आक्रोश है।
टीकाराम जूली: BJP नेताओं पर भी बोलें पीएम
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीकाराम जूली ने कहा कि यह अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री मोदी छात्रों को माफ करने की बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उन BJP सांसदों और नेताओं के बारे में भी दो शब्द कहने चाहिए जो छात्र आंदोलन में विदेशी फंडिंग का कनेक्शन ढूंढ रहे थे। जूली ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने जिस तरह बच्चों पर हमला किया, उस पर भी प्रधानमंत्री को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब संसद का सत्र चल रहा है और विपक्ष सदन में सरकार से 20 जुलाई की घटना पर जवाब माँग रहा है। गौरतलब है कि छात्र विरोध प्रदर्शन और उसके बाद की राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकती हैं।