जंतर-मंतर को प्रदर्शन सूची से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, गुरुवार को सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर करने के दिल्ली पुलिस के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। वकील लक्ष्य सैनी और तुषार गुप्ता की ओर से दायर इस याचिका पर गुरुवार, 16 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होने की उम्मीद है। याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर दशकों से राजधानी में नागरिक आवाज़ का प्रमुख मंच रहा है।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलीलें
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि प्रदर्शनकारियों को शहर के दूरस्थ वैकल्पिक स्थलों पर भेजा जाता है, तो आम नागरिकों के लिए अपनी आवाज़ उठाना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाएगा। उनके अनुसार, शांतिपूर्वक विरोध करने का मौलिक अधिकार केवल काग़ज़ों तक सीमित होकर रह जाने का गंभीर ख़तरा है।
याचिका में यह भी रेखांकित किया गया है कि जंतर-मंतर की केंद्रीय अवस्थिति इसे सामान्य जन के लिए सुलभ बनाती है, जबकि प्रस्तावित विकल्प शहर की परिधि पर हैं।
दिल्ली पुलिस का रुख़ और वैकल्पिक स्थल
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है। पुलिस ने दावा किया कि यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के पिछले सप्ताह के आदेश के अनुपालन में की गई है।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ के समक्ष तर्क दिया कि शीर्ष अदालत ने उपयुक्त स्थलों की पहचान करने को कहा था और अधिकारियों ने उसी के अनुरूप काम किया। पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी मैदान को नए निर्धारित स्थलों के रूप में प्रस्तुत किया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के अध्यक्ष उदय भानु चिब की उस याचिका से उपजा है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान एएसजी शर्मा ने दलील दी कि जंतर-मंतर के डी-नोटिफाई होने के बाद उदय भानु चिब की याचिका निष्फल हो गई है।
हालाँकि, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि याचिका में उठाई गई अन्य मांगें अब भी विचारणीय हैं। उन्होंने उन मांगों पर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति महाजन ने याचिका में उल्लिखित तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया।
सर्वोच्च न्यायालय का पूर्व निर्देश
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ दिन पूर्व सक्षम अधिकारियों को राजधानी में शांतिपूर्ण और वैध विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने और उन्हें अधिसूचित करने पर विचार करने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएँ और आवश्यक ढाँचा उपलब्ध कराए जाने की ज़रूरत पर भी बल दिया था।
आगे क्या होगा
अब सर्वोच्च न्यायालय में दायर नई याचिका के ज़रिए यह प्रश्न केंद्र में आ गया है कि क्या किसी ऐतिहासिक प्रदर्शन-स्थल को प्रशासनिक आदेश से हटाना नागरिक अधिकारों के अनुरूप है। गुरुवार की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि क्या सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में त्वरित राहत देने पर विचार करेगा।