जंतर-मंतर इंटरनेट बंदी आदेश: दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को करेगा सुनवाई, सीजेपी प्रदर्शन से जुड़ा मामला
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार, 25 जुलाई को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें जंतर-मंतर के आसपास लगभग 1.5 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित करने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है। यह आदेश कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान लागू किया गया था, जो 20 जून से जंतर-मंतर पर चल रहा है। याचिकाकर्ता के वकील ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
मामले की पृष्ठभूमि
सीजेपी का यह प्रदर्शन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी माँग कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने दूरसंचार कंपनियों को मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए थे।
याचिका में क्या है
याचिका में इंटरनेट निलंबन आदेश के साथ-साथ प्रदर्शन स्थल के आसपास लगाए गए अन्य प्रतिबंधों को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इन प्रतिबंधों का असर केवल प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ा। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि इंटरनेट बंदी का आदेश शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार को प्रभावित करता है।
एनआईए जाँच की माँग वाली याचिका भी सूचीबद्ध
इसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट एक अन्य जनहित याचिका पर भी सुनवाई करेगा, जिसमें 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) से कराने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि अदालत ने एक दिन पहले इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की सहमति दी थी, लेकिन मामला शुक्रवार की सूची में शामिल नहीं किया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने इसे शुक्रवार को ही सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी।
आम जनता पर असर
इंटरनेट निलंबन का असर मध्य दिल्ली के निवासियों, व्यापारियों और आवागमन करने वालों पर भी पड़ा, जो इस दायरे में आते हैं। आलोचकों का कहना है कि इंटरनेट बंदी जैसे व्यापक उपाय असंगत रूप से आम नागरिकों को प्रभावित करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में इंटरनेट शटडाउन की संख्या और उनकी वैधानिकता पर बहस तेज़ हो रही है।
आगे क्या होगा
शुक्रवार की सुनवाई में अदालत इंटरनेट निलंबन आदेश की वैधता और प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए अन्य प्रतिबंधों की समीक्षा कर सकती है। गौरतलब है कि भारत में इंटरनेट शटडाउन को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ मामले में दिशानिर्देश जारी कर चुका है, जिसके तहत ऐसे आदेशों को आनुपातिक और समयबद्ध होना अनिवार्य है।