24 जुलाई 2026
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जंतर-मंतर इंटरनेट बंदी आदेश: दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को करेगा सुनवाई, सीजेपी प्रदर्शन से जुड़ा मामला

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जंतर-मंतर इंटरनेट बंदी आदेश: दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को करेगा सुनवाई, सीजेपी प्रदर्शन से जुड़ा मामला

सारांश

जंतर-मंतर पर पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार द्वारा मोबाइल इंटरनेट बंद करने के आदेश को अब दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। शुक्रवार की सुनवाई तय करेगी कि यह निलंबन संवैधानिक कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को जंतर-मंतर के आसपास 1.5 किलोमीटर दायरे में मोबाइल इंटरनेट निलंबन के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन 20 जून से जंतर-मंतर पर जारी है — मुद्दा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग है।
याचिका में इंटरनेट बंदी के साथ-साथ प्रदर्शन स्थल के आसपास लगाए गए अन्य प्रतिबंधों को भी चुनौती दी गई है।
20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च की एनआईए जाँच की माँग वाली जनहित याचिका भी शुक्रवार को सूचीबद्ध की गई है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि इंटरनेट निलंबन से प्रदर्शनकारियों के अलावा आम नागरिक भी प्रभावित हुए।

दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार, 25 जुलाई को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें जंतर-मंतर के आसपास लगभग 1.5 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित करने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है। यह आदेश कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान लागू किया गया था, जो 20 जून से जंतर-मंतर पर चल रहा है। याचिकाकर्ता के वकील ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

मामले की पृष्ठभूमि

सीजेपी का यह प्रदर्शन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी माँग कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने दूरसंचार कंपनियों को मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए थे।

याचिका में क्या है

याचिका में इंटरनेट निलंबन आदेश के साथ-साथ प्रदर्शन स्थल के आसपास लगाए गए अन्य प्रतिबंधों को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इन प्रतिबंधों का असर केवल प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ा। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि इंटरनेट बंदी का आदेश शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार को प्रभावित करता है।

एनआईए जाँच की माँग वाली याचिका भी सूचीबद्ध

इसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट एक अन्य जनहित याचिका पर भी सुनवाई करेगा, जिसमें 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) से कराने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि अदालत ने एक दिन पहले इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की सहमति दी थी, लेकिन मामला शुक्रवार की सूची में शामिल नहीं किया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने इसे शुक्रवार को ही सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी।

आम जनता पर असर

इंटरनेट निलंबन का असर मध्य दिल्ली के निवासियों, व्यापारियों और आवागमन करने वालों पर भी पड़ा, जो इस दायरे में आते हैं। आलोचकों का कहना है कि इंटरनेट बंदी जैसे व्यापक उपाय असंगत रूप से आम नागरिकों को प्रभावित करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में इंटरनेट शटडाउन की संख्या और उनकी वैधानिकता पर बहस तेज़ हो रही है।

आगे क्या होगा

शुक्रवार की सुनवाई में अदालत इंटरनेट निलंबन आदेश की वैधता और प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए अन्य प्रतिबंधों की समीक्षा कर सकती है। गौरतलब है कि भारत में इंटरनेट शटडाउन को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ मामले में दिशानिर्देश जारी कर चुका है, जिसके तहत ऐसे आदेशों को आनुपातिक और समयबद्ध होना अनिवार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे सर्वोच्च न्यायालय के अनुराधा भसीन फैसले के बावजूद बार-बार दोहराया जाता है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार ने आनुपातिकता और समयबद्धता की कसौटी पूरी की — या यह बंदी महज़ प्रदर्शनकारियों की आवाज़ दबाने का औज़ार बनी। हाईकोर्ट की सुनवाई इस मिसाल को मज़बूत या कमज़ोर कर सकती है कि भविष्य में इंटरनेट निलंबन कितनी आसानी से लागू किए जा सकेंगे।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट में जंतर-मंतर इंटरनेट बंदी मामले में क्या सुनवाई होगी?
दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें जंतर-मंतर के 1.5 किलोमीटर दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है। याचिका में इंटरनेट बंदी के साथ-साथ प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए अन्य प्रतिबंधों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सीजेपी का जंतर-मंतर प्रदर्शन किस मुद्दे पर है?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन 20 जून से जंतर-मंतर पर चल रहा है। यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में है, और प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग भी कर रहे हैं।
'संसद चलो' मार्च की एनआईए जाँच की माँग क्यों की गई है?
20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) से कराने की माँग एक जनहित याचिका के ज़रिए की गई है। इस याचिका पर भी दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा।
इंटरनेट बंदी से आम नागरिक कैसे प्रभावित हुए?
याचिकाकर्ता का दावा है कि जंतर-मंतर के 1.5 किलोमीटर दायरे में मोबाइल इंटरनेट निलंबन का असर केवल प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस क्षेत्र के निवासियों, व्यापारियों और आम नागरिकों पर भी पड़ा।
भारत में इंटरनेट शटडाउन के लिए कानूनी ढाँचा क्या है?
सर्वोच्च न्यायालय ने अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ मामले में स्पष्ट किया है कि इंटरनेट निलंबन आदेश आनुपातिक, समयबद्ध और न्यायिक समीक्षा के योग्य होने चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई यह तय करेगी कि जंतर-मंतर का आदेश इन कसौटियों पर खरा उतरता है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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