दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र के इंटरनेट सस्पेंशन आदेश को चुनौती, जंतर-मंतर के 1.5 KM दायरे में 8 घंटे बंद रही सेवा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट में 23 जुलाई 2026 को एक याचिका दायर कर केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत जंतर-मंतर के आसपास लगभग 1.5 किलोमीटर के दायरे में शाम 4 बजे से रात 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित की गई थीं। याचिकाकर्ता ने इंटरनेट बंदी के साथ-साथ प्रदर्शन स्थलों के आसपास लगाए गए अन्य प्रतिबंधों को भी न्यायिक समीक्षा के लिए अदालत के समक्ष रखा है।
आदेश का ब्यौरा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार, 23 जुलाई को शाम 4 बजे यह आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जन-व्यवस्था बनाए रखने तथा अफवाहों के प्रसार को रोकने के हित में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करना आवश्यक है। यह आदेश महेंद्र विक्रम सिंह की ओर से जारी किया गया और सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को निर्धारित क्षेत्र में समस्त प्रकार की मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का निर्देश दिया गया।
यह आदेश टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 की धारा 20 की उप-धारा (2) के क्लॉज (बी) तथा टेलीकम्युनिकेशन्स (सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने के नियम) 2024 के नियम 2 के उप-नियम 1 के क्लॉज (बी) व नियम 3 के उप-नियम 1 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया।
याचिका में क्या माँगा गया
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह आदेश राजधानी में जारी प्रदर्शनों के दौरान जारी किया गया, जिससे आम नागरिकों के संचार एवं सूचना तक पहुँच के मूलभूत अधिकारों पर सीधा असर पड़ा। याचिका में अदालत से आदेश की वैधता की न्यायिक समीक्षा करने और लगाए गए प्रतिबंधों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। शुक्रवार को अदालत से जल्द सुनवाई की माँग किए जाने की तैयारी बताई जा रही है।
आम नागरिकों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब इंटरनेट शटडाउन की संवैधानिक वैधता पर बहस पहले से ही तेज है। जंतर-मंतर के आसपास 1.5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले और काम करने वाले लोगों को आठ घंटे तक मोबाइल इंटरनेट से वंचित रहना पड़ा, जिससे डिजिटल भुगतान, आपातकालीन संचार और दैनिक कार्यों पर असर पड़ा। गौरतलब है कि भारत में इंटरनेट शटडाउन की संख्या वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक में से एक रही है, और इस तरह के आदेशों की न्यायिक समीक्षा की माँग लगातार बढ़ रही है।
कानूनी पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) मामले में यह स्थापित कर चुका है कि इंटरनेट सेवाओं का अनिश्चितकालीन निलंबन अनुच्छेद 19 के तहत असंवैधानिक है और ऐसे आदेश आनुपातिकता की कसौटी पर खरे उतरने चाहिए। नए टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत जारी यह पहले प्रमुख आदेशों में से एक है, जिसकी न्यायिक व्याख्या अभी बाकी है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का निर्णय न केवल इस मामले में, बल्कि भविष्य में इंटरनेट शटडाउन के आदेशों की वैधता और प्रक्रिया के लिए भी एक महत्वपूर्ण नज़ीर स्थापित कर सकता है।