24 जुलाई 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र के इंटरनेट सस्पेंशन आदेश को चुनौती, जंतर-मंतर के 1.5 KM दायरे में 8 घंटे बंद रही सेवा

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दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र के इंटरनेट सस्पेंशन आदेश को चुनौती, जंतर-मंतर के 1.5 KM दायरे में 8 घंटे बंद रही सेवा

सारांश

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर के 1.5 KM दायरे में 8 घंटे मोबाइल इंटरनेट बंद करने के केंद्र के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने नागरिकों के संचार अधिकारों का हवाला देते हुए न्यायिक समीक्षा और तत्काल रोक की माँग की है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट में 23 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार के मोबाइल इंटरनेट सस्पेंशन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दायर की गई।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर के 1.5 किलोमीटर दायरे में शाम 4 बजे से रात 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का आदेश दिया था।
यह आदेश महेंद्र विक्रम सिंह की ओर से टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 की धारा 20(2)(बी) के तहत जारी किया गया।
याचिकाकर्ता ने इंटरनेट बंदी के साथ-साथ प्रदर्शन स्थलों के आसपास लगाए गए प्रतिबंधों को भी चुनौती दी है।
शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट से जल्द सुनवाई की माँग किए जाने की तैयारी है।

दिल्ली हाईकोर्ट में 23 जुलाई 2026 को एक याचिका दायर कर केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत जंतर-मंतर के आसपास लगभग 1.5 किलोमीटर के दायरे में शाम 4 बजे से रात 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित की गई थीं। याचिकाकर्ता ने इंटरनेट बंदी के साथ-साथ प्रदर्शन स्थलों के आसपास लगाए गए अन्य प्रतिबंधों को भी न्यायिक समीक्षा के लिए अदालत के समक्ष रखा है।

आदेश का ब्यौरा

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार, 23 जुलाई को शाम 4 बजे यह आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जन-व्यवस्था बनाए रखने तथा अफवाहों के प्रसार को रोकने के हित में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करना आवश्यक है। यह आदेश महेंद्र विक्रम सिंह की ओर से जारी किया गया और सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को निर्धारित क्षेत्र में समस्त प्रकार की मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का निर्देश दिया गया।

यह आदेश टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 की धारा 20 की उप-धारा (2) के क्लॉज (बी) तथा टेलीकम्युनिकेशन्स (सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने के नियम) 2024 के नियम 2 के उप-नियम 1 के क्लॉज (बी) व नियम 3 के उप-नियम 1 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया।

याचिका में क्या माँगा गया

याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह आदेश राजधानी में जारी प्रदर्शनों के दौरान जारी किया गया, जिससे आम नागरिकों के संचार एवं सूचना तक पहुँच के मूलभूत अधिकारों पर सीधा असर पड़ा। याचिका में अदालत से आदेश की वैधता की न्यायिक समीक्षा करने और लगाए गए प्रतिबंधों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। शुक्रवार को अदालत से जल्द सुनवाई की माँग किए जाने की तैयारी बताई जा रही है।

आम नागरिकों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब इंटरनेट शटडाउन की संवैधानिक वैधता पर बहस पहले से ही तेज है। जंतर-मंतर के आसपास 1.5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले और काम करने वाले लोगों को आठ घंटे तक मोबाइल इंटरनेट से वंचित रहना पड़ा, जिससे डिजिटल भुगतान, आपातकालीन संचार और दैनिक कार्यों पर असर पड़ा। गौरतलब है कि भारत में इंटरनेट शटडाउन की संख्या वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक में से एक रही है, और इस तरह के आदेशों की न्यायिक समीक्षा की माँग लगातार बढ़ रही है।

कानूनी पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) मामले में यह स्थापित कर चुका है कि इंटरनेट सेवाओं का अनिश्चितकालीन निलंबन अनुच्छेद 19 के तहत असंवैधानिक है और ऐसे आदेश आनुपातिकता की कसौटी पर खरे उतरने चाहिए। नए टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत जारी यह पहले प्रमुख आदेशों में से एक है, जिसकी न्यायिक व्याख्या अभी बाकी है।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का निर्णय न केवल इस मामले में, बल्कि भविष्य में इंटरनेट शटडाउन के आदेशों की वैधता और प्रक्रिया के लिए भी एक महत्वपूर्ण नज़ीर स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

2023 के तहत जारी पहले प्रमुख शटडाउन आदेशों में से एक है — और इसीलिए हाईकोर्ट की सुनवाई महज इस मामले तक सीमित नहीं रहेगी। सर्वोच्च न्यायालय अनुराधा भसीन फैसले में आनुपातिकता की शर्त पहले ही तय कर चुका है, लेकिन नए कानून के तहत 'सक्षम प्राधिकारी' की परिभाषा और समीक्षा तंत्र की व्याख्या अभी अदालतों के सामने नहीं आई है। आलोचकों का कहना है कि 8 घंटे और 1.5 किलोमीटर का दायरा — भले ही सीमित लगे — प्रदर्शनकारियों और निर्दोष नागरिकों दोनों को एक ही लाठी से मापता है। यदि हाईकोर्ट आदेश की वैधता पर सख्त रुख अपनाता है, तो यह भविष्य के शटडाउन आदेशों के लिए एक बाधक नज़ीर बन सकता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट क्यों बंद किया गया था?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जन-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से 23 जुलाई को जंतर-मंतर के आसपास 1.5 किलोमीटर के दायरे में शाम 4 बजे से रात 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का आदेश दिया। यह आदेश राजधानी में जारी प्रदर्शनों के दौरान जारी किया गया।
इंटरनेट बंदी के आदेश को हाईकोर्ट में किसने और क्यों चुनौती दी?
एक याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका दायर कर आदेश की न्यायिक समीक्षा और तत्काल रोक की माँग की है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस आदेश से आम नागरिकों के संचार एवं सूचना तक पहुँच के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
यह आदेश किस कानून के तहत जारी किया गया?
यह आदेश टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 की धारा 20 की उप-धारा (2) के क्लॉज (बी) तथा टेलीकम्युनिकेशन्स (सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने के नियम) 2024 के नियम 2 व नियम 3 के तहत जारी किया गया। महेंद्र विक्रम सिंह ने इस आदेश पर हस्ताक्षर किए।
दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई कब होगी?
शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट से जल्द सुनवाई की माँग किए जाने की तैयारी बताई जा रही है। अदालत का निर्णय नए टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत इंटरनेट शटडाउन आदेशों की वैधता पर एक महत्वपूर्ण नज़ीर स्थापित कर सकता है।
इंटरनेट शटडाउन पर सर्वोच्च न्यायालय का क्या रुख रहा है?
सर्वोच्च न्यायालय अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) मामले में यह स्पष्ट कर चुका है कि इंटरनेट सेवाओं का निलंबन आनुपातिकता की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए और अनिश्चितकालीन शटडाउन असंवैधानिक है। नए टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत जारी आदेशों की न्यायिक व्याख्या अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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