जंतर-मंतर हटाया तो हर सड़क बनेगी जंतर-मंतर — कासिम रसूल इलियास का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
कासिम रसूल इलियास — पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद के पिता — ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और यदि दिल्ली में आंदोलन को रोका गया, तो देश के हर हिस्से में आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि 'हर सड़क को जंतर-मंतर बना देंगे।' यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर विपक्षी हलकों में गहरा असंतोष है।
मुख्य बयान और मांगें
इलियास ने कहा कि लोकतंत्र में जब जनता की आवाज़ अनसुनी की जाती है, तो विरोध-प्रदर्शन ही उनका एकमात्र उपाय बचता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति नहीं दी जाती और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाता है, तो आम नागरिक अपनी बात कहाँ रखेगा। उनके अनुसार, संसद के निकट धरना देने के लिए अब कोई दूसरा उपयुक्त स्थान नहीं बचा है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोगों ने पहले से मार्च का ऐलान किया था, तो उन्हें शांतिपूर्ण मार्च करने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। उनके अनुसार शांतिपूर्ण मार्च से किसी को भी कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
एसआईआर विवाद और चुनावी अधिकार
इलियास ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरुद्ध चल रहे आंदोलन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि लोगों को आशंका है कि उनके मत गलत तरीके से काटे जा रहे हैं। उन्होंने मतदान के अधिकार को नागरिकों का मूलभूत संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि जब लोगों को लगता है कि उनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, तो प्रतिरोध करना स्वाभाविक है।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर को रद्द किए जाने और एसआईआर के आधार पर हुए चुनावों को दोबारा कराने की माँग को न केवल राजनीतिक, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ी बताया।
सत्ता परिवर्तन के आरोप पर स्पष्टीकरण
प्रदर्शन के ज़रिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश के आरोप को इलियास ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारें चुनाव के ज़रिए बदलती हैं और भारत में भी सत्ता परिवर्तन का एकमात्र रास्ता मतदान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी माँग सरकार से इस्तीफे और उसके बाद निर्वाचन कराने की है, न कि किसी असंवैधानिक तरीके से सत्ता पलट की। उन्होंने कहा, 'देश में कोई सैन्य तख्तापलट या सेना की बगावत नहीं हो रही है।'
वैश्विक प्रदर्शनों से तुलना
भारत के प्रदर्शनों को विदेश में जारी आंदोलनों से जोड़ने के आरोप पर इलियास ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में लोग अत्याचार और जनसमस्याओं के खिलाफ विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस सहित अन्य देशों में हो रहे प्रदर्शनों का भारत के आंदोलन की माँगों से कोई संबंध नहीं है — दोनों की परिस्थितियाँ और कारण अलग-अलग हैं।
आगे का रास्ता
इलियास ने साफ कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, एसआईआर रद्द नहीं होता और संबंधित चुनाव दोबारा नहीं कराए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यदि दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली, तो देश के अन्य हिस्सों में आंदोलन तेज़ किया जाएगा। गौरतलब है कि यह तीन सूत्री माँग आने वाले हफ्तों में राजनीतिक दबाव का केंद्र बन सकती है।