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वंदे मातरम अनिवार्य नहीं किया जा सकता — एआईएमआईएम के वारिस पठान का केंद्र पर हमला

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वंदे मातरम अनिवार्य नहीं किया जा सकता — एआईएमआईएम के वारिस पठान का केंद्र पर हमला

सारांश

एआईएमआईएम प्रवक्ता वारिस पठान ने केंद्र सरकार पर तीन मोर्चों पर हमला बोला — 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने की कोशिश को असंवैधानिक बताया, एंटी-पेपर लीक विधेयक को अपर्याप्त कहा, और कंगना रनौत की छात्र-विरोधी टिप्पणियों पर सार्वजनिक माफी की माँग की।

मुख्य बातें

एआईएमआईएम प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि किसी भी नागरिक को 'वंदे मातरम' बोलने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं किया जा सकता — यह संविधान की धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध है।
पठान ने एंटी-पेपर लीक विधेयक पर कहा कि केवल सजा बढ़ाना पर्याप्त नहीं; दो साल पहले बने कानून के बावजूद पेपर लीक नहीं रुका।
सरकार के विरोधाभासी रवैये की आलोचना — एक तरफ एफआईआर वापस लेने का वादा, दूसरी तरफ छात्रों को नोटिस और सोशल मीडिया पर कार्रवाई।
भाजपा सांसद कंगना रनौत की छात्रों और जेनजी पर की गई टिप्पणियों को 'निंदनीय' बताया; सार्वजनिक माफी की माँग की।
पार्टी एंटी-पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के बाद अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रवक्ता वारिस पठान ने 29 जुलाई को मुंबई में केंद्र सरकार पर कई मोर्चों पर निशाना साधा — 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने की संभावित कोशिशों, एंटी-पेपर लीक विधेयक की सीमाओं और प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति सरकार के विरोधाभासी रवैये पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध जाकर 'वंदे मातरम' बोलने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

वंदे मातरम और संवैधानिक स्वतंत्रता

पठान ने कहा कि एआईएमआईएम 'वंदे मातरम' का आदर करती है, लेकिन इसे कानूनी रूप से अनिवार्य बनाना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उनके अनुसार, संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है, और 'वंदे मातरम' की कुछ पंक्तियाँ ऐसी हैं जिन्हें एक मुसलमान अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण नहीं बोल सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि जब जन-गण-मन गाया जाता है, तो पार्टी पूरे सम्मान के साथ उसमें शामिल होती है और तिरंगा उनकी 'आन, बान और शान' है। उनके अनुसार, यदि किसी कानून के माध्यम से 'वंदे मातरम' को थोपने की कोशिश की गई, तो इससे समाज में अनावश्यक तनाव और वैमनस्य का वातावरण बनेगा।

एंटी-पेपर लीक विधेयक पर सवाल

एंटी-पेपर लीक विधेयक पर पठान ने कहा कि केवल सजा का प्रावधान बढ़ा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से कानून मौजूद होने के बावजूद पेपर लीक की घटनाएँ लगातार होती रही हैं। उन्होंने पूछा कि क्या नया कानून उन छात्रों की जान वापस ला सकता है जिन्होंने पेपर लीक के बाद आत्महत्या कर ली और जिनका भविष्य बर्बाद हुआ।

पठान ने कहा कि दो साल पहले भी कानून बनाया गया था, लेकिन पेपर लीक नहीं रुका। छात्रों की असली माँग यह थी कि भविष्य में किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक न हो और इसके लिए एक प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।

सरकार की कथनी और करनी में विरोधाभास

पठान ने केंद्र सरकार के रवैये को विरोधाभासी बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ छात्रों को यह भरोसा दिया गया कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएँगी, जबकि दूसरी तरफ उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों ने शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद ही सरकार को उनकी माँगों पर विचार करने पर मजबूर होना पड़ा।

गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के संदर्भ में भी पठान ने केंद्र सरकार को घेरा और कहा कि यह कदम देर से उठाया गया।

कंगना रनौत की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों और जेनजी (Gen Z) पर की गई टिप्पणियों को पठान ने 'पूरी तरह निंदनीय' करार दिया। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि से इस तरह की भाषा की अपेक्षा नहीं की जाती और रनौत को सार्वजनिक रूप से छात्रों तथा जेनजी से माफी माँगनी चाहिए।

पठान ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी वर्ग या पीढ़ी के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक विवाद के बाद छात्र आंदोलन और सरकार के बीच तनाव पहले से ही बना हुआ है।

आगे क्या होगा

पठान ने स्पष्ट किया कि एआईएमआईएम एंटी-पेपर लीक विधेयक पर विस्तृत चर्चा के बाद ही अपना अंतिम रुख सार्वजनिक करेगी। पार्टी का रुख संविधान-सम्मत समाधान और छात्रों के हितों की रक्षा पर केंद्रित रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह विवाद बार-बार क्यों उठाया जाता है। एंटी-पेपर लीक विधेयक पर पठान की आलोचना अधिक ठोस है — पिछले कानून की विफलता का कोई जवाब सरकार ने नहीं दिया है। कंगना रनौत प्रकरण यह भी दर्शाता है कि सत्तारूढ़ दल के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल हैं, जिन पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ध्यान नहीं देती।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वारिस पठान ने 'वंदे मातरम' पर क्या कहा?
वारिस पठान ने कहा कि 'वंदे मातरम' का सम्मान करते हुए भी इसे कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता देता है। उन्होंने कहा कि इसे थोपने की कोशिश समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करेगी।
एआईएमआईएम का एंटी-पेपर लीक विधेयक पर क्या रुख है?
एआईएमआईएम प्रवक्ता पठान ने कहा कि विधेयक पर विस्तृत चर्चा के बाद पार्टी अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि केवल सजा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है और पहले से मौजूद कानून के बावजूद पेपर लीक नहीं रुका।
कंगना रनौत की किस टिप्पणी पर विवाद हुआ?
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने प्रदर्शनकारी छात्रों और जेनजी के बारे में जो टिप्पणियाँ कीं, उन्हें वारिस पठान ने 'पूरी तरह निंदनीय' बताया। पठान ने माँग की कि रनौत सार्वजनिक रूप से छात्रों और जेनजी से माफी माँगें।
सरकार का छात्रों के प्रति रवैया विरोधाभासी क्यों बताया गया?
पठान ने कहा कि सरकार ने एक तरफ छात्रों को एफआईआर वापस लेने का भरोसा दिया, जबकि दूसरी तरफ उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कार्रवाई की जा रही है। यह कथनी और करनी का स्पष्ट अंतर है।
क्या 'वंदे मातरम' को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जा सकता है?
भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। पठान के अनुसार, 'वंदे मातरम' की कुछ पंक्तियाँ धार्मिक आधार पर सभी के लिए अनिवार्य नहीं की जा सकतीं, और ऐसा करना संविधान की भावना के विरुद्ध होगा।
राष्ट्र प्रेस
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