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जंतर-मंतर छात्र आंदोलन: वारिस पठान बोले — सरकार संवाद करे, लाठीचार्ज नहीं

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जंतर-मंतर छात्र आंदोलन: वारिस पठान बोले — सरकार संवाद करे, लाठीचार्ज नहीं

सारांश

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन को राजनीतिक या धार्मिक नहीं, बल्कि शैक्षणिक असंतोष का प्रतीक बताया। NEET-TET पेपर लीक के बाद उपजे इस आक्रोश पर उन्होंने सरकार से लाठीचार्ज छोड़ संवाद अपनाने की अपील की।

मुख्य बातें

AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 20 जुलाई को मुंबई में जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी।
पठान ने सरकार से लाठीचार्ज और आंसू गैस की जगह संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।
उन्होंने NEET, TET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक को छात्रों के अविश्वास की जड़ बताया।
आंदोलन को राजनीतिक या धार्मिक नज़रिए से न देखने की सलाह दी; सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के शांतिपूर्ण संघर्ष का उल्लेख किया।
पठान ने चेतावनी दी कि युवाओं की मांगें अनसुनी रहीं तो असंतोष और गहरा हो सकता है ।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 20 जुलाई को मुंबई में कहा कि केंद्र सरकार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए और बलप्रयोग की जगह संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आंदोलन को राजनीतिक या धार्मिक चश्मे से देखना उचित नहीं है — यह छात्रों की वास्तविक शैक्षणिक चिंताओं का प्रतिबिंब है।

मुख्य घटनाक्रम

जंतर-मंतर पर जारी छात्र विरोध प्रदर्शन और प्रस्तावित वंदे मातरम विधेयक को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया है। पठान ने कहा, 'सरकार को कम से कम प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए और उनसे बातचीत करनी चाहिए। लोकतंत्र में संवाद सबसे प्रभावी माध्यम होता है, लेकिन सरकार बातचीत के बजाय प्रदर्शनकारियों को हटाने, लाठीचार्ज करने और आंसू गैस का इस्तेमाल करने का रास्ता अपना रही है।' उन्होंने इसे न तो छात्रहित में बताया और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप।

परीक्षा प्रणाली पर गहरा असंतोष

पठान ने कहा कि जंतर-मंतर पर हो रहा प्रदर्शन देशभर के छात्रों की भावनाओं और असंतोष को दर्शाता है। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में NEET, TET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों ने छात्रों का भरोसा कमज़ोर किया है। उनके अनुसार, 'छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए।'

यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा सुधार को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है और कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गौरतलब है कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर सड़क पर उतरे हों।

सोनम वांगचुक का संदर्भ

पठान ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है और उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्होंने कहा, 'यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करता है तो उसकी बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी है।'

सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल

सामने आई खबरों के अनुसार प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। पठान ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के साथ टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए और समस्याओं का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकालना चाहिए।

आगे की राह

पठान ने ज़ोर देकर कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उनके अनुसार, यदि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो असंतोष और गहरा हो सकता है। सरकार के अगले कदम और छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया पर अब सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या केवल राजनीतिक दूरी बनाए रखने का माध्यम हैं। NEET पेपर लीक विवाद के बाद से सरकार पर दबाव लगातार बना हुआ है, फिर भी संरचनात्मक सुधार की गति धीमी रही है। जब तक परीक्षा तंत्र में पारदर्शिता के ठोस उपाय नहीं होते, तब तक 'संवाद' की अपीलें असंतोष की आग को ठंडा नहीं कर पाएंगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वारिस पठान ने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर क्या कहा?
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और लाठीचार्ज व आंसू गैस की जगह संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने इस आंदोलन को राजनीतिक या धार्मिक नज़रिए से न देखने की अपील की।
जंतर-मंतर पर छात्र क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?
पठान के अनुसार, NEET, TET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं ने छात्रों का भरोसा तोड़ा है, जिसके चलते वे परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की मांग लेकर सड़क पर उतरे हैं। प्रस्तावित वंदे मातरम विधेयक भी इस विरोध के केंद्र में बताया जा रहा है।
क्या प्रदर्शनकारी छात्रों पर बलप्रयोग हुआ?
सामने आई खबरों के अनुसार प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। वारिस पठान ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अनुचित बताया और इसकी आलोचना की।
पठान ने सोनम वांगचुक का ज़िक्र क्यों किया?
वारिस पठान ने सोनम वांगचुक को शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले सम्मानित व्यक्ति के रूप में उद्धृत किया और कहा कि जो व्यक्ति लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करे, उसकी बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। यह उदाहरण उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध की वैधता को रेखांकित करने के लिए दिया।
AIMIM का इस आंदोलन पर क्या रुख है?
AIMIM ने इस आंदोलन को किसी राजनीतिक या धार्मिक एजेंडे से जोड़ने से इनकार किया है। पार्टी के प्रवक्ता पठान ने इसे छात्रों की शैक्षणिक और भविष्य से जुड़ी वास्तविक चिंताओं का प्रतिबिंब बताया और सरकार से संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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