दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र विरोधी: वारिस पठान ने की संवाद की माँग
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 21 जुलाई को दिल्ली में सीजेपी से जुड़े आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लोकतांत्रिक मूल्यों के सर्वथा विरुद्ध बताया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बल प्रयोग की जगह आंदोलनकारियों से खुली बातचीत की जाए और उनकी माँगों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
लाठीचार्ज पर पठान का कड़ा रुख
पठान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठियाँ भाँजना और आँसू गैस के गोले दागना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता। उनके अनुसार, छात्र संविधान और तिरंगे को हाथ में थामकर अहिंसक ढंग से अपने अधिकारों की आवाज़ उठा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश में लगे हैं।
पठान ने यह भी कहा कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटनाक्रम की आलोचना करते हुए छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। ओवैसी ने आंदोलनकारी सांसद चंद्रशेखर आज़ाद से मुलाकात कर एकजुटता व्यक्त की है।
बार-बार दोहराया गया इतिहास
पठान ने रेखांकित किया कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की यह पहली घटना नहीं है। उन्होंने वकीलों के आंदोलन, किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोध और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि यह एक दीर्घकालिक पैटर्न बनता जा रहा है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ को दबाने के बजाय उससे संवाद स्थापित करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है।
नीट और टीईटी पेपर लीक: युवाओं का भविष्य दाँव पर
पठान ने नीट और टीईटी पेपर लीक विवाद को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है और युवाओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है। उनकी माँग है कि दोषियों की जवाबदेही तय हो और उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की इस न्यायसंगत माँग को भी दबाने की कोशिश कर रही है।
जौहर यूनिवर्सिटी और विपक्षी प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद पर पठान ने कहा कि यदि निर्माण को लेकर कोई कानूनी समस्या है, तो सरकार रेगुलराइजेशन या कंपाउंडिंग जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है। उन्होंने चेताया कि भवनों को ध्वस्त करने से हज़ारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा और शैक्षणिक संस्थानों को नुकसान पहुँचाने से पहले छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर पठान ने सीधी टिप्पणी से परहेज़ करते हुए कहा कि यह कांग्रेस का अपना कार्यक्रम है और हर दल अपने-अपने तरीके से अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और दावों की निष्पक्ष जाँच की माँग भी की।
आगे क्या
पठान ने दोहराया कि AIMIM छात्रों के संवैधानिक अधिकारों के समर्थन में पहले भी खड़ी रही है और भविष्य में भी रहेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बातचीत ही किसी भी विवाद का सबसे टिकाऊ और न्यायसंगत समाधान है। महिलाओं और छात्राओं के साथ कथित तौर पर हुई पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें और वीडियो बेहद चिंताजनक हैं और इनकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए।