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मौलाना साजिद रशीदी की अपील: छात्र आंदोलन पर सरकार बातचीत से निकाले समाधान

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मौलाना साजिद रशीदी की अपील: छात्र आंदोलन पर सरकार बातचीत से निकाले समाधान

सारांश

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने सरकार से छात्र आंदोलन पर संवाद की माँग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग पर समय रहते निर्णय लिया जाता तो आंदोलन इतना लंबा न खिंचता। विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों पर भी उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने 24 जुलाई को सरकार से छात्र आंदोलन पर बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने की अपील की।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग इस विवाद की मुख्य जड़ है।
विदेशी हस्तक्षेप के सरकारी दावों पर उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप देश की खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हैं।
जेएनयू की एडवाइजरी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन संवाद का माहौल बनाए, न कि छात्रों को रोके।
' वंदे मातरम ' विधेयक पर कहा कि पहले शिक्षा और युवाओं के मुद्दे सुलझाए जाएँ; संवेदनशील विषयों पर सभी समुदायों की भावनाओं का ध्यान रखा जाए।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 24 जुलाई को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह छात्र आंदोलन को संवाद के ज़रिए सुलझाए और युवाओं की मांगों को गंभीरता से ले। उन्होंने नई दिल्ली में नीट पेपर लीक, जेएनयू एडवाइजरी, सोनम वांगचुक के विरोध-प्रदर्शन और 'वंदे मातरम' विधेयक सहित कई ज्वलंत मुद्दों पर अपना पक्ष रखा।

छात्र आंदोलन और बातचीत की ज़रूरत

मौलाना रशीदी ने कहा कि इस विवाद की जड़ में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग है। उनके अनुसार, "यदि सरकार इस विषय पर समय रहते कोई निर्णय लेती या छात्रों से व्यापक संवाद करती, तो आंदोलन इतना लंबा नहीं चलता।" उन्होंने सरकार से अपील की कि बातचीत के ज़रिए जल्द समाधान निकाला जाए ताकि छात्रों की चिंताओं का अंत हो सके।

यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर के छात्र सड़कों पर हैं और सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि यह आंदोलन किसी एक संस्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र एकजुट होकर आवाज़ उठा रहे हैं।

विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों पर सवाल

सरकार की ओर से आंदोलन में विदेशी ताकतों की भूमिका के दावों पर मौलाना रशीदी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यदि पाकिस्तान, बांग्लादेश या कोई अन्य बाहरी शक्ति भारत में अशांति फैलाने में सक्षम है, तो यह देश की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।" उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप लगाने से पहले तथ्यों और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

जेएनयू एडवाइजरी पर आपत्ति

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) द्वारा छात्रों को आंदोलन से दूर रहने की जारी एडवाइजरी पर रशीदी ने असहमति जताई। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों को रोकने के बजाय सरकार और छात्रों के बीच संवाद का माहौल बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी संस्थानों के छात्रों की माँगें समान हैं और वे अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर एकजुट हैं।

'वंदे मातरम' विधेयक पर संयमित रुख

संसद में 'वंदे मातरम' को कानूनी संरक्षण देने से जुड़े विधेयक पर मौलाना रशीदी ने कहा कि इस समय शिक्षा और युवाओं से जुड़े सवाल अधिक प्राथमिकता के हकदार हैं। उन्होंने 'वंदे मातरम' की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को स्वीकार करते हुए कहा कि चूँकि राष्ट्रगान पहले से मौजूद है, इसलिए इस विषय पर अनावश्यक विवाद खड़ा करने से बचना चाहिए। उनके अनुसार सरकार को संवेदनशील मुद्दों पर सभी समुदायों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

आगे की राह

मौलाना रशीदी की यह अपील ऐसे वक्त में आई है जब छात्र आंदोलन लगातार व्यापक होता जा रहा है और सरकार पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द संवाद नहीं हुआ, तो यह विरोध और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बड़ा अनुत्तरित सवाल है — क्या धार्मिक संगठनों की यह अपील सरकार पर कोई व्यावहारिक दबाव बना सकती है? विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों पर उनकी आपत्ति तार्किक है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नज़रअंदाज़ करती है कि ऐसे आरोप आंदोलन की वैधता को कमज़ोर करने का राजनीतिक औज़ार भी बन सकते हैं। नीट लीक जैसे संस्थागत विफलता के मामले में शिक्षा मंत्री की जवाबदेही का सवाल केंद्रीय है — और इस पर सरकार की चुप्पी खुद एक जवाब है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने छात्र आंदोलन पर क्या कहा?
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि सरकार को छात्रों की माँगों पर गंभीरता से विचार कर बातचीत के ज़रिए जल्द समाधान निकालना चाहिए। उनके अनुसार यदि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग पर समय रहते निर्णय लिया जाता, तो आंदोलन इतना लंबा नहीं खिंचता।
विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों पर रशीदी का क्या रुख है?
रशीदी ने कहा कि यदि कोई बाहरी शक्ति भारत में अशांति फैला सकती है, तो यह देश की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों पर भी सवाल खड़ा करता है। उनका कहना था कि ऐसे आरोप लगाने से पहले तथ्यों की गंभीर जाँच होनी चाहिए।
जेएनयू एडवाइजरी पर मौलाना रशीदी ने क्या कहा?
उन्होंने जेएनयू की एडवाइजरी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों को आंदोलन से रोकने के बजाय सरकार और छात्रों के बीच संवाद का माहौल बनाना चाहिए। उनके अनुसार सभी संस्थानों के छात्रों की माँगें एक समान हैं।
'वंदे मातरम' विधेयक पर उनका क्या मत है?
मौलाना रशीदी ने कहा कि इस समय शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे अधिक प्राथमिकता के हकदार हैं। उन्होंने 'वंदे मातरम' की सांस्कृतिक पहचान स्वीकार करते हुए कहा कि इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा करने से बचना चाहिए और सभी समुदायों की भावनाओं का ध्यान रखा जाए।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन क्या है?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन भारत का एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठन है, जिसके अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी हैं। यह संगठन राष्ट्रीय मुद्दों पर समय-समय पर अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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