बिहार छात्र आंदोलन: राजद एमएलसी अब्दुल बारी सिद्दीकी का नीतीश सरकार पर हमला, लाठीचार्ज को बताया तानाशाही
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य अब्दुल बारी सिद्दीकी ने 23 जुलाई को पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर बिहार सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्र आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने का प्रयास कर रही है और अपनी नाकामियों को ढकने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है।
मुख्य घटनाक्रम
विधानमंडल परिसर में गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान सिद्दीकी ने कहा, 'छात्रों पर लाठी चलाने वाली सरकार को बदलना होगा।' उन्होंने सरकार के उस दावे को सिरे से खारिज किया जिसमें कहा गया था कि प्रदर्शन में छात्र शामिल नहीं थे। राजद नेता ने स्पष्ट किया कि कोतवाली समेत अन्य स्थानों पर हिरासत में लिए गए लोगों का नाम, पता और पहचान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, जो सरकार के दावे को झूठा साबित करती है।
सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल
सिद्दीकी ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र आंदोलनों को खारिज करना न तो उचित है और न ही ऐतिहासिक दृष्टि से सही। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार के राजनीतिक इतिहास में छात्र आंदोलनों की भूमिका निर्णायक रही है और सत्ता में बैठे लोगों को इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने 1974 के छात्र आंदोलन का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उस आंदोलन ने देश में राजनीतिक परिवर्तन की नींव रखी थी।
आंदोलन की प्रकृति पर राजद का स्पष्टीकरण
सिद्दीकी ने दावा किया कि दिल्ली और पटना में चल रहा यह आंदोलन पूरी तरह छात्रों का स्वतःस्फूर्त आंदोलन है और इसमें किसी भी राजनीतिक दल की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र अपने अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हैं, जबकि सरकार संवाद के बजाय दमन का रास्ता चुन रही है। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ नेताओं की भूमिका ने इस पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना दिया है।
आम जनता और छात्रों पर असर
आलोचकों का कहना है कि पटना में छात्रों पर लाठीचार्ज की घटना ने बिहार में युवाओं के असंतोष को एक नई धार दे दी है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में रोज़गार और शिक्षा से जुड़े मुद्दे पहले से ही सुलग रहे हैं। गौरतलब है कि छात्र आंदोलनों का बिहार में एक लंबा और प्रभावशाली इतिहास रहा है — 1974 की जेपी आंदोलन की जड़ें भी छात्रों के इसी जोश से निकली थीं।
क्या होगा आगे
सिद्दीकी ने बिहार सरकार से अपील की कि वह बल प्रयोग बंद करे और छात्रों की माँगों को गंभीरता से सुनकर संवाद के ज़रिए समाधान निकाले। राजद की यह आक्रामक मुद्रा आने वाले दिनों में विधानमंडल के भीतर और बाहर सियासी तापमान बढ़ाने का संकेत देती है।