पटना छात्र प्रदर्शन पर लाठीचार्ज: रोहिणी आचार्य ने पुलिस कार्रवाई को बताया 'निंदनीय', संवाद की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पटना में 22 जुलाई को परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के आरोपों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर निकाले गए छात्र मार्च पर पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता रोहिणी आचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'दुखद' और 'निंदनीय' करार दिया तथा केंद्र सरकार से छात्रों के साथ तत्काल संवाद शुरू करने की अपील की।
मुख्य घटनाक्रम
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी छात्र गांधी मैदान से राजभवन की ओर कूच कर रहे थे और केंद्र सरकार के विरुद्ध नारे लगा रहे थे। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर जुलूस को रोकने की कोशिश की। जब प्रदर्शनकारियों ने तितर-बितर होने से इनकार किया, तो पुलिस ने वाटर कैनन, आंसू गैस के गोले और अंततः लाठीचार्ज का सहारा लिया।
रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की पुत्री और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर छात्रों पर बल प्रयोग की कड़ी भर्त्सना की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को शांतिपूर्ण विरोध के ज़रिए अपनी चिंताएँ उठाने का संवैधानिक अधिकार है।
आचार्य ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने छात्रों की माँगें सुनने के बजाय बलपूर्वक असहमति को दबाने का प्रयास किया, जिसे उन्होंने 'तानाशाही मानसिकता का प्रतिबिंब' बताया। उन्होंने सरकार से घटना का संज्ञान लेने और इसमें शामिल पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के आचरण की जाँच कराने का आह्वान किया।
राजनीतिक हमला और व्यापक संदर्भ
एक अन्य पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार पर व्यापक निशाना साधते हुए कहा कि सरकारें जनता की असहमति को स्थायी रूप से नहीं दबा सकतीं और अंततः लोकतांत्रिक जवाबदेही की जीत होगी। यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा देशभर में विद्यार्थियों के बीच रोष का कारण बना हुआ है।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह घटना उस व्यापक राष्ट्रीय बहस के बीच हुई है जिसमें परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए जा रहे हैं। रोहिणी आचार्य ने माँग की है कि केंद्र सरकार दमन का रास्ता छोड़कर छात्रों की चिंताओं का समाधान करे। अब सभी की नज़रें इस पर हैं कि सरकार इस दबाव में संवाद का रास्ता चुनती है या नहीं।