पटना में आइसा का लोकभवन मार्च: पुलिस से झड़प, वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के नेतृत्व में 22 जुलाई को पटना में निकाले गए लोकभवन मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में आयोजित इस मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लिया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शन से पूर्व गांधी मैदान के मुख्य द्वार पर पटना विश्वविद्यालय सहित राज्य के अनेक विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। जैसे ही मार्च लोकभवन की ओर बढ़ा, पुलिस ने पहले गांधी मैदान और फिर जेपी गोलंबर के निकट बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया।
पुलिस की वापस लौटने की अपील के बावजूद छात्र बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे, जिससे दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने क्रमशः वाटर कैनन, हल्का लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का उपयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया।
प्रदर्शनकारियों की माँगें
आइसा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह मार्च तीन प्रमुख माँगों को लेकर आयोजित था — नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना। इसके साथ ही छात्र संगठनों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई का भी विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को छात्रों की आवाज़ दबाने के बजाय शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उनके अनुसार, पटना का यह प्रदर्शन दिल्ली में शिक्षा और छात्र अधिकारों को लेकर चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन की एक कड़ी है।
पुलिस का पक्ष
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था भंग करने और बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास किया, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया गया। वहीं, आइसा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने एक शांतिपूर्ण मार्च को जबरन रोककर अनुचित बल का इस्तेमाल किया।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन उग्र हो रहे हैं। गौरतलब है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज की घटना सामने आई थी, जिसने इस आंदोलन को नई धार दी। पटना में आइसा का यह मार्च उसी राष्ट्रव्यापी रोष की बिहार में अभिव्यक्ति माना जा रहा है। आने वाले दिनों में छात्र संगठनों के अगले कदम पर सबकी नज़र रहेगी।