चक्रवात 'अर्नब' से छत्तीसगढ़ में धान की फसल पर संकट, स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल बोले — 'सिर्फ भगवान का भरोसा'
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने 27 अक्टूबर 2026 को चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के मद्देनज़र प्रदेश की धान की फसल पर गंभीर खतरे की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इस चक्रवात को लेकर पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है और प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली गई है।
धान की फसल पर मंडराता संकट
मंत्री जायसवाल ने कहा, 'छत्तीसगढ़ में भी इसके आने का अलर्ट है। छत्तीसगढ़ किसानों का और धान की खेती करने वाला प्रदेश है, 80 प्रतिशत किसान धान की ही फसल लगाते हैं। इस समय धान पूरी तरह से या तो पक चुका है या पकने की स्थिति में है। यदि अभी ज्यादा तूफान और बारिश आती है, तो फसलों की बड़ी क्षति होगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक रूप से 'कोई उपाय नहीं' है और अंततः 'सिर्फ भगवान का भरोसा' ही बचता है।
मुख्यमंत्री के निर्देश, पूरी तैयारी
जायसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री ने एहतियाती उपायों को लेकर विस्तृत निर्देश दिए हैं और राज्य सरकार अलर्ट मोड में है। हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि प्राकृतिक आपदा के विरुद्ध प्रशासनिक तैयारी की एक सीमा होती है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ को 'धान का कटोरा' कहा जाता है और यहाँ की कृषि अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर इसी फसल पर निर्भर है। ऐसे में अक्टूबर के अंत में चक्रवात का खतरा किसानों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि यह खरीफ फसल की कटाई का संवेदनशील समय है।
विपक्षी नेताओं की भाषाशैली पर हमला
इसी प्रेस वार्ता में मंत्री जायसवाल ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बयानबाज़ी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सत्ता की लालसा में विपक्षी नेता अपनी भाषा और मर्यादा का ध्यान नहीं रख रहे हैं। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में नेताओं को अपनी भाषा की गरिमा बनाए रखनी चाहिए क्योंकि उनके बयान देश और दुनिया में देखे जाते हैं।
इंडी गठबंधन की रैली और कांग्रेस पर निशाना
1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित इंडी गठबंधन की रैली को लेकर भी जायसवाल ने कांग्रेस पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति असम्मान का रहा है। उन्होंने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरा नुकसान पहुँचा था।
ईवीएम और चुनाव आयोग पर विपक्ष के रुख की आलोचना
मंत्री ने आरोप लगाया कि चुनावों में अपेक्षित सफलता न मिलने पर विपक्षी दल कभी ईवीएम, कभी एसआईआर और कभी निर्वाचन आयोग को निशाना बनाते हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर विपक्ष के रुख की भी आलोचना की और कहा कि इस तरह की बयानबाज़ी से कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा — 'अंततः सत्य और धर्म की जीत होगी।' यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच चुनावी विश्वसनीयता पर बहस तेज़ है।