26 सितंबर 2026
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चक्रवात 'अर्नब' का छत्तीसगढ़ में कहर: गंगरेल बांध के 14 द्वार खुले, 5 डिवीजनों में जनजीवन ठप

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चक्रवात 'अर्नब' का छत्तीसगढ़ में कहर: गंगरेल बांध के 14 द्वार खुले, 5 डिवीजनों में जनजीवन ठप

सारांश

बंगाल की खाड़ी से आए चक्रवात 'अर्नब' ने छत्तीसगढ़ के 5 डिवीजनों को अस्त-व्यस्त कर दिया है। गंगरेल बांध के सभी 14 द्वार खुले हैं, महानदी में 50,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है और बस्तर के सैकड़ों गाँव बाढ़ के कगार पर हैं।

मुख्य बातें

चक्रवात 'अर्नब' ने छत्तीसगढ़ में तीन दिन लगातार मूसलाधार बारिश से रायपुर, बिलासपुर, बस्तर, दुर्ग और सरगुजा डिवीजनों में तबाही मचाई।
गंगरेल बांध के सभी 14 द्वार खोले गए; जलाशय 98% से अधिक भरा; महानदी में 50,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
मुरुमसिल्ली बांध 100% क्षमता पर; दुधवा और सोंधुर बांध 90% से अधिक भरे।
सुकमा, कांकेर, बीजापुर, जगदलपुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के सैकड़ों गाँवों में बाढ़ का गंभीर खतरा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जिला कलेक्टरों को उच्च सतर्कता और प्रभावी राहत-बचाव के निर्देश दिए।
महानदी तट के 18 गाँवों के लिए विशेष अलर्ट; बचाव दल तैनात, निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।

बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात 'अर्नब' ने छत्तीसगढ़ में तीन दिनों की मूसलाधार बारिश से तबाही मचाई है — रायपुर, बिलासपुर, बस्तर, दुर्ग और सरगुजा डिवीजनों में सड़कें जलमग्न हैं, संपर्क मार्ग टूट गए हैं और नदी-नाले खतरनाक स्तर पर उफान पर हैं। 26 सितंबर 2026 को राज्य प्रशासन ने कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी कर दिए हैं और बचाव दल सक्रिय कर दिए गए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

धमतारी स्थित गंगरेल बांध के सभी 14 द्वार खोल दिए गए हैं, क्योंकि जलाशय 98 प्रतिशत से अधिक भर चुका है। रुद्री बैराज के ज़रिये महानदी में करीब 50,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है।

मुरुमसिल्ली बांध पूरी क्षमता यानी 100 प्रतिशत पर पहुँच गया है, जबकि बलोद स्थित दुधवा और सोंधुर बांध 90 प्रतिशत से अधिक भर गए हैं। धमतारी मुख्यालय के पास हटकुल नदी के उफान ने आसपास के कई गांवों का आपस में संपर्क काट दिया है।

बस्तर मंडल और सीमावर्ती जिलों पर सबसे गहरा असर

चक्रवात का सर्वाधिक प्रभाव बस्तर मंडल पर पड़ा है। कोरबा में बंगो बांध और ओडिशा के खातिगुडा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद लगभग 5 लाख घन मीटर पानी नीचे की ओर प्रवाहित हुआ है, जिससे इंद्रावती नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा है।

ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर पानी छोड़े जाने के बाद सुकमा, कांकेर, बीजापुर, जगदलपुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के सैकड़ों गाँवों में बाढ़ का खतरा गंभीर रूप ले चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब इन आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पहले से बुनियादी ढाँचा कमज़ोर है।

बचाव अभियान और राहत कार्य

महासमुंद जिले के बम्हानी गाँव में सरकारी शराब की दुकान बाढ़ में पूरी तरह डूब जाने के बाद दो सुरक्षा गार्ड — छगन लाल कुर्रे और ईद कुमार टंडन — वहाँ फँस गए। उन्होंने वीडियो जारी कर अपनी सुरक्षा की पुष्टि की और बाद में बचाव दल ने दोनों को सफलतापूर्वक निकाल लिया।

प्रशासन ने महानदी के तटवर्ती 18 गाँवों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। जिला प्रशासन ने प्रत्येक नदी-किनारे के गाँव में निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए स्थान चिन्हित किए हैं और अधिकारियों को निरंतर सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी जिला कलेक्टरों और संबंधित विभागों को राहत व बचाव कार्यों में उच्च सतर्कता बरतने तथा निर्देशों का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में मानसून के दौरान बस्तर और सरगुजा मंडल परंपरागत रूप से सबसे अधिक बाढ़-प्रवण क्षेत्र रहे हैं, और इस बार चक्रवाती प्रभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

आगे की स्थिति

अधिकारियों के अनुसार जलस्तर धीरे-धीरे कम होना शुरू हो रहा है, हालाँकि प्रशासन स्थिति पर कड़ी नज़र बनाए हुए है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे बिना ज़रूरत नदी-नालों के पास न जाएँ और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। आने वाले 24 से 48 घंटे निचले इलाकों के लिए निर्णायक रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह हर साल दोहराया जाता है — फिर भी पूर्व-चेतावनी और समन्वय तंत्र वही रहता है। बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी-बहुल और दूरस्थ क्षेत्रों में संपर्क मार्गों का टूटना राहत पहुँचाने में हमेशा सबसे बड़ी बाधा बनता है, और इस मोर्चे पर दीर्घकालिक बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरी अब भी अनदेखी है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चक्रवात 'अर्नब' क्या है और यह छत्तीसगढ़ तक कैसे पहुँचा?
चक्रवात 'अर्नब' बंगाल की खाड़ी में बना एक चक्रवाती तूफान है जिसने छत्तीसगढ़ में तीन दिनों तक मूसलाधार बारिश की। इसके असर से राज्य के पाँच डिवीजनों — रायपुर, बिलासपुर, बस्तर, दुर्ग और सरगुजा — में बाढ़ और जलभराव की स्थिति पैदा हो गई।
गंगरेल बांध के 14 द्वार क्यों खोले गए?
धमतारी स्थित गंगरेल बांध का जलाशय 98 प्रतिशत से अधिक भर जाने के कारण अधिकारियों को बांध की सुरक्षा के लिए सभी 14 द्वार खोलने पड़े। इससे रुद्री बैराज के ज़रिये महानदी में करीब 50,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में बाढ़ से कौन-से जिले सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं?
बस्तर मंडल के जिले — सुकमा, कांकेर, बीजापुर, जगदलपुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा — सबसे अधिक प्रभावित हैं। ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र और वहाँ के बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर भी तेज़ी से बढ़ा है।
प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जिला कलेक्टरों को उच्च सतर्कता और प्रभावी राहत-बचाव के निर्देश दिए हैं। महानदी तट के 18 गाँवों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया है, बचाव दल तैनात किए गए हैं और निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
क्या जलस्तर कम हो रहा है और स्थिति कब सामान्य होगी?
अधिकारियों के अनुसार जलस्तर धीरे-धीरे कम होना शुरू हो रहा है, लेकिन अगले 24 से 48 घंटे निचले इलाकों के लिए निर्णायक रहेंगे। प्रशासन स्थिति पर कड़ी नज़र बनाए हुए है और नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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