1 अक्टूबर 2026
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बिहार में गंगा-गंडक ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर, CM सम्राट चौधरी ने कहा — अगले 48 घंटे रहें सतर्क

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बिहार में गंगा-गंडक ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर, CM सम्राट चौधरी ने कहा — अगले 48 घंटे रहें सतर्क

सारांश

बिहार में गंगा, गंडक और सोन तीनों नदियाँ ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर हैं — और राज्य में इस वर्ष 32% कम बारिश हुई है। नेपाल-UP का पानी बिहार के तटबंधों पर कहर बरपा रहा है। CM सम्राट चौधरी ने एयरफोर्स से मदद माँगी है और अगले 48 घंटे को निर्णायक बताया है।

मुख्य बातें

CM सम्राट चौधरी ने 1 अक्टूबर 2026 को पटना गंगा घाट पर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया।
गंगा, गंडक और सोन तीनों नदियाँ अपने ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से ऊपर बह रही हैं।
गंडक नदी डुमरियाघाट में 36 घंटे से और रेवाघाट-लालगंज में 21 घंटे से HFL से 22 सेंटीमीटर ऊपर है।
सारण और मुजफ्फरपुर में तटबंधों में ब्रिच की पुष्टि; अन्य संवेदनशील स्थल फिलहाल नियंत्रण में।
बिहार में इस वर्ष करीब 32% कम बारिश के बावजूद नदियाँ उफान पर — नेपाल और UP की वर्षा जिम्मेदार।
राज्य सरकार ने भारतीय वायु सेना (Air Force) से राहत कार्यों में सहयोग का आग्रह किया।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को पटना के गंगा घाट पहुँचकर नदी के उफनते जलस्तर का स्वयं जायजा लिया और अधिकारियों के साथ राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने चेतावनी दी कि गंगा और गंडक दोनों नदियाँ अपने ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से ऊपर बह रही हैं और अगले 48 घंटे अत्यंत सतर्कता के होंगे।

मुख्य घटनाक्रम

जल संसाधन विभाग के आँकड़ों के अनुसार, नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी वर्षा के कारण गंडक नदी डुमरियाघाट (गोपालगंज) में करीब 36 घंटे से तथा रेवाघाट (सारण) और लालगंज (वैशाली) में करीब 21 घंटे से HFL से 22 सेंटीमीटर ऊपर बनी हुई है। गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर है, जिससे गंडक में बैकफ्लो का दबाव उत्पन्न हो रहा है और स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। सोन नदी भी अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है।

तटबंधों पर दबाव और कटाव की स्थिति

विभाग ने बताया कि सारण जिले के पानापुर प्रखंड में राइट सारण तटबंध में कटाव और ब्रिच हुई है। इसी प्रकार, मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड में तिरहुत मुख्य तटबंध के अंतर्गत एक रिंग बाँध में भी ब्रिच की सूचना है। गंडक के बाएँ और दाएँ दोनों तटबंधों पर अत्यधिक हाइड्रोलिक दबाव बना हुआ है। कई स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की स्थिति उत्पन्न हुई है, जिन पर निरंतर निगरानी जारी है।

सरकार की प्रतिक्रिया और राहत कार्य

मुख्यमंत्री चौधरी ने कहा, 'आज हम लोगों ने एयरफोर्स से भी आग्रह किया है कि वे यहाँ राहत के कार्य के लिए सहयोग करेंगे। इस काम को भी हम लोग आगे बढ़ा रहे हैं। अगले 48 घंटे हम लोगों को पूरी तरह से सतर्क रहना होगा।' उन्होंने यह भी बताया कि सभी प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में जिलाधिकारी से लेकर तमाम अधिकारी निरंतर काम कर रहे हैं और सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता लोगों को समय पर राहत उपलब्ध कराना है।

कम बारिश के बावजूद उफान — चिंता की बड़ी वजह

यह स्थिति इसलिए भी विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि मुख्यमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया कि बिहार में इस वर्ष करीब 32 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसके बावजूद नदियों का ऐतिहासिक स्तर तक पहुँचना इस तथ्य की ओर संकेत करता है कि उत्तर प्रदेश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाला पानी बिहार की नदियों पर असमानुपातिक दबाव डाल रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की बाढ़-नियंत्रण अवसंरचना की क्षमता पहले से ही सवालों के घेरे में रही है।

क्या होगा आगे

जल संसाधन विभाग के अनुसार, जलस्तर में मामूली गिरावट की प्रवृत्ति शुरू हो गई है, लेकिन यह अभी भी पुराने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर से ऊपर बनी हुई है। विभाग ने अगले 48 घंटे तक हाइड्रोलिक दबाव बने रहने की आशंका जताते हुए निरंतर निगरानी जारी रखने का निर्देश दिया है। शेष संवेदनशील स्थल फिलहाल सुरक्षित और नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, जहाँ बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी नदियाँ ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि बिहार की बाढ़ समस्या मूलतः स्थानीय मानसून की नहीं, बल्कि नेपाल और उत्तर प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी के प्रबंधन की विफलता है — जो दशकों पुरानी अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय जल-समन्वय की कमी को रेखांकित करती है। एयरफोर्स की तैनाती तात्कालिक राहत तो दे सकती है, लेकिन तटबंधों में बार-बार होने वाली ब्रिच यह सवाल खड़ा करती है कि दशकों के निवेश के बाद भी बुनियादी ढाँचा इतना कमज़ोर क्यों है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में इस समय गंगा-गंडक की बाढ़ की स्थिति क्या है?
जल संसाधन विभाग के अनुसार, गंडक नदी डुमरियाघाट (गोपालगंज) में 36 घंटे से और रेवाघाट (सारण) तथा लालगंज (वैशाली) में 21 घंटे से ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से 22 सेंटीमीटर ऊपर बनी हुई है। गंगा और सोन नदियाँ भी अपने उच्चतम स्तर पर हैं।
CM सम्राट चौधरी ने अगले 48 घंटों को लेकर क्या चेतावनी दी?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 1 अक्टूबर 2026 को पटना में कहा कि अगले 48 घंटे राज्य के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं और सभी को पूरी तरह सतर्क रहना होगा। उन्होंने भारतीय वायु सेना से राहत कार्यों में सहयोग का आग्रह भी किया है।
बिहार में 32% कम बारिश के बावजूद नदियाँ उफान पर क्यों हैं?
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस वर्ष बिहार में करीब 32% कम बारिश हुई है, फिर भी नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी वर्षा के कारण गंडक और गंगा में अत्यधिक पानी आया है। यह अतिरिक्त जल बिहार के तटबंधों पर असामान्य दबाव बना रहा है।
किन जिलों के तटबंधों में ब्रिच हुई है?
जल संसाधन विभाग के अनुसार, सारण जिले के पानापुर प्रखंड में राइट सारण तटबंध में और मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड में तिरहुत मुख्य तटबंध के अंतर्गत एक रिंग बाँध में ब्रिच की पुष्टि हुई है। शेष संवेदनशील स्थल फिलहाल नियंत्रण में बताए जा रहे हैं।
आने वाले दिनों में बिहार में बाढ़ की स्थिति में सुधार होगा?
जल संसाधन विभाग के अनुसार, जलस्तर में गिरावट की प्रवृत्ति शुरू हो गई है, लेकिन यह अभी भी ऐतिहासिक उच्चतम स्तर से ऊपर है। विभाग ने अगले 48 घंटे तक हाइड्रोलिक दबाव बने रहने की संभावना जताई है और निरंतर निगरानी जारी रखने का निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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