बिहार में गंगा खतरे के निशान से 219 सेमी ऊपर, कटाव से 100 एकड़ जमीन नदी में समाई
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में गंगा समेत घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कोसी और सोन नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि ने राज्य के दर्जनों जिलों में संकट गहरा दिया है। 3 सितंबर को केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार पटना के गांधीघाट में गंगा खतरे के निशान से 158 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी और शुक्रवार सुबह तक इसमें 19 सेंटीमीटर की और बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है। पश्चिम चंपारण में कटाव इतना तीव्र है कि 100 एकड़ से अधिक कृषि भूमि फसल सहित नदी में समा चुकी है।
मुख्य जलस्तर की स्थिति
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार गुरुवार सुबह पटना के श्रीपालपुर में गंगा खतरे के निशान से 219 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज की गई — जो राज्य में सर्वाधिक है। दीघाघाट में गंगा 113 सेंटीमीटर और हाथीदह में 116 सेंटीमीटर ऊपर थी।
सोन नदी भी उफान पर है। पटना के मनेर में सोन का जलस्तर खतरे के निशान से 135 सेंटीमीटर ऊपर रहा, जबकि भोजपुर के कोइलवर में यह खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर नीचे था और अगले 24 घंटे में कमी का अनुमान है। गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक 70 सेंटीमीटर, खगड़िया में बूढ़ी गंडक 61 सेंटीमीटर, बलतारा में कोसी 120 सेंटीमीटर, कटिहार के कुरसेला में कोसी 62 सेंटीमीटर, सिवान के दरौली में घाघरा 21 सेंटीमीटर और भागलपुर के कहलगांव में गंगा 74 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी।
कटाव और बाढ़ का प्रभाव
पश्चिम चंपारण में नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार बारिश से गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा है। योगापट्टी के सिसवा मंगलपुर, चौमुखा और जरलपुर में तेज कटाव के कारण 100 एकड़ से अधिक जमीन फसल समेत नदी में समा चुकी है। खगड़िया में गंगा, गंडक और बागमती के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
कैमूर में कर्मनाशा नदी के उफान से बिहार-उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है। रोहतास में सोन नदी के बढ़े जलस्तर और भारी बारिश से कई घरों में पानी घुस गया है। भागलपुर में तटबंध टूटने और कटाव की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके मद्देनजर विभागीय टीम को अलर्ट रखा गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 'जन-धन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राधमिकता है और बाढ़ की स्थिति में आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जाएं।'
उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सिंचाई भवन स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से राज्यव्यापी बाढ़ स्थिति की समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पुनपुन और दरधा नदियों के बढ़ते जलस्तर, तटबंधों में टूट और कटाव-प्रभावित स्थानों की जानकारी ली गई।
ज़मीनी तैयारियां
पटना के जिलाधिकारी कुन्दन कुमार ने संवेदनशील तटबंधों की 24 घंटे निगरानी का निर्देश दिया है। ईसी बैग, नाइलन क्रेट, ट्रैक्टर और जेनरेटर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा गया है। शरणस्थलों में पेयजल, शौचालय, प्रकाश, भोजन, दवाएं और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा गया है।
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि पटना टाउन प्रोटेक्शन दीवार उच्चतम बाढ़ स्तर से 77 सेंटीमीटर ऊंची है और इसके ऊपर अतिरिक्त दो फीट लकड़ी की सुरक्षा व्यवस्था का प्रावधान भी है।
आगे क्या
जल संसाधन विभाग के अनुसार गुरुवार शाम चार बजे सोन बराज, इंद्रपुरी से करीब 4.45 लाख घनसेक, कोसी बराज, वीरपुर से 2.24 लाख घनसेक और गंडक बराज, वाल्मीकिनगर से 1.68 लाख घनसेक पानी दर्ज किया गया। सोन बराज का प्रवाह घटने की स्थिति में था, जबकि कोसी में बढ़ोतरी और गंडक में प्रवाह स्थिर बताया गया।
मौसम विभाग के अनुसार 4 सितंबर तक नेपाल के महानंदा क्षेत्र तथा बिहार के महानंदा, सोन और उत्तर कोयल के जलग्रहण क्षेत्रों में हल्की से सामान्य बारिश की संभावना है। ऐसे में अगले 24 से 48 घंटे तक नदियों के जलस्तर पर प्रशासन और जल संसाधन विभाग की विशेष नज़र बनी रहेगी।