1 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिहार में गंगा-कोसी-गंडक-सोन उफान पर, पटना में खतरे के निशान से 80 सेमी ऊपर; प्रशासन हाई अलर्ट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिहार में गंगा-कोसी-गंडक-सोन उफान पर, पटना में खतरे के निशान से 80 सेमी ऊपर; प्रशासन हाई अलर्ट

सारांश

बिहार में गंगा, कोसी, गंडक और सोन एक साथ उफान पर हैं। पटना के गांधी घाट पर जलस्तर खतरे के निशान से 80 सेमी ऊपर है और भागलपुर में कटाव से बांध खतरे में है। प्रशासन ने नाव, गोताखोर और सामुदायिक रसोई तैनात कर दी है।

मुख्य बातें

गंगा, कोसी, गंडक और सोन — चारों प्रमुख नदियाँ 1 सितंबर 2026 को उफान पर रहीं।
पटना गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर; अगले दिन 20 सेमी और बढ़ने का अनुमान।
वीरपुर बैराज पर कोसी का प्रवाह 1,92,735 क्यूसेक ; इंद्रपुरी बैराज पर सोन का प्रवाह 4,25,854 क्यूसेक दर्ज।
भागलपुर में काजीकोरेया-राघोपुर मार्जिनल बांध पर कटाव, दिन-रात सुरक्षात्मक कार्य जारी; एक मंदिर भी कटाव की चपेट में।
बक्सर में ज़िला पदाधिकारी साहिला ने तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण कर नाव, नाविक व गोताखोर तैनाती के निर्देश दिए।
भागलपुर में 5 स्थानों पर सामुदायिक रसोई; गणेश बासा, साहू ईंट भट्ठा, जानवी चौक में राहत शिविर स्थापित।

बिहार में गंगा, कोसी, गंडक और सोन नदियों के जलस्तर में तेज़ वृद्धि के बीच राज्य के जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने 1 सितंबर 2026 को संवेदनशील तटवर्ती इलाकों में निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियाँ युद्धस्तर पर तेज़ कर दी हैं। भागलपुर में गंगा के तेज़ प्रवाह से कटाव की गंभीर स्थिति बनी हुई है, जबकि बक्सर में ज़िला पदाधिकारी ने स्वयं तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण कर अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

नदियों का प्रवाह: ताज़ा आँकड़े

मंगलवार दोपहर की रिपोर्ट के अनुसार, वीरपुर बैराज पर कोसी नदी का डाउनस्ट्रीम प्रवाह 1,92,735 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसमें लगातार वृद्धि हो रही थी। वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक नदी का प्रवाह 1,50,200 क्यूसेक रहा, जो बढ़ता हुआ दर्ज किया गया। इंद्रपुरी बैराज पर सोन नदी का डाउनस्ट्रीम प्रवाह 4,25,854 क्यूसेक तक पहुँच गया — जो निचले तटवर्ती इलाकों के लिए चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है।

गंगा का जलस्तर: खतरे के निशान से ऊपर

पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया और अगले दिन सुबह तक इसमें अतिरिक्त 20 सेंटीमीटर की वृद्धि की संभावना जताई गई है। हाथीदह में जलस्तर खतरे के निशान से 48 सेंटीमीटर ऊपर था और 22 सेंटीमीटर और बढ़ने का अनुमान है। मनेर में जलस्तर 15 सेंटीमीटर ऊपर था, जहाँ 31 सेंटीमीटर तक की वृद्धि का पूर्वानुमान दिया गया है।

वहीं, बक्सर में जलस्तर खतरे के निशान से 34 सेंटीमीटर नीचे था, लेकिन अगले दिन दोपहर तक 17 सेंटीमीटर बढ़ने की आशंका जताई गई है। ज़िला पदाधिकारी साहिला ने लाल सिंह का डेरा क्षेत्र का निरीक्षण किया और सिमरी के अंचलाधिकारी को आबादी वाले एवं संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नाव, नाविक और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

भागलपुर में कटाव का संकट

भागलपुर में गंगा की धारा में बदलाव से काजीकोरेया-राघोपुर मार्जिनल बांध पर कटाव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जल संसाधन विभाग ने पर्याप्त संख्या में अभियंताओं, श्रमिकों, मशीनरी और अन्य संसाधन तैनात कर दिन-रात सुरक्षात्मक कार्य जारी रखे हैं। महादेवपुर बांध के समीप तेज़ धारा और स्कॉरिंग के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, कुछ पुरानी संरचनाएँ प्रभावित हुई हैं और एक मंदिर भी कटाव की चपेट में आया है।

राहत व्यवस्था और सामुदायिक रसोई

भागलपुर प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत व्यवस्था सुदृढ़ की है। मध्य विद्यालय, शंकरपुर, नाथनगर में मंगलवार रात सामुदायिक रसोई शुरू की गई, जबकि चार अन्य स्थानों पर पहले से रसोई संचालित हैं। गणेश बासा, साहू ईंट भट्ठा और जानवी चौक में राहत शिविर स्थापित किए जा रहे हैं, जहाँ भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। ज़रूरत के अनुसार राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई की संख्या बढ़ाई जाएगी।

प्रशासन की अपील

अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे नदी और जलमग्न क्षेत्रों के पास अनावश्यक रूप से न जाएँ, अफ़वाहों से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की बारिश उत्तर बिहार और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार जारी है, जिससे आने वाले दिनों में जलस्तर में और वृद्धि की आशंका बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासन अलर्ट जारी करता है, सामुदायिक रसोई खुलती हैं और फिर पानी उतरने के बाद सब भूल जाता है। असली सवाल यह है कि कोसी, गंडक और सोन पर बने बैराज दशकों पुराने हैं और उनकी भार-वहन क्षमता की समीक्षा कब हुई? भागलपुर में काजीकोरेया-राघोपुर बांध पर कटाव कोई नई घटना नहीं — यह संरचनात्मक उपेक्षा का संकेत है। जब तक दीर्घकालिक तटबंध सुदृढ़ीकरण और जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन को प्राथमिकता नहीं दी जाती, राहत शिविर और सामुदायिक रसोई स्थायी समाधान नहीं बन सकते।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में इस समय कौन-कौन सी नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर हैं?
1 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पटना के गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर है। हाथीदह में 48 सेंटीमीटर और मनेर में 15 सेंटीमीटर ऊपर जलस्तर दर्ज किया गया है। कोसी, गंडक और सोन नदियों में भी प्रवाह तेज़ है।
भागलपुर में कटाव की स्थिति कितनी गंभीर है?
भागलपुर में काजीकोरेया-राघोपुर मार्जिनल बांध पर कटाव से सुरक्षात्मक कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। महादेवपुर बांध के पास तेज़ धारा और स्कॉरिंग से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और स्थानीय जानकारी के अनुसार एक मंदिर भी कटाव की चपेट में आया है।
बक्सर में प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
बक्सर की ज़िला पदाधिकारी साहिला ने लाल सिंह का डेरा क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने सिमरी के अंचलाधिकारी को संवेदनशील क्षेत्रों में नाव, नाविक और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती सुनिश्चित करने और आपात संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत व्यवस्था कहाँ उपलब्ध है?
भागलपुर में मध्य विद्यालय शंकरपुर नाथनगर सहित पाँच स्थानों पर सामुदायिक रसोई संचालित है। गणेश बासा, साहू ईंट भट्ठा और जानवी चौक में राहत शिविर स्थापित किए जा रहे हैं, जहाँ भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएँ दी जाएंगी।
प्रशासन ने नागरिकों से क्या अपील की है?
अधिकारियों ने नागरिकों से नदी और जलमग्न क्षेत्रों के पास अनावश्यक रूप से न जाने की अपील की है। साथ ही अफ़वाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 5 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले