असम बाढ़ राहत: अखिल गोगोई ने 6 सितंबर से आंदोलन का ऐलान किया, प्रभावित परिवारों को ₹10 लाख मुआवजे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
शिवसागर से विधायक और रायजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई ने 1 सितंबर को असम में बाढ़ राहत व्यवस्था की खामियों को लेकर नए जन-आंदोलन की घोषणा की। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से हुई हालिया बैठक में असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की राहत नियमावली में संशोधन को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाने का निर्णय लिया।
आंदोलन की रूपरेखा
गोगोई ने घोषणा की कि 6 सितंबर को नाजिरा में एक बड़ी जनसभा आयोजित होगी, जो इस आंदोलन की औपचारिक शुरुआत होगी। इसके बाद 7 से 16 सितंबर तक राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा, जिसमें रायजोर दल के कार्यकर्ता बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर नुकसान का सीधा आकलन करेंगे और पीड़ित परिवारों से संवाद स्थापित करेंगे।
अभियान के अंत में गुवाहाटी में एक विशाल जनसभा आयोजित की जाएगी। साथ ही 16 सितंबर को मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर प्रदर्शन का भी कार्यक्रम है।
मुआवजे की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल
गोगोई ने वर्तमान राहत प्रावधानों को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि मृत्यु की स्थिति में केवल ₹3 लाख का मुआवजा निर्धारित है। कपड़े, बिस्तर और अन्य घरेलू सामान के नुकसान पर महज ₹2,500 तथा बर्तनों के नुकसान पर भी उतनी ही राशि दी जाती है। उनके अनुसार पक्के मकानों, कृषि भूमि और तालाबों को हुए नुकसान के अनुपात में यह सहायता बेहद कम है।
उन्होंने शिवसागर सहित कई क्षेत्रों में व्यापारिक प्रतिष्ठानों को हुए करोड़ों रुपए के नुकसान का भी उल्लेख किया और बीमा-रहित व्यवसायों तथा क्षतिग्रस्त वाहनों के लिए बेहतर मुआवजे की मांग रखी।
केंद्र से अधिक सहायता का तर्क
गोगोई ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि असम की बाढ़ को 'भीषण आपदा' या 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित नहीं किया गया, जबकि ऐसा करने से केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्राप्त करना संभव होता। उन्होंने कहा कि इस चूक से बाढ़ पीड़ितों को उनका उचित हक नहीं मिला।
राजनीतिक दांव और विधायक निधि का प्रस्ताव
गोगोई ने कहा कि वह अपनी विधायक निधि से ₹1.5 करोड़ उपयोग करने की अनुमति माँगेंगे, ताकि शिवसागर क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को ₹25,000 प्रति व्यक्ति की सहायता दी जा सके। उन्होंने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर भी निशाना साधा और कहा कि उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग कर राहत कार्य नहीं किए गए।
राजनीतिक चुनौती के रूप में उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और सांसद गौरव गोगोई दोनों को शिवसागर से उनके खिलाफ चुनाव लड़ने का आमंत्रण दिया और कहा कि वह इसके लिए अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा देने को भी तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रायजोर दल आगामी नगांव लोकसभा उपचुनाव नहीं लड़ेगी, लेकिन पार्टी का लक्ष्य 2031 के विधानसभा चुनाव तक असम की प्रमुख विपक्षी शक्ति बनना है।
यह आंदोलन ऐसे समय में आया है जब असम में बाढ़ से हर वर्ष लाखों परिवार प्रभावित होते हैं और राहत की पर्याप्तता का सवाल बार-बार उठता रहा है। गोगोई की यह पहल राज्य की आपदा प्रबंधन नीति को विधानसभा के बाहर भी जनता की अदालत में ले जाने की कोशिश है।