असम बाढ़ राहत: विधायकों ने दिया एक महीने का वेतन, 4 लाख से अधिक प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
असम विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी ने 28 जुलाई 2026 को सदन में घोषणा की कि राज्य के सभी विधायक भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए अपना एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करेंगे। शिवसागर, गोलाघाट, चराइदेव, जोरहाट, नगांव और कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) सहित कई जिलों में 4 लाख से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हैं।
विधानसभा का एकजुट संकल्प
विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी ने स्पष्ट किया कि सभी दलों के विधायकों ने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर यह निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि वे स्वयं और उपाध्यक्ष भी अपना एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराएंगे। यह कदम बाढ़ पीड़ितों के प्रति जनप्रतिनिधियों की एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है।
सचिवालय कर्मचारियों की भी सहभागिता
असम विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी स्वेच्छा से एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय लिया है। यह सामूहिक प्रयास राहत और बचाव कार्यों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बाढ़ की स्थिति और राहत अभियान
ताजा सरकारी बाढ़ बुलेटिन के अनुसार, ऊपरी असम के बड़े हिस्से अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। सड़कें और बुनियादी ढाँचा क्षतिग्रस्त हुआ है, कृषि भूमि जलमग्न हो गई है और हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), जिला प्रशासन और अन्य एजेंसियाँ मिलकर राहत अभियान में जुटी हैं।
आम जनता को राहत सामग्री का वितरण
प्रशासन राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में रह रहे लोगों को भोजन, पेयजल, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सामग्री पहुँचा रहा है। मुख्यमंत्री राहत कोष का उपयोग प्राकृतिक आपदाओं में प्रभावित लोगों को तत्काल आर्थिक सहायता देने के लिए किया जाता है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सरकार को उम्मीद है कि जनप्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों, विभिन्न संगठनों और आम नागरिकों के सहयोग से राहत और पुनर्वास कार्यों में और तेजी आएगी। यह बहुदलीय समर्थन राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन प्रयासों को व्यापक सामाजिक स्वीकृति का संकेत देता है।