असम बाढ़: 15 जिलों में 1.68 लाख लोग प्रभावित, 133 राहत शिविर सक्रिय; 2 की मौत
सारांश
मुख्य बातें
असम में बाढ़ की स्थिति 6 अगस्त 2026 को भी गंभीर बनी रही, जिसमें राज्य के 15 जिलों के 39 राजस्व सर्किलों के 481 गाँवों में 1,68,701 लोग प्रभावित हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, बाढ़ में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है और 14,382.26 हेक्टेयर फसल क्षेत्र जलमग्न है।
बाढ़ की मौजूदा स्थिति
ASDMA के अनुसार, नुमालीगढ़ में धनसिरी दक्षिण नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, हालाँकि कोई भी नदी सर्वाधिक बाढ़ स्तर तक नहीं पहुँची है। यह राहत की बात है कि जलस्तर में आंशिक स्थिरता देखी जा रही है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन अभी भी अस्त-व्यस्त है।
सबसे अधिक प्रभावित जिले
गोलाघाट जिले में सर्वाधिक 54,085 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद शिवसागर में 49,515, जोरहाट में 27,842 और चराईदेव में 21,486 लोग प्रभावित हैं। इनके अलावा लखीमपुर, नगांव, दरंग और विश्वनाथ जिले भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। शिवसागर, जोरहाट, लखीमपुर और चराईदेव में फसलों को व्यापक नुकसान पहुँचा है, जिससे किसानों की आजीविका संकट में है।
राहत एवं बचाव कार्य
राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में 133 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित किए हैं। इनमें अभी 10,111 लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि 35,596 लोगों को वितरण केंद्रों के ज़रिए सहायता दी जा रही है। राहत सामग्री में 616 क्विंटल से अधिक चावल, लगभग 110 क्विंटल दाल, खाद्य तेल, पशु आहार और अन्य ज़रूरी सामान शामिल हैं।
बचाव अभियान के तहत 93 टीमें और 151 नावें तैनात की गई हैं। अब तक नावों के माध्यम से 4 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। फिलहाल किसी के लापता होने की सूचना नहीं है।
जान-माल का नुकसान
बाढ़ में गोलाघाट और उदलगुरी जिलों में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है, जिससे कुल मृतक संख्या 2 हो गई है। आपदा से 41,475 पशु भी प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा 365 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं — जिनमें 40 पूरी तरह और 325 आंशिक रूप से ध्वस्त हुए हैं।
आगे की राह
प्रशासन बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और पुनर्निर्माण कार्य में जुटा हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब असम हर वर्ष मानसून के दौरान विनाशकारी बाढ़ झेलता है, और ब्रह्मपुत्र व उसकी सहायक नदियों के जल-प्रबंधन पर दीर्घकालिक नीतिगत बहस अभी भी अनसुलझी है। गौरतलब है कि राज्य में मानसूनी बाढ़ एक वार्षिक आपदा बन चुकी है जो लाखों लोगों की आजीविका को बार-बार तहस-नहस कर देती है।