असम बाढ़: 80 मौतें, आठ जिलों में 2.12 लाख से अधिक प्रभावित; धनसिरी नदी का जलस्तर खतरे के निशान पर
सारांश
मुख्य बातें
असम में इस मानसून सीजन की बाढ़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक राज्य के आठ जिलों में 2,12,441 से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं और इस सीजन में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है। पिछले 24 घंटों में अकेले शिवसागर जिले में दो और लोगों की मौत दर्ज की गई।
प्रभावित क्षेत्र और नुकसान का दायरा
बाढ़ की मार गोलाघाट, शिवसागर, विश्वनाथ, चराइदेव, कामरूप (मेट्रो), जोरहाट, धेमाजी और नागांव जिलों तक फैली हुई है। 21 राजस्व मंडलों के अंतर्गत 437 गाँव इस आपदा से प्रभावित हैं। कृषि को भी भारी नुकसान पहुँचा है — बाढ़ के पानी में 17,198.09 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
शहरी क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं। कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के कुछ हिस्सों में अब भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जो इस बाढ़ के असामान्य शहरी विस्तार को दर्शाता है।
राहत और बचाव कार्य
विस्थापित परिवारों को आश्रय देने के लिए 21 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। जिला प्रशासन प्रभावित लोगों को भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहा है। अधिकारी प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव अभियान निरंतर जारी रखे हुए हैं।
धनसिरी नदी की चेतावनी
ASDMA ने गुरुवार रात एक सार्वजनिक एडवाइजरी जारी कर गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ के निकट धनसिरी (दक्षिण) नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने की चेतावनी दी। प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे नदी के किनारे से दूर रहें। प्राधिकरण ने अपनी एडवाइजरी में कहा, 'नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे नदी से दूर रहें।' राज्य की कई अन्य नदियों में भी जलस्तर अभी खतरे के निशान के करीब बना हुआ है।
आगे की स्थिति
राज्य सरकार और जिला प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर कड़ी नज़र बनाए हुए हैं। गौरतलब है कि असम में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति विकट हो जाती है और ब्रह्मपुत्र तथा उसकी सहायक नदियाँ लाखों लोगों को विस्थापित करती हैं। इस वर्ष की बाढ़ का दायरा और मृत्यु संख्या पिछले कुछ वर्षों की तुलना में चिंताजनक स्तर पर है। राहत कार्यों की गति और नदियों के जलस्तर में कमी ही आने वाले दिनों में स्थिति की दिशा तय करेगी।