असम बाढ़: 15 जिलों में 1.68 लाख से अधिक प्रभावित, ASDMA ने जारी किया अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) ने 7 अगस्त 2026 को गोलाघाट जिले में धनसिरी (दक्षिण) नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुँचने के बाद सार्वजनिक चेतावनी जारी की है। प्राधिकरण ने नदी के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों से सतर्क रहने और स्थिति सामान्य होने तक नदी से दूरी बनाए रखने का आग्रह किया है। राज्य के 15 जिलों में बाढ़ से 1,68,701 से अधिक लोग प्रभावित हैं।
बाढ़ का दायरा और प्रभावित क्षेत्र
ASDMA के नवीनतम बाढ़ बुलेटिन के अनुसार, 39 राजस्व सर्किलों के 481 गाँवों में बाढ़ का प्रकोप जारी है। 14,382 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि अभी भी जलमग्न है, जिससे खरीफ फसलों को व्यापक नुकसान पहुँचा है।
गोलाघाट सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहाँ 54,085 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद शिवसागर (49,515), जोरहाट (27,842) और चराइदेव (21,486) का स्थान है। शिवसागर, जोरहाट, लखीमपुर और चराइदेव जिलों से फसलों को भारी नुकसान की खबरें मिल रही हैं।
नदियों की स्थिति
ASDMA ने पुष्टि की है कि नुमालीगढ़ में धनसिरी (दक्षिण) नदी खतरे के निर्धारित स्तर से ऊपर बह रही है। हालाँकि, प्राधिकरण के अनुसार, राज्य की किसी भी नदी में अभी तक बाढ़ का उच्चतम स्तर (Extreme Flood Level) दर्ज नहीं किया गया है। यह ऐसे समय में राहत की बात है जब कई नदियाँ उफान पर हैं।
राहत और बचाव अभियान
राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में 133 राहत शिविरों और राहत वितरण केंद्रों को सक्रिय रखा है। 10,111 विस्थापित लोग इन राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं, जबकि 35,596 अन्य लोगों को राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है।
राहत एजेंसियों ने प्रभावित परिवारों में चावल, दालें, खाद्य तेल, पशु चारा और अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया है। बचाव दल संवेदनशील क्षेत्रों में नौकाओं और कर्मियों के साथ तैनात हैं।
जान-माल का नुकसान
बाढ़ से अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है — गोलाघाट और उदलगुरी जिलों में एक-एक व्यक्ति की जान गई है। फिलहाल किसी के लापता होने की सूचना नहीं है। इस आपदा से 41,475 पशु भी प्रभावित हुए हैं और 365 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें से 40 घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं।
आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब असम में मानसून की बारिश अभी भी जारी है और नदियों का जलस्तर स्थिर नहीं हुआ है। गौरतलब है कि असम हर वर्ष मानसून के दौरान व्यापक बाढ़ का सामना करता है, जो ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के उफान से उत्पन्न होती है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, इसलिए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।