असम बाढ़: मृतक संख्या 104 पहुँची, 7 जिलों में 78,637 लोग प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
असम में बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 104 हो गई है, जबकि राज्य के सात जिलों में 78,637 लोग अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं। असम डिजास्टर रिपोर्टिंग एंड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (DRIAMS) के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त 2026 तक स्थिति गंभीर बनी हुई है और राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
प्रभावित जिले और आँकड़े
DRIAMS के अनुसार, नगांव, गोलाघाट, शिवसागर, कामरूप, होजई, जोरहाट और लखीमपुर जिले इस समय बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हैं। 20 राजस्व सर्किल के 313 गाँव जलमग्न हो चुके हैं। जिलेवार देखें तो गोलाघाट में सर्वाधिक 30,778 लोग प्रभावित हैं, इसके बाद नगांव में 26,292, शिवसागर में 12,480 और जोरहाट में 9,087 लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं।
राहत शिविर और बचाव अभियान
अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित जिलों में 68 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें अभी 5,057 लोग शरण लिए हुए हैं। इनमें 761 बच्चे, 58 गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ और 4 दिव्यांग व्यक्ति शामिल हैं। नावों के ज़रिए अब तक 117 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है। बचाव दल और मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं।
बुनियादी ढाँचे को नुकसान और फसल क्षति
बाढ़ के पानी ने सड़कों और पुलों को भी भारी नुकसान पहुँचाया है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार 32 सड़कें और 1 पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कृषि क्षेत्र को भी गहरा धक्का लगा है — सरकारी आकलन के मुताबिक लगभग 8,268.71 हेक्टेयर फसल क्षेत्र जलमग्न हो गया है, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
ताज़ा घटनाक्रम और प्रशासन की प्रतिक्रिया
ताज़ा आकलन में शिवसागर में बाढ़ से एक और मौत की पुष्टि हुई है, हालाँकि किसी के लापता होने की सूचना नहीं है। ज़िला प्रशासन को राहत कार्य जारी रखने और स्थिति पर कड़ी नज़र रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जल स्तर और मौसम की स्थिति का लगातार आकलन किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब असम हर साल मानसून के दौरान विनाशकारी बाढ़ का सामना करता है और दीर्घकालिक समाधान की माँग वर्षों से उठती रही है।
आगे की स्थिति
गौरतलब है कि असम में बाढ़ एक वार्षिक आपदा बन चुकी है जो हर साल लाखों लोगों को विस्थापित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जल प्रबंधन में दीर्घकालिक निवेश के बिना यह चक्र टूटना मुश्किल है। फ़िलहाल प्रशासन स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और आने वाले दिनों में जल स्तर में परिवर्तन के अनुसार राहत कार्यों का दायरा बढ़ाया जा सकता है।