असम बाढ़ 2026: सात जिलों में 3.32 लाख से अधिक प्रभावित, 75 की मौत; राहत शिविरों में 32,477 लोग
सारांश
मुख्य बातें
असम में बाढ़ की स्थिति में आंशिक सुधार के बावजूद 28 जुलाई 2026 तक सात जिलों के 622 गाँवों में 3,32,639 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के आँकड़ों के अनुसार, 21 राजस्व सर्किलों में फैली यह तबाही राज्य की वार्षिक बाढ़ संकट की गंभीरता को एक बार फिर उजागर करती है।
प्रभावित जिले और क्षेत्र
बाढ़ की मार झेल रहे जिलों में शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नागांव, सोनितपुर और कामरूप (मेट्रो) शामिल हैं। 45,341.98 हेक्टेयर कृषि भूमि अभी भी जलमग्न है, जिससे खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। ASDMA के अनुसार नुमालीगढ़ में धनसिरी (दक्षिण) नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, हालाँकि किसी भी नदी के उच्चतम बाढ़ स्तर को पार करने की सूचना नहीं है।
मृतक संख्या और जनहानि
बाढ़ की ताज़ा लहर में अकेले शिवसागर जिले में सात लोगों की जान गई है। इसके साथ ही इस वर्ष असम में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या 75 हो गई है। ASDMA ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा दौर में किसी के लापता होने की कोई सूचना नहीं है।
राहत एवं बचाव कार्य
प्रभावित जिलों में 115 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं — जिनमें 81 राहत शिविर और 34 राहत वितरण केंद्र शामिल हैं। वर्तमान में 32,477 लोग इन शिविरों में आश्रय ले रहे हैं। शिवसागर में सर्वाधिक विस्थापित हैं, इसके बाद जोरहाट, गोलाघाट और चराइदेव का स्थान है।
सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा दल, SDRF कर्मी और स्थानीय स्वयंसेवक बचाव अभियान में जुटे हैं। प्रभावित परिवारों को अनाज, पेयजल, तिरपाल, शिशु आहार, दवाएँ, ब्लीचिंग पाउडर और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की जा रही है।
आम जनता पर असर
कृषि भूमि के जलमग्न रहने से किसानों की आजीविका पर गहरा संकट मंडरा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ बुआई का मौसम चल रहा है और फसल नुकसान की भरपाई अगले कई महीनों तक मुश्किल रहेगी। गौरतलब है कि असम हर वर्ष मानसून में इसी तरह की तबाही झेलता है, और दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन के लिए स्थायी समाधान की माँग लंबे समय से उठती रही है।
आगे की स्थिति
ASDMA ने कहा है कि वह स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों को निर्बाध रूप से जारी रखा जाएगा। नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।