असम बाढ़: 11 जिलों में 7.21 लाख से अधिक प्रभावित, 6 की मौत; शिवसागर सबसे बुरी तरह जलमग्न
सारांश
मुख्य बातें
असम में बाढ़ का कहर जारी है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, 24 जुलाई 2026 तक राज्य के 11 जिलों में 7.21 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं और अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बाढ़ से 25,375.44 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुँचा है और 883 गाँव प्रभावित हैं।
प्रभावित जिले और मुख्य घटनाक्रम
ASDMA के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, बाढ़ की चपेट में आए जिलों में गोलाघाट, होजई, कामरूप, चराइदेव, जोरहाट, डिब्रूगढ़, शिवसागर, नागांव, कामरूप (मेट्रो), कार्बी आंगलोंग और तिनसुकिया शामिल हैं। कुल 37 राजस्व सर्कल इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।
सबसे गंभीर स्थिति शिवसागर जिले में है, जहाँ 3,75,682 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके बाद चराइदेव में 1,86,351 और जोरहाट में 1,15,764 लोग प्रभावित हैं।
मृत्यु और लापता व्यक्तियों की स्थिति
ASDMA ने पुष्टि की है कि बाढ़ के कारण अब तक 6 लोगों की जान जा चुकी है — इनमें शिवसागर में 4 और चराइदेव में 2 मौतें शामिल हैं। ताज़ा रिपोर्ट में किसी के लापता होने की सूचना नहीं है।
शहरी क्षेत्रों पर असर
ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में हैं। कामरूप, कामरूप मेट्रोपॉलिटन और डिब्रूगढ़ जिलों के 5 राजस्व सर्कल और 17 इलाके या वार्ड प्रभावित हैं, जिससे 592 लोग सीधे प्रभावित हुए हैं। निचले इलाकों में जलभराव से सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
राहत और बचाव अभियान
प्रशासन ने प्रभावित जिलों में व्यापक राहत अभियान शुरू किया है। इस समय 103 राहत शिविर और 255 राहत वितरण केंद्र सक्रिय हैं। 24,000 से अधिक लोग राहत शिविरों में आश्रय ले रहे हैं, जबकि 2.39 लाख से अधिक लोगों को राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से सहायता पहुँचाई गई है।
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में NDRF, SDRF, सेना, अग्निशमन व आपातकालीन सेवाएँ और जिला प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में मानसून अपने चरम पर है और ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
आगे की स्थिति
अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी जारी है और स्थिति में सुधार के लिए राहत कार्य तेज़ किए जा रहे हैं। फसल नुकसान के आकलन के बाद किसानों को मुआवज़े की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।