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असम बाढ़: गौरव गोगोई ने सरमा सरकार पर साधा निशाना, 41 मौतें और राहत में देरी का आरोप

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असम बाढ़: गौरव गोगोई ने सरमा सरकार पर साधा निशाना, 41 मौतें और राहत में देरी का आरोप

सारांश

असम में बाढ़ से 41 मौतें और लाखों विस्थापित — फिर भी राहत नहीं पहुँची। कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने जोरहाट, शिवसागर और चराइदेव का दौरा कर सरमा सरकार पर सीधा हमला बोला है और केंद्र से तकनीकी टीम भेजने की माँग की है।

मुख्य बातें

असम बाढ़ में अब तक 41 लोगों की मौत , कई लोग अभी भी लापता; लाखों लोग विस्थापित ।
कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने 23 जुलाई को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार पर राहत में देरी का आरोप लगाया।
गोगोई ने जोरहाट , शिवसागर और चराइदेव जिलों का दौरा कर जमीनी हालात का जायजा लिया।
प्रभावित परिवारों को राशन, पीने का पानी, कपड़े और डिसइंफेक्टेंट की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
गोगोई ने केंद्र सरकार से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भेजने और BJP सरकार से नुकसान का पारदर्शी ब्यौरा देने की माँग की।
युवा स्वयंसेवक और 'जेन-जी' ग्रुप प्रतिदिन सैकड़ों परिवारों के लिए राहत सामग्री वितरण और भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं।

असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने 23 जुलाई को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए — उनके अनुसार राज्य में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हजारों प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुँचाने में घोर विलंब हुआ है। गोगोई ने इस आपदा को 'अभूतपूर्व मानवीय संकट' करार देते हुए कहा कि अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अभी भी लापता हैं।

मुख्य घटनाक्रम

गोगोई ने बताया कि उन्होंने हाल ही में जोरहाट, शिवसागर और चराइदेव सहित ऊपरी असम के सर्वाधिक प्रभावित जिलों का दौरा किया। अपने जमीनी दौरे के आधार पर उन्होंने दावा किया कि स्थानीय प्रशासन आपातकालीन आपूर्ति का समय पर वितरण सुनिश्चित करने में नाकाम रहा।

उनके अनुसार, बाढ़ प्रभावित परिवारों को राशन, पीने का पानी, कपड़े, फिनाइल और ब्लीचिंग पाउडर जैसे आवश्यक सामान की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। गोगोई ने कहा कि बाढ़ के कई दिन बीत जाने के बाद भी कई जिलों में लोग बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं।

विस्थापन और क्षति का दायरा

कांग्रेस नेता ने बताया कि इस आपदा में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और अनेक परिवार बेघर हो गए हैं। बाढ़ के बाद की स्थिति — जिसमें बीमारियों के फैलने का खतरा भी शामिल है — से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए, ऐसा उनका आरोप है।

यह ऐसे समय में आया है जब असम में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ की विभीषिका देखी जाती है, और दीर्घकालिक राहत व पुनर्वास तंत्र की कमी पर सवाल उठते रहे हैं।

सरकार से माँगें

गोगोई ने असम की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार से बाढ़ से हुए नुकसान का पारदर्शी ब्यौरा सार्वजनिक करने और बिना किसी और देरी के प्रत्येक प्रभावित घर तक राहत पहुँचाने की अपील की।

इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम असम भेजने का आग्रह किया, ताकि क्षतिग्रस्त घरों के पुनर्निर्माण और कृषि गतिविधियों की बहाली में सहायता मिल सके।

स्वयंसेवकों की सराहना

गोगोई ने युवा स्वयंसेवकों और 'जेन-जी' के प्रयासों की सराहना की, जो राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं और प्रतिदिन सैकड़ों परिवारों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं। उन्होंने असम भर के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से राहत व पुनर्वास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

आगे की स्थिति

गौरतलब है कि असम में बाढ़ की यह स्थिति हर वर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करती है, और दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन नीति की माँग वर्षों से उठती रही है। कांग्रेस के इन आरोपों पर सरमा सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में राहत कार्यों की गति और पारदर्शिता इस राजनीतिक विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असम में बाढ़ राहत की संरचनात्मक विफलताएँ कोई नई बात नहीं — यह सवाल हर सरकार के कार्यकाल में उठता है। असली मुद्दा यह है कि राज्य में बाढ़ प्रबंधन अभी भी प्रतिक्रियात्मक है, न कि पूर्व-नियोजित। 41 मौतें और लाखों विस्थापित — इसके बावजूद यदि बुनियादी डिसइंफेक्टेंट तक नहीं पहुँचे, तो यह महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि तंत्र की दीर्घकालिक विफलता है। सरमा सरकार को आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ पारदर्शी राहत डेटा सार्वजनिक करना होगा — अन्यथा राजनीतिक नुकसान बढ़ता रहेगा।
RashtraPress
6 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम बाढ़ में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के बयान के अनुसार असम बाढ़ में अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अभी भी लापता हैं। लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और अनेक परिवार बेघर हो गए हैं।
गौरव गोगोई ने सरमा सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
गोगोई ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राशन, पीने का पानी, कपड़े और डिसइंफेक्टेंट जैसी बुनियादी राहत सामग्री समय पर पहुँचाने में नाकाम रही। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन आपातकालीन आपूर्ति का वितरण सुनिश्चित नहीं कर सका।
गोगोई ने किन जिलों का दौरा किया?
गौरव गोगोई ने जोरहाट, शिवसागर और चराइदेव सहित ऊपरी असम के सर्वाधिक प्रभावित जिलों का दौरा किया। इसी दौरे के आधार पर उन्होंने राहत अभियान को अपर्याप्त बताया।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से क्या माँग की है?
गोगोई ने केंद्र सरकार से तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम असम भेजने की अपील की है ताकि बाढ़ से क्षतिग्रस्त घरों के पुनर्निर्माण और कृषि गतिविधियों की बहाली में सहायता मिल सके। साथ ही उन्होंने BJP सरकार से नुकसान का पारदर्शी ब्यौरा सार्वजनिक करने की भी माँग की।
असम बाढ़ राहत में स्वयंसेवकों की क्या भूमिका है?
गोगोई के अनुसार कई युवा समूह और 'जेन-जी' स्वयंसेवक प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। वे राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं और प्रतिदिन सैकड़ों परिवारों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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