असम बाढ़: अमित शाह ने हिमंत सरमा से की बात, केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम जल्द पहुँचेगी; 41 मौतें, 9 लाख प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बातचीत कर राज्य में आई भीषण बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। शाह ने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार नुकसान के आकलन के लिए शीघ्र ही एक अंतर-मंत्रालयी टीम असम भेजेगी, जो प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सहायता सुनिश्चित करेगी।
बाढ़ का विनाशकारी असर
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह बाढ़ हाल के वर्षों की सबसे भीषण आपदाओं में से एक है। ऊपरी क्षेत्रों में बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट) और अत्यधिक वर्षा के कारण राज्य के कई जिलों में अचानक बाढ़ आई। कुछ हिस्सों में सामान्य से 436 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे उन इलाकों में भी जलभराव हो गया जहाँ पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी गई थी।
आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ से 25 जिलों के 1,800 से अधिक गाँवों में 9 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 41 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि हज़ारों मवेशी भी इस त्रासदी में काल के गाल में समा गए हैं।
बचाव एवं राहत अभियान
भारतीय वायुसेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और अन्य एजेंसियाँ मिलकर चौबीसों घंटे बचाव एवं राहत अभियान चला रही हैं। दुर्गम इलाकों में फँसे लोगों तक पहुँचने के लिए हेलीकॉप्टर और नौकाओं का उपयोग किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने 148 से अधिक राहत शिविर स्थापित किए हैं, जिनमें लगभग 30,000 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है। अब तक 3 लाख किलोग्राम से अधिक चावल सहित बड़ी मात्रा में खाद्यान्न, पेयजल और आवश्यक सामग्री सबसे अधिक प्रभावित जिलों में पहुँचाई जा चुकी है।
केंद्र की प्रतिक्रिया और आश्वासन
मुख्यमंत्री सरमा ने गृह मंत्री शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस संकट की घड़ी में केंद्र सरकार ने असम को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया है। केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम के दौरे के बाद राहत और पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय सहायता जारी किए जाने की उम्मीद है।
यह ऐसे समय में आया है जब असम में बाढ़ हर वर्ष एक गंभीर समस्या बनती है — ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियाँ मानसून के दौरान खतरनाक स्तर पर पहुँच जाती हैं। गौरतलब है कि इस बार बादल फटने की घटनाओं ने स्थिति को असाधारण रूप से गंभीर बना दिया है।
आगे की योजना
मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर प्रभावित परिवारों के लिए एक व्यापक पुनर्वास पैकेज तैयार कर रही है। साथ ही, भविष्य में बादल फटने और बाढ़ जैसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा शुरू की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन नीति के बिना यह चक्र हर साल दोहराता रहेगा।