असम बाढ़: गौरव गोगोई ने जोरहाट दौरे के बाद राहत-पुनर्वास में तेजी की मांग की, 7.27 लाख प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बुधवार, 22 जुलाई को अपने संसदीय क्षेत्र जोरहाट के बाढ़ प्रभावित इलाकों का व्यापक दौरा किया और असम राज्य सरकार से राहत, बचाव तथा पुनर्वास कार्यों में तत्काल तेजी लाने की माँग की। असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोगोई ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर सहायता पहुँचाना होनी चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
गोगोई ने जोरहाट के कई जलमग्न गाँवों का दौरा कर विस्थापित परिवारों से मुलाकात की, जमीनी हालात का जायजा लिया और राहत सामग्री का वितरण किया। उन्होंने स्थानीय निवासियों, स्वयंसेवकों और राहत कार्यों में जुटे अधिकारियों से सीधे बातचीत कर प्रभावित क्षेत्रों की तत्काल ज़रूरतों का आकलन किया।
गोगोई ने कहा, "जोरहाट समेत असम के कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर है। अनेक लोगों ने अपने घर और आजीविका खो दी है, जबकि कई परिवार अपने प्रियजनों को खोने के दुख से गुजर रहे हैं।"
बाढ़ की भयावहता: सरकारी आँकड़े
असम सरकार के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, 29 अप्रैल से 21 जुलाई के बीच राज्य के 25 जिलों में 7.27 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 95 राहत शिविरों में 18,574 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है। बढ़ते जलस्तर के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा है।
राहत और बचाव अभियान राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), सेना, असम पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से संयुक्त रूप से चलाया जा रहा है।
कांग्रेस की माँगें
गोगोई ने राज्य सरकार से माँग की कि बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। साथ ही राहत सामग्री, सुरक्षित आश्रय, स्वास्थ्य सेवाएँ और पुनर्वास सुविधाएँ बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराई जाएँ। उन्होंने बिजली, पेयजल और सड़क जैसी आवश्यक सेवाओं की बहाली में तेजी लाने की भी अपील की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस बाढ़ प्रभावित लोगों के हितों से जुड़े मुद्दों को हर उचित मंच पर उठाती रहेगी।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले चार दिनों तक असम के अलग-अलग हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना जताई है। इस चेतावनी के बाद संवेदनशील इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर होने की आशंका बढ़ गई है, जो पहले से ही संकट में घिरे लाखों परिवारों के लिए एक और चुनौती बन सकती है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब असम हर वर्ष मानसून के दौरान विनाशकारी बाढ़ से जूझता है और स्थायी समाधान की माँग वर्षों से उठती रही है। IMD की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन और राहत एजेंसियों पर दबाव और बढ़ने की संभावना है। गोगोई ने संकेत दिया कि वे इस मुद्दे को संसद में भी उठाएँगे।