मुंबई के कूपर अस्पताल में बुर्का पहने दो महिलाओं को मेटरनिटी वार्ड में रोकने का आरोप, नेताओं ने की कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के कूपर अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में 1 सितंबर 2026 को कथित तौर पर बुर्का पहनने के कारण दो महिलाओं को प्रवेश से रोके जाने का मामला सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। यह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित अस्पताल है और घटना के वायरल वीडियो के बाद कई दलों के नेताओं ने इसकी आलोचना की है।
महिलाओं का आरोप: क्या हुआ मेटरनिटी वार्ड के बाहर
अधिवक्ता जहांआरा ने बताया कि उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को अपना परिचय दिया, फिर भी उन्हें रोका गया। उनके अनुसार, सुरक्षाकर्मियों ने कहा, 'आप कोई भी हों, हम आपको बुर्का पहनकर अंदर नहीं जाने देंगे।' जब उन्होंने कारण पूछा तो जवाब मिला कि 'बुर्का पहनकर आने वाले लोग बच्चों को चुरा लेते हैं।'
दूसरी अधिवक्ता जहरा शेख ने मंगलवार को पुष्टि की कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो वास्तविक हैं। उन्होंने बताया, 'मैं अंधेरी स्थित कूपर अस्पताल में एक रिश्तेदार से मिलने गई थी। मेटरनिटी वार्ड के बाहर सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि अंदर जाने से पहले बुर्का उतारना होगा। जब मैंने कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा कारणों से है।'
राजनीतिक प्रतिक्रिया: विभिन्न दलों ने उठाई आवाज़
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की प्रवक्ता विद्या चव्हाण ने कहा, 'अगर उनका धर्म उन्हें बुर्का पहनने की अनुमति देता है, तो किसी चौकीदार को यह पूछने का अधिकार नहीं कि वे बुर्का क्यों पहन रही हैं। भारतीय संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है।' उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के साथ इस तरह के व्यवहार को 'सर्वथा गलत' बताया।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, 'इस तरह का व्यवहार देश के लिए नुकसानदायक है।' उन्होंने बुर्का पहनने के कारण महिला को रोकने वाले कांस्टेबल के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की और सुझाया कि बीएमसी को अपने संसाधनों से अधिक संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए।
कांग्रेस नेता चरण सिंह सप्रा ने इस घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। वहीं शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है, लेकिन अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना भी नगर निगम की जिम्मेदारी है।
मेयर की प्रतिक्रिया और जाँच का आश्वासन
मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने मामले को 'पूरी तरह गलत' करार दिया और कहा कि वह इसे व्यक्तिगत रूप से देखेंगी। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'यह बुनियादी मानवता का मामला है। अस्पताल किसी व्यक्ति को उसके धर्म — चाहे वह मुस्लिम हो, हिंदू हो या किसी अन्य धर्म का — के आधार पर आंकने की जगह नहीं है।' मेयर ने स्पष्ट किया कि यदि किसी बीएमसी कर्मचारी की संलिप्तता सिद्ध होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
व्यापक संदर्भ: अस्पताल सुरक्षा बनाम धार्मिक अधिकार
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक पोशाक को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि बीएमसी के अस्पतालों में शिशु-अपहरण की घटनाओं को देखते हुए मेटरनिटी वार्ड में सुरक्षा उपाय कड़े किए गए हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि पोशाक के आधार पर प्रवेश रोकना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आगे क्या होगा
मेयर ऋतु तावड़े के जाँच के आश्वासन के बाद बीएमसी से अगले कुछ दिनों में औपचारिक कार्रवाई की उम्मीद है। वारिस पठान और अन्य नेताओं ने दोषी सुरक्षाकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग दोहराई है। यह देखना होगा कि बीएमसी सुरक्षा प्रोटोकॉल और नागरिकों के धार्मिक अधिकारों के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करती है।