2 सितंबर 2026
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मुंबई के कूपर अस्पताल में बुर्का पहने दो महिलाओं को मेटरनिटी वार्ड में रोकने का आरोप, नेताओं ने की कड़ी निंदा

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मुंबई के कूपर अस्पताल में बुर्का पहने दो महिलाओं को मेटरनिटी वार्ड में रोकने का आरोप, नेताओं ने की कड़ी निंदा

सारांश

मुंबई के कूपर अस्पताल में बुर्का पहने दो महिला अधिवक्ताओं को मेटरनिटी वार्ड में प्रवेश से रोकने का आरोप — एक ने दावा किया कि सुरक्षाकर्मी ने 'बच्चा चोरी' का हवाला दिया। मेयर ने मामले को 'पूरी तरह गलत' बताया और जाँच का आश्वासन दिया; कई दलों ने कार्रवाई की माँग की।

मुख्य बातें

कूपर अस्पताल, मुंबई के मेटरनिटी वार्ड में 1 सितंबर 2026 को बुर्का पहने दो महिला अधिवक्ताओं को कथित तौर पर प्रवेश से रोका गया।
अधिवक्ता जहांआरा के अनुसार सुरक्षाकर्मी ने कहा कि 'बुर्का पहनकर आने वाले बच्चों को चुरा लेते हैं।' मुंबई मेयर ऋतु तावड़े ने घटना को 'पूरी तरह गलत' बताया और बीएमसी कर्मचारी की संलिप्तता पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
एनसीपी (शरद पवार) , कांग्रेस , एआईएमआईएम और शिवसेना सहित कई दलों के नेताओं ने घटना की निंदा की।
वारिस पठान ने दोषी कांस्टेबल के विरुद्ध कार्रवाई और अधिक सीसीटीवी लगाने की माँग की।

मुंबई के कूपर अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में 1 सितंबर 2026 को कथित तौर पर बुर्का पहनने के कारण दो महिलाओं को प्रवेश से रोके जाने का मामला सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। यह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित अस्पताल है और घटना के वायरल वीडियो के बाद कई दलों के नेताओं ने इसकी आलोचना की है।

महिलाओं का आरोप: क्या हुआ मेटरनिटी वार्ड के बाहर

अधिवक्ता जहांआरा ने बताया कि उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को अपना परिचय दिया, फिर भी उन्हें रोका गया। उनके अनुसार, सुरक्षाकर्मियों ने कहा, 'आप कोई भी हों, हम आपको बुर्का पहनकर अंदर नहीं जाने देंगे।' जब उन्होंने कारण पूछा तो जवाब मिला कि 'बुर्का पहनकर आने वाले लोग बच्चों को चुरा लेते हैं।'

दूसरी अधिवक्ता जहरा शेख ने मंगलवार को पुष्टि की कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो वास्तविक हैं। उन्होंने बताया, 'मैं अंधेरी स्थित कूपर अस्पताल में एक रिश्तेदार से मिलने गई थी। मेटरनिटी वार्ड के बाहर सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि अंदर जाने से पहले बुर्का उतारना होगा। जब मैंने कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा कारणों से है।'

राजनीतिक प्रतिक्रिया: विभिन्न दलों ने उठाई आवाज़

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की प्रवक्ता विद्या चव्हाण ने कहा, 'अगर उनका धर्म उन्हें बुर्का पहनने की अनुमति देता है, तो किसी चौकीदार को यह पूछने का अधिकार नहीं कि वे बुर्का क्यों पहन रही हैं। भारतीय संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है।' उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के साथ इस तरह के व्यवहार को 'सर्वथा गलत' बताया।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, 'इस तरह का व्यवहार देश के लिए नुकसानदायक है।' उन्होंने बुर्का पहनने के कारण महिला को रोकने वाले कांस्टेबल के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की और सुझाया कि बीएमसी को अपने संसाधनों से अधिक संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए।

कांग्रेस नेता चरण सिंह सप्रा ने इस घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। वहीं शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है, लेकिन अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना भी नगर निगम की जिम्मेदारी है।

मेयर की प्रतिक्रिया और जाँच का आश्वासन

मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने मामले को 'पूरी तरह गलत' करार दिया और कहा कि वह इसे व्यक्तिगत रूप से देखेंगी। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'यह बुनियादी मानवता का मामला है। अस्पताल किसी व्यक्ति को उसके धर्म — चाहे वह मुस्लिम हो, हिंदू हो या किसी अन्य धर्म का — के आधार पर आंकने की जगह नहीं है।' मेयर ने स्पष्ट किया कि यदि किसी बीएमसी कर्मचारी की संलिप्तता सिद्ध होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

व्यापक संदर्भ: अस्पताल सुरक्षा बनाम धार्मिक अधिकार

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक पोशाक को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि बीएमसी के अस्पतालों में शिशु-अपहरण की घटनाओं को देखते हुए मेटरनिटी वार्ड में सुरक्षा उपाय कड़े किए गए हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि पोशाक के आधार पर प्रवेश रोकना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

आगे क्या होगा

मेयर ऋतु तावड़े के जाँच के आश्वासन के बाद बीएमसी से अगले कुछ दिनों में औपचारिक कार्रवाई की उम्मीद है। वारिस पठान और अन्य नेताओं ने दोषी सुरक्षाकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग दोहराई है। यह देखना होगा कि बीएमसी सुरक्षा प्रोटोकॉल और नागरिकों के धार्मिक अधिकारों के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पोशाक के आधार पर प्रवेश रोकना न तो कानूनी है और न ही प्रभावी सुरक्षा उपाय — यह भेदभाव है। मुख्यधारा की कवरेज जो अनदेखा करती है वह यह है कि दोनों महिलाएँ अधिवक्ता थीं जिन्होंने अपना परिचय दिया, फिर भी उन्हें रोका गया — यह प्रशिक्षण की कमी नहीं, नीतिगत अस्पष्टता की समस्या है। बीएमसी को सीसीटीवी और पहचान-आधारित प्रवेश जैसे तकनीकी समाधानों की ओर बढ़ना होगा, न कि पोशाक-आधारित प्रतिबंध की ओर।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई के कूपर अस्पताल में बुर्का विवाद क्या है?
1 सितंबर 2026 को कूपर अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में बुर्का पहने दो महिला अधिवक्ताओं को कथित तौर पर प्रवेश से रोका गया। सुरक्षाकर्मियों ने 'बच्चा चोरी' और 'सुरक्षा कारणों' का हवाला दिया, जिसके बाद वीडियो वायरल होने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
मुंबई मेयर ऋतु तावड़े ने इस मामले पर क्या कहा?
मेयर ऋतु तावड़े ने घटना को 'पूरी तरह गलत' और 'बुनियादी मानवता का मामला' बताया। उन्होंने कहा कि अस्पताल किसी को उसके धर्म के आधार पर आंकने की जगह नहीं है और बीएमसी कर्मचारी की संलिप्तता सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
किन राजनीतिक दलों ने इस घटना की निंदा की?
एनसीपी (शरद पवार गुट), कांग्रेस, एआईएमआईएम और शिवसेना सहित कई दलों के नेताओं ने इस घटना की आलोचना की। एआईएमआईएम के वारिस पठान ने दोषी कांस्टेबल के विरुद्ध कार्रवाई और अधिक सीसीटीवी लगाने की माँग की।
क्या यह कूपर अस्पताल की आधिकारिक नीति है?
अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। बीएमसी के मेटरनिटी वार्डों में शिशु-सुरक्षा के मद्देनज़र सुरक्षा उपाय कड़े किए गए हैं, लेकिन पोशाक के आधार पर प्रवेश रोकने की कोई आधिकारिक नीति की पुष्टि नहीं हुई है।
इस घटना में आगे क्या कार्रवाई होने की उम्मीद है?
मेयर ऋतु तावड़े के जाँच के आश्वासन के बाद बीएमसी से अगले कुछ दिनों में औपचारिक कार्रवाई की उम्मीद है। नेताओं ने दोषी सुरक्षाकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई और सीसीटीवी जैसे तकनीकी सुरक्षा उपायों की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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