30 अगस्त 2026
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बिहार बाढ़: कोसी-गंडक का डिस्चार्ज फिर बढ़ा, गंगा पटना में खतरे के निशान से ऊपर

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बिहार बाढ़: कोसी-गंडक का डिस्चार्ज फिर बढ़ा, गंगा पटना में खतरे के निशान से ऊपर

सारांश

बिहार में कोसी और गंडक के बैराजों से डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज रविवार दोपहर फिर बढ़ा — वाल्मीकिनगर पर गंडक 12 घंटे में 99,800 से 1,50,200 क्यूसेक तक पहुँची। पटना के कई घाटों पर गंगा खतरे के निशान से ऊपर है, और इंडो-नेपाल सीमा पर 134 मिमी बारिश ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

मुख्य बातें

वीरपुर बैराज पर कोसी का डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज रविवार दोपहर 2 बजे 1,57,080 क्यूसेक दर्ज किया गया।
वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक का डिस्चार्ज 12 घंटे में 99,800 से 1,50,200 क्यूसेक तक उछला।
पटना के गांधीघाट में गंगा खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर ऊपर; हाथीदह में 51 सेंटीमीटर ऊपर।
कहलगांव (भागलपुर) में गंगा खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र में पिछले 24 घंटे में 134 मिलीमीटर वर्षापात दर्ज।
IMD के अनुसार 31 अगस्त तक कोसी और बागमती जलग्रहण क्षेत्रों में और बारिश की संभावना।

बिहार में 30 अगस्त को गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, घाघरा और बागमती नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी रहा, और कई स्थानों पर नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बहती रहीं। केंद्रीय जल आयोग के आँकड़ों के अनुसार, कोसी और गंडक नदियों के बैराजों से डाउनस्ट्रीम छोड़े जा रहे पानी में रविवार दोपहर तक उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे नदी किनारे के इलाकों में बाढ़ का दबाव बना हुआ है।

कोसी और गंडक बैराज का ताज़ा डिस्चार्ज

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, वीरपुर बैराज पर कोसी नदी का डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज रविवार दोपहर 2 बजे 1,57,080 क्यूसेक दर्ज किया गया और बहाव बढ़ने की प्रवृत्ति बनी हुई थी। इससे पहले रविवार सुबह 10 बजे यह 1,48,660 क्यूसेक था, जबकि शनिवार रात 10 बजे 1,64,730 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया था।

वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक नदी का डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज रविवार दोपहर 2 बजे 1,50,200 क्यूसेक तक पहुँच गया — जो रविवार सुबह 10 बजे के 1,31,500 क्यूसेक और शनिवार रात 10 बजे के 99,800 क्यूसेक की तुलना में तेज़ उछाल दर्शाता है। गौरतलब है कि यह वृद्धि इंडो-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में हुई भारी वर्षा के बाद आई है।

पटना और भागलपुर में गंगा का जलस्तर

पटना जिले के गांधीघाट में गंगा का जलस्तर रविवार सुबह 6 बजे खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर ऊपर था, हालाँकि सोमवार सुबह 8 बजे तक 14 सेंटीमीटर की कमी का अनुमान जताया गया। हाथीदह में गंगा खतरे के निशान से 51 सेंटीमीटर ऊपर रही, जहाँ अगले 24 घंटे में 15 सेंटीमीटर घटने की संभावना है।

पटना के दीघाघाट में गंगा खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर नीचे रही, जबकि श्रीपालपुर में यह 80 सेंटीमीटर नीचे था — लेकिन सोमवार सुबह तक 90 सेंटीमीटर की वृद्धि का पूर्वानुमान है। मनेर में सोन नदी खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर नीचे दर्ज की गई।

भागलपुर जिले के कहलगांव में गंगा खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। भागलपुर शहर में यह खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर और मुंगेर में 60 सेंटीमीटर नीचे रही।

उत्तर बिहार में नदियों का दबाव

उत्तर बिहार में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक नदी खतरे के निशान से 33 सेंटीमीटर ऊपर है। खगड़िया में बूढ़ी गंडक 51 सेंटीमीटर और बलतारा में कोसी 65 सेंटीमीटर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

कटिहार के कुरसेला में कोसी का जलस्तर खतरे के निशान से 59 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। सुपौल के बसुआ में कोसी खतरे के निशान से 86 सेंटीमीटर नीचे है और रविवार रात तक 11 सेंटीमीटर और घटने का अनुमान है। सिवान के दरौली में घाघरा 32 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन सोमवार सुबह तक 10 सेंटीमीटर वृद्धि की आशंका है। मुजफ्फरपुर के बेनीबाद में बागमती खतरे के निशान से 48 सेंटीमीटर नीचे रही।

भारी वर्षा और मौसम पूर्वानुमान

पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई। इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र में 134 मिलीमीटर, निर्मली में 82 मिलीमीटर, कुरसेला में 57 मिलीमीटर और खगड़िया में 50.4 मिलीमीटर वर्षापात रिकॉर्ड किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब नदियाँ पहले से ही उफान पर हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, 31 अगस्त तक कोसी, बागमती-अधवारा और सोन के जलग्रहण क्षेत्रों में हल्की बारिश तथा राज्य के अन्य जलग्रहण क्षेत्रों में हल्की से साधारण बारिश होने की संभावना है। आने वाले दिनों में जलस्तर की निगरानी और तटवर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखना ज़रूरी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जलस्तर उफनता है, और तटवर्ती आबादी फिर विस्थापन के कगार पर आ जाती है। वाल्मीकिनगर पर गंडक का 12 घंटे में 50,000 क्यूसेक से अधिक की उछाल यह दर्शाती है कि नेपाल में होने वाली वर्षा का प्रभाव कितनी तेज़ी से बिहार के मैदानों तक पहुँचता है — और दोनों देशों के बीच रियल-टाइम डेटा साझाकरण की ज़रूरत कितनी अहम है। सवाल यह है कि आँकड़े उपलब्ध होने के बावजूद निचले इलाकों की आबादी को समय पर चेतावनी और राहत क्यों नहीं मिल पाती।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में कोसी और गंडक नदियों का डिस्चार्ज अभी कितना है?
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, रविवार दोपहर 2 बजे वीरपुर बैराज पर कोसी का डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज 1,57,080 क्यूसेक और वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक का डिस्चार्ज 1,50,200 क्यूसेक दर्ज किया गया। दोनों नदियों का बहाव उस समय बढ़ रहा था।
पटना में गंगा नदी खतरे के निशान से कितनी ऊपर है?
रविवार सुबह 6 बजे पटना के गांधीघाट में गंगा खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर और हाथीदह में 51 सेंटीमीटर ऊपर थी। सोमवार सुबह तक दोनों स्थानों पर क्रमशः 14 और 15 सेंटीमीटर की कमी का अनुमान है।
उत्तर बिहार में कौन-सी नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर हैं?
उत्तर बिहार में गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक (33 सेंटीमीटर ऊपर), खगड़िया में बूढ़ी गंडक (51 सेंटीमीटर ऊपर), बलतारा में कोसी (65 सेंटीमीटर ऊपर) और कुरसेला में कोसी (59 सेंटीमीटर ऊपर) खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
बिहार में बाढ़ की स्थिति के लिए मौसम पूर्वानुमान क्या है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 31 अगस्त तक कोसी, बागमती-अधवारा और सोन के जलग्रहण क्षेत्रों में हल्की बारिश जारी रहने की संभावना है। इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र में पिछले 24 घंटे में 134 मिलीमीटर वर्षापात हो चुका है, जिससे नदियों के जलस्तर पर दबाव बना रहेगा।
बिहार में बाढ़ की निगरानी कौन करता है?
केंद्रीय जल आयोग (CWC) बिहार की प्रमुख नदियों के जलस्तर और बैराज डिस्चार्ज की निगरानी करता है और नियमित आँकड़े जारी करता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) जलग्रहण क्षेत्रों के लिए वर्षा पूर्वानुमान प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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