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अक्षता मिनरल्स मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की ₹3.31 करोड़ की यूनिट्स जब्त कीं

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अक्षता मिनरल्स मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की ₹3.31 करोड़ की यूनिट्स जब्त कीं

सारांश

ईडी बेंगलुरु ने लौह अयस्क कारोबारी कंपनी अक्षता मिनरल्स के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की ₹3.31 करोड़ की यूनिट्स जब्त की हैं। बैंक धोखाधड़ी से उपजी ₹1 करोड़ की रकम निवेश के जरिए तीन गुना से अधिक हो गई — और अब वह कानून की पकड़ में है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1 सितंबर 2026 को अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड मामले में पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया।
एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स जब्त, मौजूदा बाजार मूल्य लगभग ₹3.31 करोड़ ।
कंपनी ने बैंक ऑफ इंडिया से ₹6 करोड़ की क्रेडिट सुविधा के लिए कथित तौर पर जाली दस्तावेज जमा किए; जयामहल, बेंगलुरु की एक संपत्ति के बदले ₹3 करोड़ जारी हुए थे।
अपराध से अर्जित ₹1 करोड़ की रकम 13 फरवरी 2010 को कैथोलिक डायोसिस ऑफ बेल्लारी ट्रस्ट को ट्रांसफर की गई, फिर म्यूचुअल फंड में निवेश।
ईडी ने 28 मार्च 2026 को बेंगलुरु की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की थी; जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बेंगलुरु ने अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी करते हुए एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स को जब्त किया है, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग ₹3.31 करोड़ है। यह कार्रवाई 1 सितंबर 2026 को की गई और यह लौह अयस्क कारोबार से जुड़ी कथित धोखाधड़ी की लंबी जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), विशेष अपराध शाखा (एससीबी), बेंगलुरु द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। उक्त एफआईआर अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और जाली दस्तावेजों के उपयोग के आरोपों पर आधारित थी।

गौरतलब है कि अक्षता मिनरल्स आयरन ओर (लौह अयस्क) की ट्रेडिंग और निर्यात करने वाली कंपनी है। जांच में सामने आया कि कंपनी ने बैंक ऑफ इंडिया से ₹6 करोड़ की क्रेडिट सुविधा प्राप्त करने के लिए छह संपत्तियों को इक्विटेबल मॉर्गेज (गिरवी) रखा था।

जाली दस्तावेजों से बैंक को धोखा

इन गिरवी रखी गई संपत्तियों में से एक, जो बेंगलुरु के जयामहल इलाके में स्थित है, के बारे में बैंक को कथित तौर पर गलत जानकारी दी गई — यह दावा किया गया कि वह संपत्ति स्वर्गीय लक्ष्मम्मा की है। मॉर्गेज बनाने के लिए बैंक को कथित तौर पर जाली खाता रिकॉर्ड, टैक्स-भुगतान रसीदें, बेटरमेंट चार्ज रसीदें और अन्य राजस्व दस्तावेज जमा किए गए थे। इस संपत्ति के एवज में बैंक ऑफ इंडिया ने ₹3 करोड़ जारी किए थे।

अपराध की कमाई का मनी ट्रेल

जांच में यह भी उजागर हुआ कि अपराध से अर्जित ₹1 करोड़ की रकम 13 फरवरी 2010 को अक्षता मिनरल्स के बैंक खाते से कैथोलिक डायोसिस ऑफ बेल्लारी ट्रस्ट को स्थानांतरित की गई थी। बाद में इस रकम को अलग-अलग एचडीएफसी म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश और पुनर्निवेश किया गया।

मनी ट्रेल विश्लेषण से पता चला कि अपराध से जुड़ी मूल रकम, लगातार किए गए निवेश के जरिए अंततः एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स के रूप में पहचानी गई। यह रकम मूल ₹1 करोड़ से बढ़कर आज लगभग ₹3.31 करोड़ हो चुकी है — यह वृद्धि अपराध से हुई कमाई का प्रत्यक्ष लाभ मानी जा रही है।

अभियोजन और आगे की जांच

ईडी ने इससे पहले 28 मार्च 2026 को बेंगलुरु की विशेष अदालत में इस मामले में अभियोजन शिकायत दायर की थी। एजेंसी के अनुसार इस मामले से संबंधित जांच अभी भी जारी है और आने वाले समय में और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि 2010 के लेन-देन की पहचान में इतने वर्ष क्यों लगे। विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत पहले ही दायर हो चुकी है, अब परीक्षण यह होगा कि न्यायिक प्रक्रिया कितनी तेज और पारदर्शी रहती है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्षता मिनरल्स मनी लॉन्ड्रिंग मामला क्या है?
यह मामला लौह अयस्क की ट्रेडिंग और निर्यात करने वाली कंपनी अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ है, जिस पर बैंक ऑफ इंडिया से ₹6 करोड़ की क्रेडिट सुविधा लेने के लिए जाली दस्तावेज जमा करने का आरोप है। सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की और अब ₹3.31 करोड़ की म्यूचुअल फंड यूनिट्स जब्त की हैं।
ईडी ने किन संपत्तियों को जब्त किया है?
ईडी ने एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत जब्त किया है, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग ₹3.31 करोड़ है। ये यूनिट्स अपराध से अर्जित ₹1 करोड़ की रकम के पुनर्निवेश का परिणाम हैं।
कैथोलिक डायोसिस ऑफ बेल्लारी ट्रस्ट का इस मामले से क्या संबंध है?
जांच के अनुसार, 13 फरवरी 2010 को अक्षता मिनरल्स के बैंक खाते से ₹1 करोड़ की रकम कैथोलिक डायोसिस ऑफ बेल्लारी ट्रस्ट को ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद इस रकम को विभिन्न एचडीएफसी म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश और पुनर्निवेश किया गया।
इस मामले में अदालती कार्यवाही कहाँ तक पहुँची है?
ईडी ने 28 मार्च 2026 को बेंगलुरु की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दायर कर दी है। मामले की आगे की जांच अभी भी जारी है और एजेंसी ने और कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर क्या होता है?
पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत ईडी को यह अधिकार है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर सके, ताकि जांच के दौरान उन्हें स्थानांतरित या नष्ट न किया जा सके। यह एक प्रारंभिक कदम है जिसके बाद विशेष अदालत की मंजूरी से स्थायी जब्ती की जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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