बिहार बाढ़: गंगा-पुनपुन खतरे के निशान से मीटरों ऊपर, पटना समेत 8 जिलों में हाई अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में 4 सितंबर 2026 को बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई, जब गंगा, गंडक, पुनपुन और दरधा सहित राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरनाक गति से बढ़ता रहा और नए इलाके जलमग्न होते गए। जल संसाधन विभाग के अनुसार, पटना के गांधी घाट और मोकामा के हथीडा में गंगा के शुक्रवार रात तक अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) को पार करने की आशंका जताई गई है।
किन जिलों में जारी हुआ अलर्ट
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद के नदी तटीय व निचले इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने और एहतियाती उपाय अपनाने का निर्देश दिया है। यह अलर्ट ऐसे समय में जारी हुआ है जब राज्य के दर्जनों गाँवों का मुख्य सड़क नेटवर्क से संपर्क पहले ही टूट चुका है।
दीघा में गंगा खतरे के निशान से 1.17 मीटर ऊपर, गांधी घाट में 1.67 मीटर ऊपर और हथीडा में 1.32 मीटर ऊपर बह रही थी। श्रीपालपुर में पुनपुन नदी खतरे के निशान से 2.29 मीटर ऊपर और कोलहाचक में दरधा नदी 3.07 मीटर ऊपर दर्ज की गई — जो इस मौसम के सबसे ऊँचे स्तरों में से एक है।
भागलपुर, खगड़िया और मुंगेर में हालात
भागलपुर में पिछले 24 घंटों में गंगा का जलस्तर 15 सेंटीमीटर बढ़ा, जिससे नाथनगर, नौगछिया और पीरपैंती के दियारा क्षेत्रों में बाढ़ का पानी फिर से घुस गया। खड़ी फसलों और चारे सहित बड़े पैमाने पर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है।
खगड़िया में गंगा खतरे के निशान से 1.01 मीटर ऊपर है, और कोसी, बागमती व बूढ़ी गंडक नदियाँ भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं। मुंगेर में गंगा का जलस्तर 24 घंटों में 36 सेंटीमीटर बढ़ा है।
आम जनता पर असर
मधेपुरा जिले के आलम नगर और चौसा ब्लॉक में बाढ़ से लगभग एक लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने बचाव और राहत कार्यों के लिए 35 नौकाएँ तैनात की हैं। वैशाली जिले के राघोपुर ब्लॉक की सभी पंचायतें प्रभावित हैं, जिनमें से लगभग 20 पंचायतों का मुख्य सड़क नेटवर्क से संपर्क टूट गया है।
समस्तीपुर के करीब दो दर्जन गाँव जलमग्न हैं और कई ग्रामीण सड़कें बंद हैं। पटना में कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन वाले पुल पर यातायात बाधित है। पश्चिम चंपारण में योगपत्ती-छोटा चौमुख-सिसवा मंगलपुर सड़क पर पानी दो से तीन फीट ऊपर तक बह रहा है।
बुनियादी ढाँचे को नुकसान
राघोपुर में रेलवे लाइन के किनारे बना तटबंध लगभग पूरी तरह कट गया है और गंगा का मुख्य प्रवाह पटरियों के खतरनाक रूप से करीब खिसक आया है, जिससे दो से तीन किलोमीटर के दायरे में गंभीर भू-क्षरण और भूमि धंसने की घटनाएँ सामने आई हैं। बांका जिले में बरसंदा गाँव के पास निर्माणाधीन पुल की वैकल्पिक सड़क मिर्चनी नदी की तेज धारा में बह गई। सहरसा के कई गाँव भी जलमग्न हो गए हैं।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि बिहार में हर वर्ष मानसून के दौरान इसी पैटर्न की बाढ़ आती है, लेकिन इस बार एक साथ इतनी नदियों का एचएफएल के करीब पहुँचना स्थिति को असाधारण बना रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले 48 से 72 घंटे निर्णायक होंगे, क्योंकि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में वर्षा जारी रहने से नदियों के जलस्तर में और वृद्धि संभव है। राहत कार्यों की प्रभावशीलता काफी हद तक सड़क संपर्क बहाल होने पर निर्भर करेगी।