पटना में गंगा 2016 का उच्चतम बाढ़ स्तर पार, संजय झा बोले — 10 साल के काम से राजधानी सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
पटना में गंगा नदी का जलस्तर 3 सितंबर 2026 की सुबह 2016 में दर्ज अब तक के उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) को पार कर गया — फिर भी राजधानी में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि पिछले दस वर्षों में राज्य सरकार द्वारा कराए गए बाढ़ प्रबंधन और तट सुरक्षा कार्यों का असर आज स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
झा ने बताया कि उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ गुरुवार को पटना में गंगा के किनारे विभिन्न स्थानों का स्थल निरीक्षण किया। दोनों नेताओं ने राघोपुर पुल से दीघा घाट तक और जेपी सेतु से गंगा के दूसरे छोर तक बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद अधिकारियों से जानकारी ली गई और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
नेपाल की आपदा और बिहार पर असर
झा ने कहा कि नेपाल में हाल के दिनों में आई प्राकृतिक आपदा बेहद गंभीर है और इस तरह की त्रासदी लंबे अंतराल में देखने को मिलती है। बिहार की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि नेपाल में होने वाली भारी बारिश और प्राकृतिक घटनाओं का सीधा असर यहाँ की नदियों पर पड़ता है। उन्होंने कहा, गंडक सहित कई नदियों में इस बार बड़ी मात्रा में पानी आया है और बाढ़ का पानी किसी सीमा को नहीं मानता।
सरकार की प्रतिक्रिया और राहत प्रबंधन
झा के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के नेतृत्व में प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने राहत एवं बचाव कार्यों का बेहतर प्रबंधन किया है। उन्होंने कहा कि इसी तत्परता के कारण बिहार में अब तक कोई बड़ा अप्रत्याशित संकट नहीं पैदा हुआ है।
प्रभावित क्षेत्र और चुनौतियाँ
हालांकि, झा ने स्वीकार किया कि कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से लोगों को परेशानी हुई है और कुछ स्थानों पर कटाव की स्थिति भी बनी है। पुनपुन नदी का पानी एक स्थान पर सड़क के ऊपर से बह गया है, जिसकी मरम्मत पानी घटने के बाद कराई जाएगी। भागलपुर के कुछ इलाकों में भी पानी फैलने और कटाव की समस्या सामने आई है, जिन पर सरकार लगातार निगरानी रख रही है।
आगे की स्थिति
नीतीश कुमार स्वयं पटना और आसपास के इलाकों का जायजा ले रहे हैं तथा प्रशासन से लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में मानसून अपने चरम पर है और नेपाल से आने वाला अतिरिक्त जल प्रवाह नदियों पर दबाव बढ़ा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और सभी प्रभावित क्षेत्रों पर पैनी नजर रखी जा रही है।