बिहार बाढ़ 2026: अंतिम चरण में मौसम, विजय चौधरी बोले — गाद प्रबंधन और हाई-लेवल डैम ही स्थायी समाधान
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 6 अक्टूबर 2026 को पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता में घोषणा की कि राज्य इस वर्ष के बाढ़ के मौसम के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है और नेपाल में होने वाली किसी भी अतिरिक्त बारिश से स्थिति फिर बिगड़ सकती है, इसलिए विभाग पूरी तरह सतर्क बना हुआ है।
इस वर्ष की बाढ़ का स्वरूप
चौधरी ने बताया कि इस वर्ष गंगा में अप्रत्याशित जलस्राव के कारण भागलपुर सहित अनेक इलाकों में गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई। इसके बाद नेपाल में हुई अप्रत्याशित बारिश से गंडक नदी का जलस्राव ऑल-टाइम रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गया। गांधी घाट, पटना से लेकर भागलपुर तक कई स्थानों पर गंगा में नया उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) दर्ज किया गया।
गंडक में 10 से 12 दिनों तक लगातार दबाव बना रहा, जिसका असर पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में देखा गया। इस अवधि में 5 से 6 स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए। विभागीय अधिकारियों ने दिन-रात काम कर शेष तटबंधों को बचाया।
बैकवाटर दबाव और तटबंधों पर खतरा
चौधरी ने तकनीकी पहलुओं की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है, तो गंडक, कोसी, घाघरा, कमला और महानंदा जैसी नदियों का पानी गंगा में समाहित होने में बाधा आती है। इससे बैकवाटर प्रेशर बढ़ जाता है और लंबे समय तक जलस्तर ऊँचा बने रहने पर ढीली मिट्टी में 'पाइपिंग' की स्थिति बनती है, जो तटबंधों पर अचानक अत्यधिक दबाव डाल सकती है।
उन्होंने कहा कि विभागीय समीक्षा में कुछ अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है और उन पर कार्रवाई की जा चुकी है। चौधरी ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन में सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गाद प्रबंधन और फरक्का संधि
जल संसाधन मंत्री ने गाद (सिल्टेशन) को बिहार की नदियों की प्रमुख और दीर्घकालिक समस्या बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 2011 से ही केंद्र सरकार के समक्ष गाद प्रबंधन का मुद्दा उठाती रही है। 2012-13 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई बैठक में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह मुद्दा उठाया गया था। अब इस दिशा में एक नीतिगत ढाँचा तैयार हुआ है और राज्यों से सुझाव माँगे जा रहे हैं।
1996 की फरक्का संधि का उल्लेख करते हुए चौधरी ने कहा कि उस समझौते में बिहार के हितों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया था। संधि के नवीनीकरण की चर्चा के बीच बिहार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संजय झा के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर के समक्ष अपना पक्ष रखा है। दोनों मंत्रियों ने बिहार के हितों का ध्यान रखने का आश्वासन दिया है।
नेपाल में हाई-लेवल डैम — स्थायी समाधान की राह
चौधरी ने कहा कि बिहार को बाढ़ग्रस्त करने वाली अधिकांश प्रमुख नदियों का उद्गम नेपाल में है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार इन नदियों पर हाई-लेवल डैम निर्माण ही बाढ़ का स्थायी और दीर्घकालिक समाधान है। उन्होंने बताया कि भारत और बिहार सरकार ने इस दिशा में पहल की है, परंतु नेपाल से अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण ये योजनाएँ अभी तक आगे नहीं बढ़ पाई हैं।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण नेपाल में अनियमित और अत्यधिक वर्षा की घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे उत्तर बिहार की नदियाँ और अधिक अप्रत्याशित हो गई हैं। बिना द्विपक्षीय जल-प्रबंधन सहयोग के तटबंधों पर निर्भरता बनी रहेगी।
अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद पर प्रतिक्रिया
प्रेस वार्ता में उप मुख्यमंत्री चौधरी ने अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहे विवाद के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की सुलह की पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ललन सिंह ने इस मामले में जो भी बातें कही हैं, पार्टी उनका संज्ञान ले रही है और विवाद से जुड़े दूसरे पहलुओं पर भी पार्टी स्तर पर विचार जारी है।
आने वाले हफ्तों में नेपाल के साथ जल-साझेदारी वार्ता और गाद प्रबंधन नीति की दिशा पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया बिहार के दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन की तस्वीर तय करेगी।