6 अक्टूबर 2026
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बिहार बाढ़ 2026: अंतिम चरण में मौसम, विजय चौधरी बोले — गाद प्रबंधन और हाई-लेवल डैम ही स्थायी समाधान

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बिहार बाढ़ 2026: अंतिम चरण में मौसम, विजय चौधरी बोले — गाद प्रबंधन और हाई-लेवल डैम ही स्थायी समाधान

सारांश

बिहार में इस वर्ष गंडक नदी में ऑल-टाइम रिकॉर्ड जलस्राव और गंगा में नए HFL के बाद बाढ़ का मौसम अंत की ओर है — लेकिन विजय चौधरी ने साफ कहा: जब तक गाद प्रबंधन नहीं होगा और नेपाल में हाई-लेवल डैम नहीं बनेंगे, यह संकट हर साल लौटता रहेगा।

मुख्य बातें

उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने 6 अक्टूबर 2026 को कहा कि बिहार बाढ़ के मौसम के अंतिम चरण में है, लेकिन कुछ स्थानों पर जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है।
गंडक नदी का जलस्राव इस वर्ष ऑल-टाइम रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा; 5-6 स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए।
गंगा में गांधी घाट, पटना से भागलपुर तक कई स्थानों पर नया उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) दर्ज हुआ।
विभागीय समीक्षा में कुछ अधिकारियों की लापरवाही पाई गई और उन पर कार्रवाई हुई; सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति लागू।
बिहार 2011 से गाद प्रबंधन का मुद्दा केंद्र के समक्ष उठाता रहा है; 1996 की फरक्का संधि के नवीनीकरण में बिहार के हित सुनिश्चित करने की माँग।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार नेपाल में हाई-लेवल डैम ही बाढ़ का स्थायी समाधान, परंतु नेपाल से सहयोग न मिलने से योजनाएँ अटकी हैं।

बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 6 अक्टूबर 2026 को पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता में घोषणा की कि राज्य इस वर्ष के बाढ़ के मौसम के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है और नेपाल में होने वाली किसी भी अतिरिक्त बारिश से स्थिति फिर बिगड़ सकती है, इसलिए विभाग पूरी तरह सतर्क बना हुआ है।

इस वर्ष की बाढ़ का स्वरूप

चौधरी ने बताया कि इस वर्ष गंगा में अप्रत्याशित जलस्राव के कारण भागलपुर सहित अनेक इलाकों में गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई। इसके बाद नेपाल में हुई अप्रत्याशित बारिश से गंडक नदी का जलस्राव ऑल-टाइम रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गया। गांधी घाट, पटना से लेकर भागलपुर तक कई स्थानों पर गंगा में नया उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) दर्ज किया गया।

गंडक में 10 से 12 दिनों तक लगातार दबाव बना रहा, जिसका असर पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में देखा गया। इस अवधि में 5 से 6 स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए। विभागीय अधिकारियों ने दिन-रात काम कर शेष तटबंधों को बचाया।

बैकवाटर दबाव और तटबंधों पर खतरा

चौधरी ने तकनीकी पहलुओं की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है, तो गंडक, कोसी, घाघरा, कमला और महानंदा जैसी नदियों का पानी गंगा में समाहित होने में बाधा आती है। इससे बैकवाटर प्रेशर बढ़ जाता है और लंबे समय तक जलस्तर ऊँचा बने रहने पर ढीली मिट्टी में 'पाइपिंग' की स्थिति बनती है, जो तटबंधों पर अचानक अत्यधिक दबाव डाल सकती है।

उन्होंने कहा कि विभागीय समीक्षा में कुछ अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है और उन पर कार्रवाई की जा चुकी है। चौधरी ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन में सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गाद प्रबंधन और फरक्का संधि

जल संसाधन मंत्री ने गाद (सिल्टेशन) को बिहार की नदियों की प्रमुख और दीर्घकालिक समस्या बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 2011 से ही केंद्र सरकार के समक्ष गाद प्रबंधन का मुद्दा उठाती रही है। 2012-13 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई बैठक में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह मुद्दा उठाया गया था। अब इस दिशा में एक नीतिगत ढाँचा तैयार हुआ है और राज्यों से सुझाव माँगे जा रहे हैं।

1996 की फरक्का संधि का उल्लेख करते हुए चौधरी ने कहा कि उस समझौते में बिहार के हितों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया था। संधि के नवीनीकरण की चर्चा के बीच बिहार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संजय झा के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर के समक्ष अपना पक्ष रखा है। दोनों मंत्रियों ने बिहार के हितों का ध्यान रखने का आश्वासन दिया है।

नेपाल में हाई-लेवल डैम — स्थायी समाधान की राह

चौधरी ने कहा कि बिहार को बाढ़ग्रस्त करने वाली अधिकांश प्रमुख नदियों का उद्गम नेपाल में है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार इन नदियों पर हाई-लेवल डैम निर्माण ही बाढ़ का स्थायी और दीर्घकालिक समाधान है। उन्होंने बताया कि भारत और बिहार सरकार ने इस दिशा में पहल की है, परंतु नेपाल से अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण ये योजनाएँ अभी तक आगे नहीं बढ़ पाई हैं।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण नेपाल में अनियमित और अत्यधिक वर्षा की घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे उत्तर बिहार की नदियाँ और अधिक अप्रत्याशित हो गई हैं। बिना द्विपक्षीय जल-प्रबंधन सहयोग के तटबंधों पर निर्भरता बनी रहेगी।

अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद पर प्रतिक्रिया

प्रेस वार्ता में उप मुख्यमंत्री चौधरी ने अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहे विवाद के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की सुलह की पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ललन सिंह ने इस मामले में जो भी बातें कही हैं, पार्टी उनका संज्ञान ले रही है और विवाद से जुड़े दूसरे पहलुओं पर भी पार्टी स्तर पर विचार जारी है।

आने वाले हफ्तों में नेपाल के साथ जल-साझेदारी वार्ता और गाद प्रबंधन नीति की दिशा पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया बिहार के दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन की तस्वीर तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक पुरानी विडंबना को भी उजागर करती है — बिहार 2011 से गाद प्रबंधन की बात कर रहा है और नेपाल में हाई-लेवल डैम का प्रस्ताव दशकों पुराना है, फिर भी हर साल बाढ़ उसी तीव्रता से आती है। तटबंधों पर निर्भरता एक अल्पकालिक रक्षा है जो बैकवाटर प्रेशर और पाइपिंग जैसी समस्याओं को हल नहीं करती। असली सवाल यह है कि नेपाल के साथ जल-कूटनीति में वास्तविक प्रगति कब होगी और केंद्र का गाद प्रबंधन ढाँचा कागज़ से ज़मीन पर कब उतरेगा — क्योंकि हर वर्ष 'स्थिति नियंत्रण में है' कहना समाधान नहीं है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में 2026 की बाढ़ की स्थिति अभी क्या है?
जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार बिहार बाढ़ के मौसम के अंतिम चरण में पहुँच चुका है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। हालाँकि कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है और नेपाल में अतिरिक्त बारिश होने पर स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
इस वर्ष गंडक नदी में क्या असाधारण हुआ?
नेपाल में अप्रत्याशित भारी बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्राव इस वर्ष ऑल-टाइम रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। गंडक में लगातार 10 से 12 दिनों तक दबाव बना रहा, जिससे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिले प्रभावित हुए और लगभग 5-6 स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए।
बिहार में बाढ़ का स्थायी समाधान क्या बताया गया है?
विजय चौधरी ने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार नेपाल में हाई-लेवल डैम का निर्माण और गाद प्रबंधन बिहार की बाढ़ के दो स्थायी समाधान हैं। भारत और बिहार सरकार ने इस दिशा में पहल की है, परंतु नेपाल का अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण डैम परियोजनाएँ आगे नहीं बढ़ पाई हैं।
फरक्का संधि और बिहार के हित कैसे जुड़े हैं?
चौधरी ने कहा कि 1996 में हुई फरक्का संधि में बिहार के हितों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया था। संधि के नवीनीकरण की चर्चा के बीच बिहार ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के समक्ष अपना पक्ष रखा है, जिन्होंने बिहार के हितों का ध्यान रखने का आश्वासन दिया है।
तटबंध क्षतिग्रस्त होने पर किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
विजय चौधरी ने बताया कि विभागीय समीक्षा में कुछ अधिकारियों की लापरवाही सामने आई और उन पर कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन में सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है और संवेदनशील परिस्थितियों में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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