29 सितंबर 2026
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बिहार बाढ़ 2026: गंडक उफान और नेपाल के पानी से 6 जिले बेहाल, CM सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण

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बिहार बाढ़ 2026: गंडक उफान और नेपाल के पानी से 6 जिले बेहाल, CM सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण

सारांश

बिहार में बाढ़ का दूसरा चरण: नेपाल से 5.5 लाख क्यूसेक पानी और गंडक के उफान ने 6 जिलों को बेहाल कर दिया है। CM सम्राट चौधरी ने हवाई दौरा किया, सरकार राहत में जुटी है — लेकिन असली सवाल वही पुराना है: हर साल की यह तबाही कब थमेगी?

मुख्य बातें

गंडक नदी के उफान और नेपाल से छोड़े गए लगभग 5.5 लाख क्यूसेक पानी से बिहार के करीब 6 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 29 सितंबर 2026 को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत में तेज़ी के निर्देश दिए।
राज्य सरकार ने तटबंध सुरक्षा, राहत शिविर और सामुदायिक रसोई सहित एहतियाती उपाय पहले से तैयार किए हैं।
मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पूरी तरह तैयार है; छह-सात जिलों में हालात सबसे कठिन।
जदयू के श्याम रजक के अनुसार, केंद्र सरकार ने नेपाल के साथ मिलकर ऊँचा बाँध बनाने की माँग मान ली है, जिससे स्थायी समाधान की उम्मीद जगी है।
किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं और कई गाँवों का संपर्क टूटा; बाढ़ का यह दूसरा चरण बताया जा रहा है।

बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति 29 सितंबर 2026 को भी गंभीर बनी रही, जहाँ गंडक नदी के उफान और नेपाल से छोड़े गए लगभग 5.5 लाख क्यूसेक पानी ने करीब 6 जिलों में तबाही मचा दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्वयं हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को राहत कार्य में तेज़ी लाने के निर्देश दिए। खेती को भारी नुकसान पहुँचा है और कई गाँवों का संपर्क बाकी दुनिया से टूट गया है।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य सरकार अलर्ट मोड पर है और यह भीषण बाढ़ का दूसरा चरण बताया जा रहा है। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में लगभग 5.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिसके चलते करीब 6 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं। तटबंधों की सुरक्षा, राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए प्रोटोकॉल पहले से तैयार हैं।

गौरतलब है कि बिहार में हर वर्ष मानसून के दौरान कोसी, गंडक और बागमती बेल्ट के जिलों में बाढ़ का खतरा सबसे अधिक रहता है। इस बार भी किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं और बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचा है।

सरकार की प्रतिक्रिया

बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने बाढ़ की स्थिति पर कहा, 'कभी गंडक नदी तबाही मचाती है तो कभी नेपाल से आने वाले पानी का असर होता है। बाढ़ एक आपदा है और पूरा बिहार इससे जूझ रहा है। हर साल तबाही होती है। किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं, बुनियादी ढाँचा क्षतिग्रस्त हो जाता है।' उन्होंने आगे कहा कि खासकर छह-सात जिलों में हालात बहुत मुश्किल हो जाते हैं, परंतु सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई दौरा करने के बाद अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए हैं।

स्थायी समाधान की माँग

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने बाढ़ के दीर्घकालिक समाधान की बात करते हुए कहा, 'जब नेपाल में ग्लेशियर टूटते हैं और वहाँ से पानी नीचे आता है तो तराई क्षेत्र होने के कारण बिहार पर स्वाभाविक रूप से खतरा अधिक होता है।' उन्होंने बताया कि लंबे समय से नेपाल के साथ मिलकर एक ऊँचा बाँध बनाने की माँग की जा रही थी, और अब केंद्र सरकार ने इस माँग को मान लिया है। रजक के अनुसार, एक बार यह बाँध बन जाने के बाद बिहार की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-नेपाल के बीच जल-प्रबंधन पर सहयोग को लेकर कूटनीतिक वार्ताएँ पहले से चल रही हैं।

आम जनता पर असर

बाढ़ के दूसरे चरण में किसानों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है — खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं और साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई है। कई गाँव बाकी इलाकों से कट गए हैं, जिससे राहत सामग्री पहुँचाने में बाधा आ रही है। सरकार द्वारा स्थापित राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई में विस्थापित परिवारों को आसरा मिल रहा है।

यह बिहार की उस दुखद वार्षिक परंपरा की पुनरावृत्ति है, जिसमें हर मानसून एक पूरे वर्ष की विकास-प्रगति को घड़ी की सुइयाँ पीछे कर देता है।

क्या होगा आगे

राज्य सरकार का तत्काल ध्यान राहत-वितरण और विस्थापित लोगों की सुरक्षित घर-वापसी पर है। दीर्घकालिक दृष्टि से, नेपाल के साथ प्रस्तावित ऊँचे बाँध की परियोजना पर चर्चा आगे बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि तत्काल राहत के साथ-साथ स्थायी जल-प्रबंधन नीति के बिना यह चक्र नहीं टूटेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक 'नीतिगत विफलता' की तरह दिखती है — और यही इस खबर का वह पहलू है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है। दशकों से राहत-वितरण के आँकड़े गिनाए जाते हैं, लेकिन कोसी-गंडक-बागमती बेल्ट के किसानों की फसलें हर मानसून में उसी तरह डूबती हैं। नेपाल के साथ ऊँचे बाँध का प्रस्ताव नया नहीं है — यह माँग वर्षों से की जा रही है; अब केंद्र की 'स्वीकृति' की घोषणा स्वागत-योग्य है, लेकिन इसके क्रियान्वयन की समयसीमा और द्विपक्षीय समझौते की ठोस रूपरेखा सार्वजनिक नहीं हुई है। जब तक वह नहीं होती, यह वक्तव्य भी पिछले वर्षों के वादों की कतार में खड़ा है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में 2026 की बाढ़ का मुख्य कारण क्या है?
गंडक नदी का उफान और नेपाल से छोड़ा गया लगभग 5.5 लाख क्यूसेक पानी इस बाढ़ के मुख्य कारण हैं। बिहार की भौगोलिक स्थिति — तराई क्षेत्र में होने के कारण — नेपाल से आने वाले पानी का सबसे पहला और सबसे बड़ा प्रभाव यहाँ पड़ता है।
बिहार में कितने जिले बाढ़ से प्रभावित हैं?
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद के अनुसार, इस बार करीब 6 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं। मंत्री रामकृपाल यादव ने भी कहा है कि छह-सात जिलों में हालात सबसे मुश्किल हैं।
बिहार सरकार ने बाढ़ राहत के लिए क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को राहत में तेज़ी के निर्देश दिए हैं। सरकार ने तटबंध सुरक्षा, राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के प्रोटोकॉल पहले से तैयार रखे हैं।
बिहार की बाढ़ के स्थायी समाधान के रूप में क्या प्रस्ताव है?
जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक के अनुसार, नेपाल के साथ मिलकर एक ऊँचा बाँध बनाने की माँग लंबे समय से की जा रही थी और अब केंद्र सरकार ने इसे मान लिया है। इस बाँध के बनने से बिहार को बाढ़ से स्थायी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, हालाँकि इसकी समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
बाढ़ से किसानों और ग्रामीण इलाकों पर क्या असर पड़ा है?
बाढ़ के दूसरे चरण में किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं और कई गाँवों का संपर्क बाकी इलाकों से टूट गया है। बुनियादी ढाँचे को भी नुकसान पहुँचा है और विस्थापित परिवारों को राहत शिविरों में आश्रय मिल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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