चक्रवात अर्नब: ओडिशा ने 5 प्रभावित जिलों में 5 IAS अधिकारी तैनात किए, 28 अक्टूबर को लैंडफॉल संभावित
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा सरकार ने 25 अक्टूबर 2026 (रविवार) को 5 वरिष्ठ IAS अधिकारियों को उन 5 जिलों में तत्काल प्रभाव से तैनात किया, जहाँ चक्रवात अर्नब का सर्वाधिक असर पड़ने की आशंका है। ये अधिकारी जिला प्रशासन को राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों में सहायता करेंगे। भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह चक्रवात 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट से टकराने की संभावना है।
किस अधिकारी को कौन सा जिला
ओडिशा के सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में पाँचों तैनातियों का स्पष्ट उल्लेख है। ओडिशा राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के. सुदर्शन चक्रवर्ती को रायगड़ा जिले का प्रभार दिया गया है। अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास एवं अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव पोमा टुडू कोरापुट जिले में चक्रवात-तैयारियों और पुनर्वास की देखरेख करेंगे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव बिजय कुमार डैश को गजपति, खेल विभाग के निदेशक येदुला विजय को मलकानगिरी, और मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव महेश्वर स्वैन को नबरंगपुर जिले में तैनात किया गया है। सभी अधिकारियों को तुरंत अपने-अपने निर्धारित जिलों में पहुँचने का निर्देश दिया गया है।
मंत्री की प्रतिक्रिया और अधिकारियों की शक्तियाँ
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने रविवार को मीडिया को बताया कि तैनात अधिकारी पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करेंगे और संबंधित जिला प्रशासनों एवं कलेक्टरों की सहायता करेंगे। उन्होंने कहा, 'हम उन्हें पूर्ण अधिकार के साथ तैनात कर रहे हैं ताकि वे आवश्यक निर्णय ले सकें। उन्हें ऐसे निर्णय लेने के लिए अधिकृत और सशक्त किया गया है।'
पुजारी ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भारी वर्षा और संभावित बाढ़ की स्थिति से होने वाली जानमाल की हानि को न्यूनतम करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
चक्रवात अर्नब: मौसम विभाग की चेतावनी
IMD के अनुमान के अनुसार, चक्रवात अर्नब पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी में एक अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में तीव्र होने के बाद 28 अक्टूबर को बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश और यानम के तटों से टकराएगा। लैंडफॉल के दौरान हवा की रफ़्तार 115 से 125 किमी प्रति घंटा रहने और झोंकों में 140 किमी प्रति घंटा तक पहुँचने की आशंका है।
यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा के तटीय और आदिवासी-बहुल दक्षिणी जिले पहले से ही मानसून की भारी बारिश से जूझ रहे हैं। गौरतलब है कि रायगड़ा, कोरापुट, गजपति, मलकानगिरी और नबरंगपुर — ये सभी पाँच जिले कमज़ोर आधारभूत संरचना और दुर्गम भूगोल के कारण आपदा के समय सर्वाधिक संवेदनशील माने जाते हैं।
प्रशासनिक सतर्कता: मुख्यालय में उपस्थिति अनिवार्य
ओडिशा सरकार ने रविवार को एक अलग परामर्श भी जारी किया, जिसमें सभी वरिष्ठ अधिकारियों को सोमवार, 27 अक्टूबर से मुख्यालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया। इसका उद्देश्य सुचारू प्रशासनिक कामकाज सुनिश्चित करना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना है।
ओडिशा की यह बहु-स्तरीय तैयारी राज्य की उस आपदा-प्रबंधन प्रतिष्ठा के अनुरूप है जो 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद के दशकों में विकसित हुई है। आने वाले 72 घंटे यह तय करेंगे कि ये तैयारियाँ जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं।