चक्रवात 'दाना': ओडिशा में 60 ODRAF, 17 NDRF और 225 फायर टीम तैनात, CM माझी का 'जीरो कैजुअल्टी' संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
आगामी चक्रवात 'दाना' के मद्देनज़र ओडिशा सरकार ने व्यापक आपदा प्रबंधन तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार, 24 अक्टूबर को भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद घोषणा की कि राज्य इस बार भी 'जीरो कैजुअल्टी' का लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात के 28 अक्टूबर को उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय क्षेत्रों के बीच टकराने की संभावना है।
तैनाती और बचाव व्यवस्था
राज्यभर में आपदा से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव दलों की तैनाती की गई है। 60 ओडिशा आपदा रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF), 17 राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और 225 फायर सर्विसेज टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि सभी इंजीनियरिंग विभाग आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं और सड़कों पर गिरने वाले पेड़ों को तत्काल हटाकर यातायात बहाल करने की विशेष व्यवस्था की गई है।
मछुआरों को 28 अक्टूबर तक समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी जारी की गई है। प्रभावित क्षेत्रों के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन, आवश्यक दवाइयाँ और मेडिकल किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सर्वाधिक प्रभावित जिले और स्कूल बंदी
मुख्यमंत्री ने बताया कि दक्षिण ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिले सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इन पाँचों जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का निर्णय लिया गया है। अन्य जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जिला कलेक्टर शिक्षण संस्थानों को बंद रखने पर स्वतंत्र निर्णय ले सकेंगे।
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, चक्रवात के प्रभाव से राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएँ चलने की आशंका है। हालाँकि, अधिकारियों के अनुसार चक्रवात के आंध्र प्रदेश तट से टकराने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक है।
संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि चक्रवात और बाढ़ आश्रय केंद्र पूरी तरह तैयार हैं। विशेष रूप से मरीजों और गर्भवती महिलाओं को पहले से सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण तटीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच पहले से ही सीमित रहती है।
किसानों को धान कटाई के मौसम को देखते हुए पहले से सतर्क रहने और फसल की कटाई कर उसे सुरक्षित स्थानों पर संग्रहित करने की सलाह दी गई है, ताकि आर्थिक नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।
सरकार का समन्वित दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री माझी ने सभी विभागों को 'होल ऑफ गवर्नमेंट एप्रोच' के तहत समन्वय बनाकर चक्रवात से निपटने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि ओडिशा ने इससे पहले चक्रवात 'दाना' और 'मोंथा' सहित कई बड़ी बाढ़ परिस्थितियों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है, और इसी अनुभव के आधार पर प्रशासन इस बार भी तैयार है।
समीक्षा बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी, मुख्य सचिव, विकास आयुक्त और डीजी फायर सर्विसेज समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। चक्रवात के टकराने के बाद की स्थिति पर निगरानी के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को चौबीसों घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।