ओडिशा के 5 दक्षिणी जिलों में वरिष्ठ IAS अधिकारियों की तैनाती, विकास योजनाओं को मिलेगी रफ़्तार
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा सरकार ने 25 अक्टूबर 2026 को राज्य के दक्षिणी क्षेत्र के 5 महत्वपूर्ण जिलों — रायगडा, कोरापुट, गजपति, मलकानगिरी और नबरंगपुर — में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की तैनाती का आदेश जारी किया है। सरकार का उद्देश्य इन आदिवासी-बहुल और पिछड़े जिलों में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी लाना है।
मुख्य तैनातियाँ और जिम्मेदारियाँ
2011 बैच के आईएएस अधिकारी के. सुदर्शन चक्रवर्ती को रायगडा जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे वर्तमान में ओएससीईसी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पद पर कार्यरत हैं। रायगडा एक आदिवासी और कृषि प्रधान जिला है, जहाँ सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा खाद्य आपूर्ति योजनाओं का सुचारू क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
2012 बैच की अधिकारी डॉ. पोमा टुडू को कोरापुट जिले में तैनात किया गया है। वे अतिरिक्त सचिव, एसटी एवं एससी विकास, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग हैं। कोरापुट राज्य के सबसे बड़े आदिवासी-बहुल जिलों में शामिल है; डॉ. टुडू के अनुभव से शिक्षा, कल्याण और आजीविका कार्यक्रमों को गति मिलने की उम्मीद है।
2012 बैच के ही विजय कुमार डैश को गजपति जिले की जिम्मेदारी दी गई है। वे अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग रहे हैं। पहाड़ी और आदिवासी बहुल गजपति में सुदूर क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना सबसे बड़ी चुनौती है; स्वास्थ्य विभाग में उनके अनुभव से चिकित्सा सुविधाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
2014 बैच के डॉ. येड्डुला विजय को मलकानगिरी जिले में तैनात किया गया है। वे वर्तमान में निदेशक, खेल विभाग के पद पर हैं। मलकानगिरी राज्य के सबसे पिछड़े और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में से एक है। यहाँ युवाओं के लिए शिक्षा, खेल और रोज़गार के अवसर विस्तारित करना सरकार की प्राथमिकताओं में है।
2014 बैच के डॉ. महेश्वर स्वैन को नबरंगपुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं। नबरंगपुर भी आदिवासी-बहुल और कृषि-निर्भर जिला है। मुख्यमंत्री कार्यालय में काम करने के अनुभव के चलते वे सरकारी योजनाओं के सीधे और प्रभावी क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाने में सक्षम माने जा रहे हैं।
इन जिलों की प्रशासनिक चुनौतियाँ
गौरतलब है कि पाँचों जिले राज्य के सबसे वंचित क्षेत्रों में आते हैं — कई सूचकांकों पर ये जिले लगातार निचले पायदान पर रहे हैं। मलकानगिरी में वामपंथी उग्रवाद की ऐतिहासिक उपस्थिति ने विकास योजनाओं की पहुँच को सीमित किया है, जबकि कोरापुट और नबरंगपुर में आदिवासी कल्याण योजनाओं की अंतिम-मील डिलीवरी एक पुरानी समस्या रही है।
यह तैनाती ऐसे समय में आई है जब ओडिशा सरकार दक्षिणी क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य और कृषि विकास पर विशेष जोर दे रही है। वरिष्ठ अधिकारियों की प्रत्यक्ष मौजूदगी से समन्वय तेज़ होगा और योजनाओं की निगरानी का स्तर बढ़ेगा।
सरकार का दृष्टिकोण
सरकारी आदेश के अनुसार, इन तैनातियों का उद्देश्य विशेष विशेषज्ञता वाले अधिकारियों को वहाँ तैनात करना है जहाँ उनके अनुभव की सबसे अधिक आवश्यकता है। डॉ. पोमा टुडू का आदिवासी कल्याण अनुभव कोरापुट में, विजय कुमार डैश का स्वास्थ्य विभाग अनुभव गजपति में और डॉ. महेश्वर स्वैन का नीति-स्तरीय अनुभव नबरंगपुर में सीधे काम आने की संभावना है।
आगे की राह
इन तैनातियों के बाद सभी पाँच जिलों में प्रशासनिक प्राथमिकताओं की समीक्षा और नई कार्ययोजनाएँ तैयार होने की उम्मीद है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो राज्य के अन्य पिछड़े जिलों में भी इसी तर्ज़ पर वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष तैनाती की जा सकती है।