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पश्चिम बंगाल में एसआईआर का दूसरा दौर ज़रूरी: भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य

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पश्चिम बंगाल में एसआईआर का दूसरा दौर ज़रूरी: भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य

सारांश

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने एसआईआर का दूसरा दौर माँगा है — यह दावा करते हुए कि 25 लाख फ़र्ज़ी स्वास्थ्य कार्डों की पहचान यह साबित करती है कि पहला दौर अधूरा रहा। यह बयान उस वक्त आया जब विपक्ष सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहा है।

मुख्य बातें

समिक भट्टाचार्य ने 31 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का दूसरा दौर कराने की माँग की।
उन्होंने कहा कि लगभग 25 लाख फ़र्ज़ी स्वास्थ्य बीमा कार्डों की पहचान यह साबित करती है कि पहले दौर में और नाम हटाए जा सकते थे।
भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस और तत्कालीन राज्य प्रशासन पर एसआईआर प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाया।
भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन का उपहास किया।
उन्होंने दावा किया कि इस साल की शुरुआत में बंगाल विधानसभा चुनाव वर्षों में सबसे शांतिपूर्ण और हिंसा-मुक्त रहे।

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को कहा कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का एक और दौर अनिवार्य है, क्योंकि पहले दौर में बड़ी संख्या में फ़र्ज़ी मतदाताओं के नाम सूची से हटाए नहीं जा सके। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के प्रमुख विपक्षी दल नई दिल्ली में एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

पहला दौर क्यों अधूरा रहा

भट्टाचार्य ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में अब तक की गई एसआईआर अपने उद्देश्य को पूरी तरह पूरा नहीं कर सकी। उन्होंने तर्क दिया कि लगभग 25 लाख स्वास्थ्य बीमा कार्डधारकों के फ़र्ज़ी कार्डों की पहचान किए जाने के तरीके से यह स्पष्ट होता है कि पहले दौर में और भी अवैध मतदाता नामों को सूची से बाहर किया जा सकता था।

उनके अनुसार, पहली समीक्षा प्रक्रिया में कई स्तरों पर बाधाएँ खड़ी की गईं, जिसके चलते पुनरीक्षण अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका।

तृणमूल कांग्रेस और प्रशासन पर आरोप

भाजपा नेता ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और तत्कालीन राज्य प्रशासन पर एसआईआर प्रक्रिया को बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'अगर आज बीडीओ पर हमला न हुआ होता, अगर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के अधिकार न छीने गए होते, अगर उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर न किया गया होता, अगर एक आशा कार्यकर्ता के पति को गोली न मारी गई होती, और अगर हर भाजपा कार्यकर्ता से फॉर्म छीनकर जलाए न गए होते, तो पहले से किए गए एसआईआर में मतदाता सूची से और भी नाम हटा दिए गए होते।'

यह बयान राज्य में एसआईआर के दौरान कथित हिंसा और प्रशासनिक अड़चनों की ओर इशारा करता है। भट्टाचार्य ने इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए दूसरे दौर की माँग को उचित ठहराया।

विपक्ष के आंदोलन पर भाजपा का पलटवार

भट्टाचार्य ने उन विपक्षी दलों का भी उपहास किया जो सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'पश्चिम बंगाल में आम लोग कुमार की पूजा कर रहे हैं। इतने वर्षों में राज्य में ऐसे हिंसा-मुक्त, रक्तपात-मुक्त और शांतिपूर्ण चुनाव नहीं हुए, जैसे इस साल की शुरुआत में विधानसभा चुनावों में देखने को मिले।'

गौरतलब है कि विपक्षी गठबंधन नई दिल्ली में एसआईआर के मुद्दे पर लंबा आंदोलन चलाने की तैयारी में है, जिसे भाजपा चुनावी प्रक्रिया को कमज़ोर करने की कोशिश बता रही है।

राष्ट्रीय संदर्भ में महत्व

यह विवाद ऐसे समय में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना है जब विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर गहरी खाई बन गई है। आलोचकों का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है, जबकि भाजपा इसे मतदाता सूची को दुरुस्त करने की ज़रूरी कवायद बताती है।

आगे देखना होगा कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में दूसरे दौर की एसआईआर की इस माँग पर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं भाजपा कह रही है कि यही प्रक्रिया अधूरी रही। यह टकराव बताता है कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता अब शुद्ध रूप से तकनीकी मसला नहीं रही — यह राजनीतिक वैधता की लड़ाई का अखाड़ा बन चुकी है। बिना किसी स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के, दोनों पक्षों के दावे जनता के बीच भ्रम ही बढ़ाते रहेंगे।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में एसआईआर का दूसरा दौर क्यों माँगा जा रहा है?
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य का कहना है कि पहले दौर की एसआईआर अधूरी रही क्योंकि तृणमूल कांग्रेस और राज्य प्रशासन ने प्रक्रिया में बाधाएँ डालीं। उनके अनुसार, 25 लाख फ़र्ज़ी स्वास्थ्य बीमा कार्डों की पहचान यह दर्शाती है कि मतदाता सूची में अभी भी फ़र्ज़ी नाम मौजूद हो सकते हैं।
एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या होता है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की सफाई के लिए चलाया जाने वाला अभियान है, जिसमें फ़र्ज़ी, डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। यह प्रक्रिया चुनाव से पहले मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध बनाने के लिए होती है।
विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को क्यों हटाना चाहता है?
विपक्षी दल एसआईआर की प्रक्रिया और इसके संचालन को लेकर सीईसी ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रहे हैं और उन्हें हटाने की माँग कर रहे हैं। हालाँकि भाजपा इस माँग को राजनीति से प्रेरित बताती है और कुमार के कार्यकाल में बंगाल में हुए शांतिपूर्ण विधानसभा चुनावों का उदाहरण देती है।
समिक भट्टाचार्य कौन हैं?
समिक भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष और पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं। वे बंगाल में भाजपा के प्रमुख प्रवक्ताओं में से एक हैं।
इस विवाद का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
एसआईआर को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच यह टकराव आगामी चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। मतदाता सूची की शुद्धता का मुद्दा राज्य की राजनीति में एक बड़ा विभाजक मुद्दा बनता जा रहा है, जिसमें चुनाव आयोग की भूमिका और निष्पक्षता पर बहस केंद्रित हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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