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क्या हम एसआईआर के खिलाफ हैं, या इसे गलत तरीके से लागू किया जा रहा है?: सागरिका घोष

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क्या हम एसआईआर के खिलाफ हैं, या इसे गलत तरीके से लागू किया जा रहा है?: सागरिका घोष

सारांश

पश्चिम बंगाल चुनावों में सागरिका घोष ने एसआईआर प्रक्रिया पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया गलत तरीके से लागू की जा रही है, जिससे लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। क्या यह चुनावी प्रक्रिया वास्तव में समस्याग्रस्त है?

मुख्य बातें

सागरिका घोष ने एसआईआर प्रक्रिया पर चिंता जताई है।
टीएमसी का मानना है कि एसआईआर को पारदर्शी होना चाहिए।
इस प्रक्रिया से बुजुर्ग और ग्रामीण समुदाय प्रभावित हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया में खामियों की ओर इशारा किया है।
चुनाव आयोग को वोट देने के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए।

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा और टीएमसी के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा चल रही है। दोनों दल आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं और अपनी-अपनी सरकार बनाने के दावे कर रहे हैं।

टीएमसी नेता सागरिका घोष ने कहा कि हम किसी अन्य पार्टी या नेता पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। हम केवल अपनी पार्टी और अपने नेता के बारे में बात करेंगे। जिस प्रकार ममता बनर्जी की सरकार ने पिछले 15 वर्षों में एक लोकप्रिय और प्रभावशाली प्रशासन प्रदान किया है, हमें पूरा विश्वास है कि लोग ममता बनर्जी के साथ हैं और भविष्य में भी उनके साथ रहेंगे।

बंगाल में एसआईआर का जिक्र करते हुए टीएमसी नेता ने कहा कि जैसा कि हमने पहले कहा है, हम एसआईआर के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमें इस प्रक्रिया में कई खामियां नजर आती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रक्रिया में कई कमियों की ओर इशारा किया है, जिससे बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। बीएलओ अपनी जान ले रहे हैं। इस तरह की जल्दबाजी में एसआईआर नहीं किया जा सकता। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता आवश्यक है।

टीएमसी नेता ने कहा कि एसआईआर को सिटिजन फ्रेंडली होना चाहिए। चुनाव आयोग का उद्देश्य वोट देने के अधिकार की रक्षा करना है, लेकिन आप इस अधिकार को छीनने का काम कर रहे हैं।

सागरिका घोष ने एसआईआर को सॉफ्टवेयर इंटेंसिव रिगिंग बताते हुए कहा कि यह एक ऐसा तंत्र है जिसका उद्देश्य बंगाल के लोगों को परेशान करना है। कोर्ट ने यह निर्देश दिया है कि तथाकथित 'लॉजिकल गड़बड़ियों' की सूची को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, जिससे पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया के सिद्धांतों की पुष्टि हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के इस समय में, सभी पार्टियों को चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। चुनावी प्रक्रिया में सुधार से ही लोकतंत्र को मजबूत किया जा सकता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सागरिका घोष ने एसआईआर पर क्या कहा?
उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को गलत तरीके से लागू किया जाने वाला बताया और इसके खिलाफ अपनी चिंता व्यक्त की।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर टिप्पणी की है?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया में कई खामियां बताई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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